कोटा जिला — RAS GK प्रोफाइल, इतिहास, भूगोल, जनसांख्यिकी
RAS Prelims 2021 में पूछा गया था: "राजस्थान में कौन सा जिला दक्षिण-पूर्वी भाग में स्थित है और चंबल नदी से सीमांकित है?" कोटा इसी प्रश्न का केंद्रीय उत्तर है, जो इस जिले की भौगोलिक महत्ता को रेखांकित करता है।
कोटा जिला: विस्तृत भौगोलिक और सामाजिक अध्ययन
प्रारंभिक नोट: पूर्व परीक्षा प्रश्न
RAS Prelims 2021 में पूछा गया था: "राजस्थान में कौन सा जिला दक्षिण-पूर्वी भाग में स्थित है और चंबल नदी से सीमांकित है?" कोटा इसी प्रश्न का केंद्रीय उत्तर है, जो इस जिले की भौगोलिक महत्ता को रेखांकित करता है।
इतिहास (Itihas)
कोटा का इतिहास मध्यकालीन राजपूत शासन से जुड़ा है। यह क्षेत्र प्राचीनकाल में मत्स्य जनपद का अंश था, किंतु मध्यकालीन काल में इसका महत्व वृद्धि हुई। कोटा की स्थापना 1579 में राव मधुकरशाह द्वारा की गई थी, जो बूंदी के राव सुरजनसिंह के पुत्र थे। मधुकरशाह को बूंदी राज्य से पृथक कर कोटा का अलग राज्य दिया गया था।
17वीं-18वीं शताब्दी में कोटा राज्य अपने शिल्प, साहित्य और चित्रकला के लिए प्रसिद्ध रहा। मुगल साम्राज्य के अधीन कोटा मनसबदारी व्यवस्था का महत्वपूर्ण अंग बना। राव किशोरसिंह (1628-1658) के काल में कोटा की शक्ति में उल्लेखनीय वृद्धि हुई। 18वीं शताब्दी में कोटा की कला और संस्कृति का पुनरुत्थान हुआ, विशेषकर राव उम्मेद सिंह के शासनकाल में।
ब्रिटिश काल में कोटा एक रियासत रहा और 1947 के बाद भारतीय संघ में शामिल हुआ। 1949 में कोटा को वर्तमान प्रशासनिक सीमाओं में संगठित किया गया। आजादी के बाद कोटा का औद्योगिकीकरण तीव्र गति से हुआ, विशेषकर 1980 के दशक में।
भूगोल: नदियां, दुर्ग और प्राकृतिक संरचना
कोटा जिला राजस्थान के दक्षिण-पूर्वी भाग में स्थित है। इसकी भौगोलिक विशेषताएं इस प्रकार हैं:
नदियां (Rivers)
चंबल नदी कोटा जिले की जीवनरेखा है। यह मध्यप्रदेश से निकलकर उत्तर-पश्चिमी दिशा में बहती है और कोटा के पास अपना विस्तृत बेसिन बनाती है। चंबल नदी के किनारे कोटा शहर अवस्थित है। कोटा बैराज (1960 में निर्मित) इसी नदी पर बना है, जो कृषि सिंचाई का प्रमुख साधन है।
पार्वती नदी चंबल की एक महत्वपूर्ण सहायक नदी है, जो पूर्वी कोटा से गुजरती है। कलीसिंध नदी भी जिले के दक्षिणी भाग में बहती है।
दुर्ग और ऐतिहासिक संरचनाएं
कोटा दुर्ग (कीला) चंबल नदी के बाएं तट पर स्थित है। इसका निर्माण राव मधुकरशाह द्वारा आरंभ किया गया था। यह दुर्ग अपनी स्थापत्य कला के लिए प्रसिद्ध है, जिसमें राजस्थानी और मुगल शैली का मिश्रण दृष्टिगत होता है। इसके अंदर राव मधुकरशाह द्वारा निर्मित महल और हवेलियां हैं।
गढ़पालन की हवेली, माधव विलास पैलेस, और छत्र विलास पैलेस कोटा की वास्तुकला के उत्कृष्ट उदाहरण हैं। कोटा बारां दुर्ग क्षेत्र का एक अन्य महत्वपूर्ण संरचना है।
भौगोलिक स्थितियां
कोटा का क्षेत्रफल लगभग 5886 वर्ग किमी है। यह महाकाली पर्वत श्रेणी के समीप स्थित है। जलवायु अर्द्ध-शुष्क है, औसत वर्षा 60-80 सेमी वार्षिक। मिट्टी मुख्यतः बलुई-दोमट है, जो धान और गेहूं की खेती के लिए उपयुक्त है।
अर्थव्यवस्था (Arthavyavastha)
कोटा की अर्थव्यवस्था कृषि और उद्योग दोनों पर निर्भर है।
कृषि
कोटा मुख्यतः कपास, गेहूं, धान और दलहन का उत्पादक जिला है। चंबल नदी की सिंचाई व्यवस्था से इस क्षेत्र में हरित क्रांति का लाभ मिला है। कोटा बैराज से निकाली गई नहरें जिले के 50% से अधिक खेतों को सिंचित करती हैं। तंबाकू की खेती भी एक महत्वपूर्ण आय का स्रोत है।
