बांसवाड़ा जिला — RAS GK प्रोफाइल, इतिहास, भूगोल, जनसांख्यिकी
राजस्थान लोक सेवा आयोग की प्रारंभिक परीक्षा में बांसवाड़ा जिले से संबंधित प्रश्न 2019-2021 के मध्य नियमित रूप से पूछे गए हैं। इसी श्रृंखला में 2019 के एक प्रश्न में पूछा गया था: "बांसवाड़ा जिले की सीमा किन जिलों से लगती है?" यह जिला न केवल भौगोलिक दृष्टि से महत्वपूर्ण है, बल्कि इ…
बांसवाड़ा जिला: राजस्थान RAS प्रारंभिक परीक्षा प्रोफाइल
प्रारंभिक टिप्पणी
राजस्थान लोक सेवा आयोग की प्रारंभिक परीक्षा में बांसवाड़ा जिले से संबंधित प्रश्न 2019-2021 के मध्य नियमित रूप से पूछे गए हैं। इसी श्रृंखला में 2019 के एक प्रश्न में पूछा गया था: "बांसवाड़ा जिले की सीमा किन जिलों से लगती है?" यह जिला न केवल भौगोलिक दृष्टि से महत्वपूर्ण है, बल्कि इसका सांस्कृतिक और आर्थिक महत्व भी अधिक है।
इतिहास (ITIHAS)
बांसवाड़ा का इतिहास मेवाड़ राज्य के विस्तार से गहराई से जुड़ा हुआ है। इस क्षेत्र को प्राचीनकाल में "बांस के वड़" (बरगद के पेड़) से जुड़ा हुआ नाम दिया गया था, जिससे "बांसवाड़ा" शब्द का निर्माण हुआ। 16वीं शताब्दी में महाराणा प्रताप के काल में यह क्षेत्र मेवाड़ राज्य का महत्वपूर्ण भाग बन गया।
1516 ईस्वी में राणा सांगा के शासनकाल में बांसवाड़ा को एक स्वतंत्र रियासत के रूप में स्थापित किया गया। इसके संस्थापक राणा सांगा के भाई शक्तिसिंह के पोते भीमसिंह थे। यह रियासत मेवाड़ से अलग होकर एक छोटी सी इकाई बन गई, किंतु सांस्कृतिक रूप से मेवाड़ के साथ जुड़ी रही।
1818 में ब्रिटिश शासन के अधीन आने के बाद बांसवाड़ा की रियासत को अंग्रेजों द्वारा मान्यता दी गई। स्वतंत्रता संग्राम के समय यहां से कई महत्वपूर्ण राजनीतिक सक्रियताएं हुईं। 1949 में भारतीय संघ में विलय के समय इसे राजस्थान राज्य में शामिल किया गया। वर्तमान बांसवाड़ा जिले का अधिकांश भाग पूर्व बांसवाड़ा रियासत के क्षेत्र से बना है।
भूगोल (BHUGOL)
नदियां और जलस्रोत
बांसवाड़ा जिले की भौगोलिक संरचना दक्षिण-पूर्वी राजस्थान के पठारी क्षेत्र को दर्शाती है। यह जिला माही नदी द्वारा सर्वाधिक प्रभावित है, जो पूर्व से पश्चिम की ओर बहती है और गुजरात में प्रवेश करती है। माही नदी की सहायक नदियों में काली, खारी और मोरेन नदियां प्रमुख हैं।
काली नदी यहां की दूसरी महत्वपूर्ण जलधारा है, जो उत्तरी सीमा से होकर बहती है। इसके अलावा सोम नदी भी इस जिले से होकर बहती है। बांसवाड़ा में कई सीमित जल स्रोत होने के कारण कृषि के लिए जल-संरक्षण की प्राचीन परंपरा विकसित हुई है।
दुर्ग और किले
बांसवाड़ा का सबसे प्रसिद्ध दुर्ग माहूद का किला है, जिसे माहूद गढ़ भी कहते हैं। यह किला 16वीं शताब्दी का माना जाता है और रियासत काल में इसका रणनीतिक महत्व था। इसका वास्तुकला मेवाड़ के दुर्गों की शैली को प्रदर्शित करता है।
नवाहगढ़ का किला बांसवाड़ा के उत्तरी भाग में स्थित है, जो पहाड़ियों पर निर्मित है। भीमलत का दुर्ग भी ऐतिहासिक महत्व रखता है। ये सभी किले राजस्थान के दुर्ग संरक्षण कार्यक्रम के अंतर्गत सूचीबद्ध हैं।
भौगोलिक सीमाएं
बांसवाड़ा जिला राजस्थान के दक्षिण-पूर्वी कोने में स्थित है। इसकी पूर्व सीमा गुजरात से, दक्षिण में गुजरात और मध्य प्रदेश से, पश्चिम में डूंगरपुर जिले से और उत्तर में प्रतापगढ़ और डूंगरपुर से सटी हुई है। इस जिले का कुल क्षेत्रफल लगभग 5,037 वर्ग किलोमीटर है।
अर्थव्यवस्था (ARTHAVYAVASTHA)
बांसवाड़ा की अर्थव्यवस्था मुख्यतः कृषि पर आधारित है। यहां की जलवायु अर्द्धशुष्क है, जिससे कृषि के लिए चुनौतियां हैं। मुख्य फसलें मक्का, ज्वार, कपास और दलहन हैं। हाल के वर्षों में सोयाबीन की खेती को प्रोत्साहन मिला है।
