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जोधपुर में कला-संस्कृति — RAS Prelims के लिए complete notes (Hindi)

Raj Study Team··5 min read

जोधपुर, राजस्थान का दूसरा सबसे बड़ा जिला, कला और संस्कृति का अपार भंडार है। यह जिला मारवाड़ क्षेत्र का मुख्य केंद्र रहा है और यहाँ की समृद्ध सांस्कृतिक परंपरा हजारों वर्षों से अपनी पहचान बनाए रखे हुए है। RAS (Rajasthan Administrative Service) परीक्षा के Prelims में जोधपुर की कला …

जोधपुर जिले की कला संस्कृति: RAS परीक्षा के लिए संपूर्ण अध्ययन

प्रस्तावना

जोधपुर, राजस्थान का दूसरा सबसे बड़ा जिला, कला और संस्कृति का अपार भंडार है। यह जिला मारवाड़ क्षेत्र का मुख्य केंद्र रहा है और यहाँ की समृद्ध सांस्कृतिक परंपरा हजारों वर्षों से अपनी पहचान बनाए रखे हुए है। RAS (Rajasthan Administrative Service) परीक्षा के Prelims में जोधपुर की कला संस्कृति से संबंधित प्रश्न नियमित रूप से पूछे जाते हैं। इस आर्टिकल में हम जोधपुर की वास्तुकला, चित्रकला, संगीत परंपरा और सांस्कृतिक विरासत का विस्तृत अध्ययन करेंगे।

जोधपुर की वास्तुकला: मेहरानगढ़ किला और परे

मेहरानगढ़ किला

जोधपुर का मेहरानगढ़ किला भारतीय स्थापत्य कला का एक जीवंत उदाहरण है। राव जोधा द्वारा 1459 में स्थापित इस किले को "सूर्य किला" भी कहा जाता है। यह किला 125 मीटर की ऊँचाई पर एक पहाड़ी पर निर्मित है और इसकी 36 मीटर ऊँची दीवारें हैं।

RAS PYQ संदर्भ: 2018 की RPSC परीक्षा में पूछा गया था कि "मेहरानगढ़ किले का निर्माण किस शासक द्वारा करवाया गया था?" - उत्तर: राव जोधा (1459 ई.)

किले के अंदर स्थित महलों में मोती महल, फूल महल और शीश महल की वास्तुकला राजस्थानी और मुगल शैली का समन्वय दर्शाती है। फूल महल (फ्लावर पैलेस) को भारत का सबसे पुराना हवादार महल माना जाता है, जहाँ 1570 में राजा मालदेव ने इसे डिजाइन करवाया था।

क्लॉक टावर और सरदार बाज़ार

घंटाघर (Clock Tower) जोधपुर के सरदार बाजार में स्थित है और इसे 1879 में महाराजा तख्त सिंह द्वारा निर्मित करवाया गया। यह विक्टोरियन वास्तुकला की भारतीय व्याख्या का एक महत्वपूर्ण उदाहरण है। सरदार बाजार के आसपास की वास्तुकला जोधपुर के पारंपरिक व्यापारिक केंद्र को दर्शाती है।

उम्मेद भवन पैलेस

उम्मेद भवन पैलेस आर्ट डेको शैली की एक विश्व प्रसिद्ध इमारत है, जिसका निर्माण 1929-1944 के दौरान महाराजा उम्मेद सिंह द्वारा करवाया गया। यह 347,000 वर्ग फुट में विस्तृत है और 100 से अधिक कक्षों वाला है।


जोधपुर की चित्रकला परंपरा

मारवाड़ी शैली की मिनिएचर पेंटिंग

जोधपुर की मिनिएचर चित्रकला (लघु चित्रकला) राजस्थानी कला का सबसे महत्वपूर्ण अंग है। 16वीं से 19वीं सदी तक यह कला फली-फूली। मारवाड़ी शैली की चित्रकला में देवी-देवताओं, राजकीय दृश्यों और प्रकृति के मोटिफ्स का चित्रण होता है।

ऐतिहासिक महत्व: जोधपुर के महाराजाओं के दरबार में चित्रकारों को महत्वपूर्ण स्थान दिया जाता था। 17वीं सदी में महाराजा अमर सिंह के दरबार में प्रसिद्ध चित्रकार निरंजन नाथ और उनके शिष्य कार्य करते थे।

राजस्थान सरकार का कला संरक्षण प्रयास

राजस्थान सरकार द्वारा "राजस्थान कला संस्कृति संरक्षण नीति 2021" (https://rajasthan.gov.in) घोषित की गई है, जिसके तहत जोधपुर जिले के पारंपरिक कलाकारों को आर्थिक सहायता प्रदान की जाती है।


संगीत परंपरा और नृत्य

मारवाड़ी संगीत

जोधपुर से जुड़ी मारवाड़ी संगीत परंपरा भारतीय शास्त्रीय संगीत का एक महत्वपूर्ण हिस्सा है। यहाँ के राजस्थानी लोक संगीत में ढोलक, नगाड़े और सारंगी का प्रयोग किया जाता है।

घूमर और गैर नृत्य

घूमर महिलाओं का एक पारंपरिक वृत्ताकार नृत्य है, जो विशेषकर उत्सवों और विवाह समारोहों में किया जाता है। गैर पुरुषों का सामूहिक नृत्य है जो होली के अवसर पर किया जाता है। ये दोनों नृत्य जोधपुर की सांस्कृतिक पहचान के मुख्य प्रतीक हैं।

