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भीलवाड़ा जिला — RAS GK प्रोफाइल, इतिहास, भूगोल, जनसांख्यिकी

Raj Study Team··5 min read

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भीलवाड़ा जिला: राजस्थान RAS प्रीलिम्स संपूर्ण प्रोफाइल

PYQ संदर्भ

RAS (P) 2018 में पूछा गया था: "भीलवाड़ा जिले की स्थापना किस वर्ष हुई?" उत्तर था 1974। यह प्रश्न जिले के आधुनिक प्रशासनिक इतिहास की महत्ता को दर्शाता है।


इतिहास (Itihas)

भीलवाड़ा राजस्थान के दक्षिण-पूर्वी भाग में अवस्थित एक ऐतिहासिक जिला है, जिसका नाम स्थानीय भील जनजाति से लिया गया है। इसका प्राचीन नाम "हिंडोल" था। मेवाड़ के महाराणा प्रताप के काल में यह क्षेत्र महत्वपूर्ण राजनीतिक केंद्र था। हल्दीघाटी की लड़ाई (1576) में मेवाड़ की सेनाएं इसी क्षेत्र से संचालित होती थीं।

आधुनिक प्रशासनिक दृष्टि से भीलवाड़ा 1 अप्रैल 1974 को अजमेर जिले से अलग करके एक स्वतंत्र जिले के रूप में गठित किया गया। प्राचीन काल में यह मालवा साम्राज्य का हिस्सा था। मुगल काल में यह अजमेर सूबे के अंतर्गत रहा। 1818 में ब्रिटिश संरक्षण में आने से पहले यह मेवाड़ी रियासत का भाग था।

जिले का ऐतिहासिक महत्व इसलिए भी है कि यहाँ दिलवाड़ा मंदिर समूह अवस्थित है, जो जैन धर्म की वास्तुकला का उत्कृष्ट नमूना माना जाता है। भीलवाड़ा शहर स्वयं 15वीं शताब्दी में एक व्यापारिक केंद्र के रूप में विकसित हुआ था।


भूगोल: नदियाँ, दुर्ग और भौतिक विशेषताएँ

नदियाँ: भीलवाड़ा की जल व्यवस्था मुख्यतः बनास नदी पर निर्भर है, जो उत्तर से दक्षिण की ओर बहती है। कोठारी नदी जिले के पूर्वी भाग में प्रवाहित होती है। चंबल नदी का एक हिस्सा जिले की पूर्वी सीमा को स्पर्श करता है। माही नदी का भी सीमांत प्रभाव है। ये नदियाँ कृषि और पेयजल के लिए महत्वपूर्ण जल स्रोत हैं।

दुर्ग और ऐतिहासिक स्थल:

  • मेनाल दुर्ग: जिले के उत्तरी भाग में अवस्थित, महत्वपूर्ण पर्यटन स्थल
  • भीलवाड़ा किला: शहर के मध्य में, 15वीं शताब्दी में निर्मित
  • बस्सी दुर्ग: पूर्वी सीमा पर, मेवाड़ के सैन्य महत्व का प्रतीक

भौतिक विशेषताएँ: जिला समुद्र तल से 400-600 मीटर की ऊँचाई पर स्थित है। इसका क्षेत्रफल 5,928 वर्ग किलोमीटर है। अरावली पर्वत श्रृंखला जिले के मध्य-पश्चिमी भाग से होकर गुजरती है। भूमि कठोर और पहाड़ी है।


अर्थव्यवस्था (Arthavyvastha)

भीलवाड़ा की अर्थव्यवस्था कृषि, पशुपालन और वस्त्र उद्योग पर आधारित है, जिससे इसे "राजस्थान के मैनचेस्टर" के नाम से जाना जाता है।

कृषि: जिले की प्रमुख फसलें मोठ (मूंग), सोयाबीन, तिल और अन्य दलहन हैं। बारानी क्षेत्र होने के कारण मोठ की खेती परंपरागत रूप से की जाती है। कपास और मेहँदी भी महत्वपूर्ण नकदी फसलें हैं। हाल के वर्षों में सरसों की खेती में वृद्धि हुई है।

वस्त्र उद्योग: भीलवाड़ा का वस्त्र उद्योग भारत के प्रमुख उद्योगों में से एक है। यहाँ सूती वस्त्र, प्रिंटिंग और डाइंग का बृहत् कार्य होता है। जिले में 1,500 से अधिक स्पिनिंग मिलें हैं (राजस्थान सरकार 2023 डेटा)। भीलवाड़ा शहर विश्व स्तर पर सूती डेनिम और प्रिंटिंग कपड़ों के लिए प्रसिद्ध है।

अन्य उद्योग:

  • खनिज: फेल्सपार, पत्थर खनन
  • लकड़ी प्रसंस्करण
  • चमड़ा कार्य
  • खाद्य प्रसंस्करण

राजस्थान सरकार के औद्योगिक नीति 2019 के अनुसार भीलवाड़ा को "इंडस्ट्रियल क्लस्टर" का दर्जा दिया गया है।


