झालावाड़ जिला GK: गागरोन, झालरापाटन, इतिहास | RAS Notes

Raj Study Team··5 min read

झालावाड़ राजस्थान का ऐतिहासिक जिला है — गागरोन का UNESCO जल दुर्ग और झालरापाटन के प्राचीन मंदिर इसे RAS GK के लिए महत्वपूर्ण बनाते हैं। यह अध्ययन सामग्री जिले के इतिहास, भूगोल, अर्थव्यवस्था और प्रमुख स्थलों को कवर करती है।

झालावाड़ जिला: RAS प्रारंभिक परीक्षा के लिए व्यापक अध्ययन प्रोफाइल

परिचय

झालावाड़ राजस्थान का एक ऐतिहासिक एवं सांस्कृतिक रूप से महत्वपूर्ण जिला है, जो कोटा संभाग का भाग है। गागरोन का UNESCO-सूचीबद्ध जल दुर्ग और झालरापाटन के प्राचीन मंदिर इसे RAS GK के लिए एक उच्च-महत्व वाला जिला बनाते हैं। यह अध्ययन सामग्री जिले के इतिहास, भूगोल, अर्थव्यवस्था और प्रमुख स्थलों को कवर करती है।

इतिहास (History)

झालावाड़ का क्षेत्र पहले कोटा रियासत का भाग था। कोटा के दीवान झाला ज़ालिम सिंह ने इस क्षेत्र (तब चाओनी उमेदपुरा) को कोटा की सुरक्षा हेतु एक सैनिक छावनी के रूप में विकसित किया। सन 1838 में अंग्रेज़ों ने इस क्षेत्र को कोटा रियासत से अलग कर एक नई रियासत का रूप दिया और इसका शासन ज़ालिम सिंह के वंशज राजराणा मदन सिंह झाला को सौंपा। झाला शासकों के नाम पर ही इस रियासत और नगर का नाम झालावाड़ पड़ा।

झालावाड़ रियासत स्वतंत्रता तक झाला शासकों के अधीन रही। 1947 में यह भारतीय संघ में विलीन हुई और 1949 में राजस्थान राज्य के गठन के साथ ही झालावाड़ को स्वतंत्र जिले का दर्जा मिला (कोटा संभाग के अंतर्गत) — "1991 में अलग जिला बना" जैसा दावा गलत है।

झालावाड़ के झाला शासकों ने कला, संस्कृति और स्थापत्य के क्षेत्र में उल्लेखनीय योगदान दिया, विशेषकर झालरापाटन नगर और वहां के मंदिरों के निर्माण में।

भूगोल (Geography)

स्थिति और सीमाएं

झालावाड़ जिला राजस्थान के दक्षिण-पूर्वी भाग में स्थित है। इसकी भौगोलिक स्थिति 24°-25° उत्तरी अक्षांश और 75°-76° पूर्वी देशांतर के बीच है। यह जिला मध्य प्रदेश के खनिजों से समृद्ध क्षेत्र के समीप स्थित है।

नदियां और जल प्रणाली

झालावाड़ की नदियां चंबल नदी-तंत्र का भाग हैं, लेकिन चंबल नदी स्वयं झालावाड़ जिले से होकर नहीं बहती। जिले की प्रमुख नदियां हैं: कालीसिंध (सबसे बड़ी, जो आगे चंबल में मिलती है), परवन, आहू, चंद्रभागा और पिपलाज। ये नदियां सिंचाई और कृषि के लिए महत्वपूर्ण जलस्रोत हैं।

दुर्ग और किलेबंदी

झालावाड़ का सबसे प्रसिद्ध और परीक्षोपयोगी दुर्ग गागरोन दुर्ग है, जो नगर के पास कालीसिंध और आहू नदियों के संगम पर स्थित है। यह एक जल दुर्ग है (तीन ओर से नदियों से घिरा) और इसकी नींव लगभग 7वीं-8वीं शताब्दी की मानी जाती है। गागरोन दुर्ग खींची चौहान शासकों से जुड़ा है — यहां अचलदास खींची री वचनिका (1423 के साका/युद्ध का वर्णन) प्रसिद्ध है। दुर्ग परिसर में मीठे साहब की दरगाह भी है। गागरोन दुर्ग को 2013 में "राजस्थान के पहाड़ी दुर्ग" श्रेणी के अंतर्गत UNESCO विश्व धरोहर स्थल घोषित किया गया।

भौतिक विशेषताएं

जिले का भूभाग विंध्य पठार का हिस्सा है। यहां की जलवायु उष्ण और अर्द्ध-शुष्क है। वार्षिक वर्षा लगभग 500-600 मिमी है। यह क्षेत्र खनिज संपदा में समृद्ध है, विशेषकर बेंटोनाइट, चूना पत्थर और मिट्टी के भंडार यहां मिलते हैं।