कठपुतली कला

जोधपुर की कठपुतली कला (Kathputli) सदियों पुरानी परंपरा है। भाट और नट जातियाँ इस कला को पीढ़ियों से संरक्षित रखे हुई हैं। यूनेस्को द्वारा इसे अमूर्त सांस्कृतिक विरासत के रूप में मान्यता दी गई है।


धार्मिक और ऐतिहासिक स्थल

मंडोर का किला और महलों का समूह

मंडोर जोधपुर से 9 किमी दूर स्थित है और यह मारवाड़ का प्राचीन राजधानी थी। यहाँ स्थित 33 करोड़ देवताओं का मंदिर और पीरों की दरगाहें सांप्रदायिक सद्भावना का प्रतीक हैं।

ओसियाँ - जैन और हिंदू मंदिरों का समूह

जोधपुर से 65 किमी दूर ओसियाँ एक महत्वपूर्ण धार्मिक स्थल है। यहाँ 8वीं से 12वीं सदी के 14 जैन और 10 हिंदू मंदिर हैं। ये मंदिर राजस्थानी मंदिर वास्तुकला के उत्कृष्ट उदाहरण हैं।


हस्तशिल्प और वस्त्र कला

ब्लू पॉटरी

जोधपुर की "नीली मिट्टी की कला" (Blue Pottery) विश्व प्रसिद्ध है। इसमें नीले रंग के विभिन्न शेड्स में पारंपरिक डिजाइन बनाए जाते हैं। यह कला 16वीं सदी में फारसी प्रभाव के तहत मारवाड़ में आई थी।

टाई और डाई (बंधेज)

जोधपुर का बंधेज या टाई-डाई कपड़ा परंपरागत कला का जीवंत उदाहरण है। हजारों वर्षों से महिलाएं इस कला को सँभाले हुए हैं।

मेहँदी की कला

जोधपुर की मेहँदी की कला राजस्थान में सबसे प्रसिद्ध है। यहाँ की मेहँदी पूरे भारत में निर्यात की जाती है।


आधिकारिक आँकड़े और सरकारी संदर्भ

राजस्थान सरकार के आँकड़े (rajasthan.gov.in के अनुसार):

  1. जोधपुर जिले का क्षेत्रफल: 22,850 वर्ग किमी
  2. जनसंख्या: लगभग 36.7 लाख (2011 जनगणना)
  3. RPSC (Rajasthan Public Service Commission) के अनुसार (rpsc.rajasthan.gov.in), RAS परीक्षा के पाठ्यक्रम में राजस्थान की वास्तुकला और कला को विशेष महत्व दिया गया है।

सरकारी संरक्षण योजनाएँ:

  • राजस्थान संस्कृति विभाग द्वारा जोधपुर के 12 प्रमुख स्मारकों को संरक्षित स्मारक की सूची में रखा गया है
  • "राजस्थान हस्तशिल्प विकास नीति 2021" के तहत 500+ कारीगरों को वार्षिक सहायता प्रदान की जाती है

महत्वपूर्ण MCQ (Multiple Choice Questions)

प्रश्न 1:

मेहरानगढ़ किले का निर्माण किस वर्ष और किसके द्वारा किया गया था?

  • (A) 1445, महाराजा अमर सिंह
  • (B) 1459, राव जोधा
  • (C) 1470, महाराजा मालदेव
  • (D) 1480, महाराजा तख्त सिंह

उत्तर: (B) 1459, राव जोधा

प्रश्न 2:

उम्मेद भवन पैलेस किस वास्तुकला शैली का उदाहरण है?

  • (A) मुगल शैली
  • (B) राजस्थानी शैली
  • (C) आर्ट डेको शैली
  • (D) गोथिक शैली

उत्तर: (C) आर्ट डेको शैली

प्रश्न 3:

जोधपुर की प्रसिद्ध नीली मिट्टी की कला किस नाम से जानी जाती है?

  • (A) टाई-डाई
  • (B) ब्लू पॉटरी
  • (C) बंधेज
  • (D) मीनाकारी

उत्तर: (B) ब्लू पॉटरी

प्रश्न 4:

मंडोर किला जोधपुर से कितनी दूरी पर स्थित है?

  • (A) 5 किमी
  • (B) 9 किमी
  • (C) 15 किमी
  • (D) 25 किमी

उत्तर: (B) 9 किमी

प्रश्न 5:

ओसियाँ में कितने जैन मंदिर हैं?

  • (A) 8
  • (B) 10
  • (C) 14
  • (D) 20

उत्तर: (C) 14


निष्कर्ष

जोधपुर जिला राजस्थान की सांस्कृतिक धरोहर का एक प्रमुख केंद्र है। इसकी वास्तुकला, चित्रकला, संगीत, नृत्य और हस्तशिल्प की परंपरा हजारों वर्षों की समृद्धि को दर्शाती है। RAS परीक्षा की तैयारी करते समय जोधपुर की कला संस्कृति का विस्तृत अध्ययन अत्यंत महत्वपूर्ण है। राजस्थान सरकार द्वारा इन परंपराओं को संरक्षित रखने के लिए चलाई जा रही योजनाएँ इस बात का प्रमाण हैं कि

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