उद्योग
कोटा राजस्थान का एक प्रमुख औद्योगिक केंद्र है। इंदिरा गांधी नहर परियोजना और अन्य बुनियादी ढांचा कोटा को औद्योगिक विकास के लिए अनुकूल बनाते हैं। यहां रसायन, कपड़ा, चीनी, सीमेंट और विद्युत उद्योग प्रमुख हैं।
कोटा सुपर थर्मल पावर प्लांट (दो इकाइयां, कुल 1240 मेगावाट क्षमता) क्षेत्र की सबसे बड़ी औद्योगिक संरचना है। यह महत्वपूर्ण रोजगार प्रदान करता है। राजस्थान सरकार के औद्योगिक विभाग के अनुसार कोटा में 5000+ पंजीकृत उद्योग हैं (https://industries.rajasthan.gov.in/)।
वाणिज्य
कोटा का बाजार भारी व्यापार का केंद्र है। यह कृषि उत्पादों, विशेषकर कपास, के निर्यात के लिए महत्वपूर्ण है। कोटा मंडी भारत की सबसे बड़ी कपास मंडियों में से एक है।
प्रसिद्ध स्थल, पर्व और सांस्कृतिक विरासत
मंदिर और धार्मिक स्थल
राजराजेश्वरी मंदिर कोटा का सबसे प्रसिद्ध मंदिर है, जो कोटा दुर्ग परिसर में स्थित है। यह दक्षिण भारतीय और राजस्थानी शैली में निर्मित है।
जगमंदिर चंबल नदी में एक द्वीप पर बना मंदिर-महल है, जो कोटा की वास्तुकला की बेजोड़ कृति है।
राव मधुकरशाह की छतरी और अन्य ऐतिहासिक छतरियां कोटा के सांस्कृतिक महत्व को दर्शाती हैं।
कला और चित्रकला
कोटा स्कूल ऑफ पेंटिंग भारतीय लघु चित्रकला का एक प्रमुख केंद्र है। 18वीं-19वीं शताब्दी में यहां विकसित चित्रकला शैली शिकार, संगीत और दरबारी दृश्यों के लिए विख्यात है। यह बूंदी शैली का विकसित रूप है, किंतु अधिक जीवंत और गतिशील है।
पर्व और त्योहार
गणगौर - यह वसंत का पर्व कोटा में विशेष उत्साह से मनाया जाता है। दिवाली, होली और दशहरा यहां के प्रमुख पर्व हैं। तीज भी स्थानीय महिलाओं में अत्यंत लोकप्रिय है।
लोक संस्कृति
कोटा की लोक संस्कृति राजस्थानी परंपरा का प्रतिनिधित्व करती है। यहां ढोलक, मंजीरे और सारंगी की परंपरा मजबूत है। लांगुरिया नृत्य और घूमर स्थानीय त्योहारों पर प्रस्तुत किए जाते हैं।
प्रशासनिक विभाजन (Prashasanik Sanrachna)
कोटा जिला निम्नलिखित तहसीलों में विभाजित है:
- कोटा तहसील - मुख्यालय
- किशनगंज तहसील
- लाडपुरा तहसील
- संगोद तहसील
- खेतड़ी तहसील
कोटा शहर जिले का जिला मुख्यालय है। जिले में 7 नगर निकाय और 215 गांव हैं। कोटा नगर निगम (Municipal Corporation) शहरी क्षेत्र के प्रशासन के लिए जिम्मेदार है।
राजस्थान सरकार के स्थानीय निकाय विभाग की जानकारी के अनुसार कोटा में पंचायती राज व्यवस्था प्रभावी है (https://panchayat.rajasthan.gov.in/)।
RAS Prelims के लिए महत्वपूर्ण MCQ
प्रश्न 1
कोटा जिले की स्थापना किस वर्ष और किसके द्वारा की गई?
(A) 1560 में राव बीरसिंह द्वारा
(B) 1579 में राव मधुकरशाह द्वारा
(C) 1600 में राव किशोरसिंह द्वारा
(D) 1650 में राव उम्मेद सिंह द्वारा
उत्तर: (B)
व्याख्या: राव मधुकरशाह (बूंदी के राव सुरजनसिंह के पुत्र) ने 1579 में कोटा की स्थापना की। वह चंबल नदी के किनारे कोटा दुर्ग का निर्माण करके एक स्वतंत्र राज्य की नींव डाली।
प्रश्न 2
कोटा बैराज का निर्माण किस नदी पर किया गया है?
(A) बनास नदी पर
(B) चंबल नदी पर
(C) कलीसिंध नदी पर
(D) पार्वती नदी पर
उत्तर: (B)
व्याख्या: कोटा बैराज 1960 में चंबल नदी पर बनाया गया। यह बांध कोटा और आसपास के क्षेत्रों में कृषि सिंचाई के लिए मुख्य स्रोत है और जलविद्युत उत्पादन में भी सहायक है।
प्रश्न 3
**कोटा स्कूल ऑ
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