अर्थव्यवस्था (Economy)

कृषि

झालावाड़ की अर्थव्यवस्था मुख्यतः कृषि आधारित है। जिला अपनी संतरा (नागपुरी किस्म), धनिया, अफीम और सोयाबीन की खेती के लिए राजस्थान में विशेष रूप से प्रसिद्ध है; इसके साथ गेहूं, जौ, दालें, तिलहन और कपास भी उगाए जाते हैं।

खनिज संपदा

झालावाड़ में बड़े धात्विक खनिज भंडार नहीं हैं, परंतु जिले में बेंटोनाइट (मुख्यतः पिड़ावा-पचपहाड़ क्षेत्र), चूना पत्थर, लैटेराइट, जिप्सम और ताम्र (तांबे) के छोटे भंडार मिलते हैं। ध्यान रहे: भारत का सबसे बड़ा बेंटोनाइट उत्पादन क्षेत्र पश्चिमी राजस्थान (बाड़मेर-बीकानेर-जैसलमेर पट्टी) है, झालावाड़ नहीं।

लघु और कुटीर उद्योग

हस्तशिल्प और पारंपरिक कला यहां की आर्थिक गतिविधि का अभिन्न अंग हैं। मिट्टी के बर्तन, दीप और सजावटी वस्तुएं यहां के प्रसिद्ध कुटीर उद्योग हैं।

पर्यटन

यहां की सांस्कृतिक और ऐतिहासिक विरासत पर्यटन के विकास का आधार है। गागरोन दुर्ग, झालरापाटन के मंदिर, कोलवी की गुफाएं और मुकुंदरा हिल्स टाइगर रिज़र्व पर्यटकों को आकर्षित करते हैं।

झालावाड़ फैक्ट-फाइल (RAS GK के लिए)

बिंदुविवरण
संभागकोटा
स्थापना (रियासत)1838 (कोटा से अलग)
स्वतंत्र जिला बना1949
प्रमुख नदियांकालीसिंध, परवन, आहू, चंद्रभागा, पिपलाज
प्रमुख तहसीलेंझालावाड़, झालरापाटन, डग, पिड़ावा, अकलेरा, खानपुर, गंगधार, मनोहरथाना, भवानीमंडी
प्रमुख फसलेंसंतरा (नागपुरी), धनिया, अफीम, सोयाबीन, गेहूं
प्रमुख स्थलगागरोन दुर्ग (UNESCO, 2013), झालरापाटन (सूर्य मंदिर), कोलवी गुफाएं, मुकुंदरा हिल्स टाइगर रिज़र्व
झालावाड़ — ऐतिहासिक समयरेखा
  1. 7वीं-8वीं शताब्दीगागरोन दुर्ग की नींव (खींची चौहान काल)
  2. 1423गागरोन का साका (अचलदास खींची री वचनिका)
  3. 1838कोटा से अलग होकर झालावाड़ रियासत का गठन, राजराणा मदन सिंह झाला
  4. 1947-48भारतीय संघ में विलय
  5. 1949राजस्थान राज्य में स्वतंत्र जिले का दर्जा (कोटा संभाग)
  6. 2013गागरोन दुर्ग को UNESCO विश्व धरोहर स्थल घोषित

प्रसिद्ध स्थल, त्योहार और लोक संस्कृति

प्रमुख स्थल

(ध्यान दें: प्रसिद्ध चांद बावड़ी झालावाड़ में नहीं, बल्कि आभानेरी, दौसा जिले में है — इसे झालावाड़ से जोड़ना एक सामान्य भ्रम है, परीक्षा में सावधान रहें।)

झालावाड़ का सबसे प्रमुख स्थल गागरोन दुर्ग (ऊपर देखें) है। इसके अतिरिक्त:

  • झालरापाटन: इसे "घंटों का शहर" (city of bells) कहा जाता है, यहां स्थित 10वीं शताब्दी का सूर्य मंदिर (पद्मनाभ मंदिर) और चंद्रभागा मंदिर समूह प्रसिद्ध हैं। यहां गढ़ पैलेस और भवानी नाट्यशाला (प्रसिद्ध ऐतिहासिक रंगशाला) भी स्थित हैं।
  • कोलवी की गुफाएं: बौद्ध काल से जुड़ी प्राचीन गुफाएं और स्तूप।
  • मुकुंदरा हिल्स टाइगर रिज़र्व: कोटा-झालावाड़ क्षेत्र में स्थित बाघ अभयारण्य।
  • कालीसिंध थर्मल पावर प्लांट और भीमसागर, गांधीसागर जैसे जलाशय/दर्रे।
  • झालावाड़ राजकीय संग्रहालय।