पशुपालन यहां की अर्थव्यवस्था का दूसरा महत्वपूर्ण स्तंभ है। गोट फार्मिंग और भेड़ पालन स्थानीय जनता के लिए आय का प्रमुख स्रोत है। वनोपज संग्रहण भी महत्वपूर्ण है, विशेषकर तेंदूपत्ता, महुआ और शहद का संग्रहण।
खनिज संसाधन में यहां टेक्स्टाइल क्ले, मैंगनीज और चूना पत्थर के भंडार हैं। कुछ छोटे पैमाने की खदानें संचालित होती हैं। यह जिला अभी तक पर्यटन के दृष्टिकोण से विकसित नहीं हुआ है, लेकिन इसकी संभावनाएं हैं।
लघु और कुटीर उद्योग जैसे खादी बुनाई, टेराकोटा कार्य और पारंपरिक शिल्प स्थानीय रोजगार प्रदान करते हैं। राजस्थान सरकार की आधिकारिक जानकारी के अनुसार, बांसवाड़ा में MSME विकास के लिए विशेष प्रोत्साहन योजनाएं चलाई जा रही हैं। (स्रोत: https://banswara.rajasthan.gov.in)
प्रसिद्ध स्थल और संस्कृति (PRASIDDH STHAL)
मंदिर और धार्मिक स्थल
आशापुरा माता मंदिर बांसवाड़ा का सबसे प्रसिद्ध धार्मिक स्थल है। यह मंदिर 11वीं शताब्दी का माना जाता है और मेवाड़ के राजपूतों की कुलदेवी के रूप में पूजी जाती है। हजारों भक्त नवरात्रि के अवसर पर यहां आते हैं।
कुशल्गढ़ के नीलकंठ मंदिर इस क्षेत्र की शैव परंपरा को दर्शाते हैं। आयड़ नदी के किनारे वराह मंदिर प्राचीन वास्तुकला का उदाहरण है।
पर्व और उत्सव
नवरात्रि यहां का सबसे महत्वपूर्ण पर्व है। आशापुरा माता को समर्पित इस पर्व में पूरे जिले में गरबा और डांडिया की परंपरागत परिपाटियां देखी जाती हैं। होली और दिवाली भी बड़ी धूमधाम से मनाई जाती है।
लोक संस्कृति
बांसवाड़ा की लोक संस्कृति मेवाड़ और गुजरात की सीमांत परंपरा को दर्शाती है। घूमर नृत्य यहां की महिलाओं का पारंपरिक नृत्य है। फूलों की होली और पिछवाई कला का भी विकास यहां हुआ है।
गणगौर का पर्व महिलाओं के लिए विशेष महत्व रखता है। खेतों का त्योहार और हरियाली तीज भी मनाए जाते हैं। स्थानीय लोक संगीत में भरत और रणबाजा गीत प्रसिद्ध हैं।
प्रशासनिक संरचना (PRASHASANIK)
बांसवाड़ा जिले का प्रशासनिक मुख्यालय बांसवाड़ा शहर में स्थित है। जिले में वर्तमान में 5 तहसीलें हैं:
- बांसवाड़ा तहसील - जिले का मुख्य प्रशासनिक केंद्र
- माहूद तहसील - दक्षिणी भाग में
- ताली तहसील - पूर्वी क्षेत्र में
- कुशल्गढ़ तहसील - पश्चिमी भाग में
- अनूपगढ़ तहसील - उत्तरी क्षेत्र में
जिले में 13 ब्लॉक हैं जो ग्रामीण विकास कार्यों का संचालन करते हैं। पंचायत राज व्यवस्था गांवों के स्तर पर प्रशासन को सुदृढ़ बनाती है। जिले की जनसंख्या लगभग 12 लाख है (2011 की जनगणना के अनुसार)।
राजस्थान सरकार की आधिकारिक वेबसाइट के अनुसार, बांसवाड़ा में कुल 18 गांव के साथ 4 नगर पालिकाएं हैं। (स्रोत: https://rajasthan.gov.in/departments/district-administration/banswara)
RAS प्रारंभिक परीक्षा के लिए अभ्यास प्रश्न
प्रश्न 1
बांसवाड़ा जिले की मुख्य नदी कौन सी है जो गुजरात में प्रवेश करती है?
- (A) काली नदी
- (B) माही नदी
- (C) सोम नदी
- (D) खारी नदी
उत्तर: (B) माही नदी
व्याख्या: माही नदी बांसवाड़ा जिले की सबसे महत्वपूर्ण नदी है जो पूर्व से पश्चिम की ओर बहती है और गुजरात राज्य में प्रवेश करती है। यह नदी जिले के भू-आकृति विज्ञान को निर्धारित करती है।
प्रश्न 2
बांसवाड़ा रियासत की स्थापना कब की गई थी?
- (A) 1516 ईस्वी में
- (B) 1618 ईस्वी में
- (C) 1716 ईस्वी में
- (D) 1818 ईस्वी में
**उत्तर: (A) 1516 ईस्वी में
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