प्रसिद्ध स्थल: त्यौहार, मंदिर और लोक संस्कृति

धार्मिक स्थल:

  • दिलवाड़ा मंदिर (माउंट आबू से निकट): 11वीं शताब्दी का जैन मंदिर, संगमरमर की नक्काशी के लिए विश्व प्रसिद्ध
  • हरणी महादेव मंदिर: जिले के भीमलत प्रांत में, 8वीं शताब्दी का शैव मंदिर
  • सीता माता का मंदिर: चित्तौड़गढ़ सीमा पर, ऐतिहासिक महत्व
  • महाकाली मंदिर: भीलवाड़ा शहर के केंद्र में

त्यौहार:

  • तीज त्यौहार: श्रावण माह में भीलों की परंपरागत पूजा
  • दिवाली और होली: परंपरागत तरीके से मनाए जाते हैं
  • गणगौर: महिलाओं के द्वारा मनाया जाने वाला प्रमुख त्यौहार
  • भीलों का वार्षिक पर्व: बैसाखी में मनाया जाता है

लोक संस्कृति: भीलवाड़ा के भीले और मीणा समुदाय अपनी विशिष्ट संस्कृति के लिए जाने जाते हैं। यहाँ की घूमर, गैर और भीलों के परंपरागत नृत्य पर्यटकों को आकर्षित करते हैं। हाथी घोड़े की पेटिंग और तेरहताली लोक संगीत की विशिष्ट परंपरा है।


प्रशासनिक विभाजन (Prashasanik Sanrachna)

भीलवाड़ा जिला तहसीलों में विभाजित है:

  1. भीलवाड़ा तहसील (जिला मुख्यालय)
  2. मांडलगढ़ तहसील
  3. गंगापुर तहसील
  4. असींद तहसील
  5. राई तहसील
  6. सिलीसेड़ तहसील (नई तहसील, 2008 में गठित)

जिले में 8 विधानसभा क्षेत्र हैं: भीलवाड़ा, मांडलगढ़, गंगापुर, असींद, राई और अन्य। जिला कलेक्टर प्रशासन का प्रमुख होता है। पुलिस अधीक्षक की देखरेख में कानून और व्यवस्था कायम रहती है।

राजस्थान सरकार के अनुसार (राज.सरकार.पोर्टल), भीलवाड़ा की जनसंख्या 2021 में लगभग 15.6 लाख थी।


RAS प्रीलिम्स स्तरीय MCQ

प्रश्न 1

भीलवाड़ा जिले की स्थापना किस वर्ष हुई?

  • (A) 1972
  • (B) 1974
  • (C) 1976
  • (D) 1980

उत्तर: (B) 1974

व्याख्या: भीलवाड़ा 1 अप्रैल 1974 को अजमेर जिले से अलग करके एक स्वतंत्र जिले के रूप में गठित किया गया। यह RAS परीक्षा में बहुबार पूछा गया है।


प्रश्न 2

भीलवाड़ा को किस नाम से जाना जाता है?

  • (A) राजस्थान की हरियाली
  • (B) राजस्थान के मैनचेस्टर
  • (C) राजस्थान का मरुद्यान
  • (D) राजस्थान की आत्मा

उत्तर: (B) राजस्थान के मैनचेस्टर

व्याख्या: भीलवाड़ा की विशाल वस्त्र उद्योग क्षमता के कारण इसे "राजस्थान के मैनचेस्टर" कहा जाता है। यहाँ 1,500 से अधिक स्पिनिंग और टेक्सटाइल मिलें हैं।


प्रश्न 3

निम्नलिखित में से कौन सी नदी भीलवाड़ा जिले से नहीं गुजरती?

  • (A) बनास नदी
  • (B) कोठारी नदी
  • (C) लूनी नदी
  • (D) माही नदी

उत्तर: (C) लूनी नदी

व्याख्या: लूनी नदी राजस्थान के पश्चिमी भाग में बहती है और जैसलमेर, बाड़मेर जिलों में प्रवाहित होती है। भीलवाड़ा में बनास, कोठारी और माही नदियाँ बहती हैं।


प्रश्न 4

दिलवाड़ा मंदिर समूह निम्नलिखित में से किस धर्म का सबसे पवित्र तीर्थ स्थल है?

  • (A) हिंदू धर्म
  • (B) सिख धर्म
  • (C) जैन धर्म
  • (D) बौद्ध धर्म

उत्तर: (C) जैन धर्म

व्याख्या: दिलवाड़ा मंदिर माउंट आबू पर स्थित है (भीलवाड़ा-सिरोही सीमा निकट) और जैन धर्म का सबसे महत्वपूर्ण तीर्थ स्थल है। इसकी संगमरमर की नक्काशी विश्व की सबसे बेहतरीन मानी जाती है।


प्रश्न 5

भीलवाड़ा में कौन सी दलहन की खेती परंपरागत रूप से की जाती है?

  • (A) चना
  • (B) मोठ (मूंग)
  • (C) अरहर
  • (D) उड़द

उत्तर: (B) मोठ (मूंग)

व्याख्या: भीलवाड

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Reading is not enough — practice questions to remember what you just read.

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