त्योहार और पर्व

तीज पर्व और दशहरा यहां के प्रमुख त्योहार हैं। गणगौर की परंपरा यहां विशेष रूप से मनाई जाती है, जहां महिलाएं अपनी देवी को पूजती हैं।

लोक संस्कृति

झालावाड़ की लोक संस्कृति ढोलक, नगाड़े और बांसुरी पर आधारित संगीत से समृद्ध है। घूमर नृत्य यहां की पारंपरिक नृत्य परंपरा का महत्वपूर्ण हिस्सा है। पाबूजी की फड़ और आल्हा-खंड की गायन परंपरा यहां जीवंत है।

प्रशासनिक विभाजन

झालावाड़ जिले का प्रशासनिक मुख्यालय झालावाड़ नगर है। जिले की प्रमुख तहसीलों में शामिल हैं: झालावाड़, झालरापाटन, डग, पिड़ावा, अकलेरा, खानपुर, गंगधार, मनोहरथाना और भवानीमंडी ("खिमलसर" नाम की कोई तहसील जिले में नहीं है)।

झालावाड़ जिला कोटा प्रशासनिक संभाग का भाग है।

RAS प्रारंभिक परीक्षा के लिए MCQ

प्रश्न 1 (अभ्यास प्रश्न): झालावाड़ रियासत की स्थापना किसने और कब की थी?

  • (A) राजा बिजय सिंह, 1616
  • (B) राजराणा मदन सिंह झाला, 1838
  • (C) महाराजा कीर्ति सिंह, 1900
  • (D) राजा अनिरुद्ध सिंह, 1750

उत्तर: (B) राजराणा मदन सिंह झाला, 1838 व्याख्या: 1838 में अंग्रेज़ों ने कोटा रियासत से झालावाड़ को अलग कर एक नई रियासत बनाई और इसका शासन झाला ज़ालिम सिंह के वंशज राजराणा मदन सिंह झाला को दिया।


प्रश्न 2 (अभ्यास प्रश्न): झालावाड़ को स्वतंत्र जिले का दर्जा कब मिला?

  • (A) 1949
  • (B) 1970
  • (C) 1991
  • (D) 2000

उत्तर: (A) 1949 व्याख्या: राजस्थान राज्य के गठन (1949) के साथ ही झालावाड़ कोटा संभाग के अंतर्गत एक स्वतंत्र जिला बना। "1991" की तिथि गलत है।


प्रश्न 3 (अभ्यास प्रश्न): झालावाड़ जिले की सबसे बड़ी नदी कौन सी है?

  • (A) बनास नदी
  • (B) चंबल नदी
  • (C) कालीसिंध नदी
  • (D) खान नदी

उत्तर: (C) कालीसिंध नदी व्याख्या: कालीसिंध झालावाड़ की सबसे बड़ी नदी है, जो आगे जाकर चंबल में मिलती है। चंबल नदी स्वयं झालावाड़ जिले से होकर नहीं बहती।


प्रश्न 4 (अभ्यास प्रश्न): झालावाड़ का गागरोन दुर्ग किस विशेषता के लिए प्रसिद्ध है?

  • (A) यह राजस्थान का सबसे ऊंचा पहाड़ी दुर्ग है
  • (B) यह एक जल दुर्ग है और 2013 में UNESCO विश्व धरोहर सूची में शामिल हुआ
  • (C) यह 9-मंजिला बावड़ी है
  • (D) इसका निर्माण मुगलों ने करवाया था

उत्तर: (B) यह एक जल दुर्ग है और 2013 में UNESCO विश्व धरोहर सूची में शामिल हुआ व्याख्या: गागरोन दुर्ग कालीसिंध-आहू नदियों के संगम पर स्थित एक जल दुर्ग है, जिसकी नींव लगभग 7वीं-8वीं शताब्दी की मानी जाती है। इसे 2013 में "राजस्थान के पहाड़ी दुर्गों" श्रेणी में UNESCO विश्व धरोहर स्थल घोषित किया गया। (ध्यान दें: चांद बावड़ी दौसा जिले की आभानेरी में है, झालावाड़ में नहीं।)


प्रश्न 5 (अभ्यास प्रश्न): झालावाड़ अपनी किस फसल की खेती के लिए राजस्थान में विशेष रूप से प्रसिद्ध है?

  • (A) सरसों
  • (B) संतरा (नागपुरी किस्म) और धनिया
  • (C) केसर
  • (D) चाय

उत्तर: (B) संतरा (नागपुरी किस्म) और धनिया व्याख्या: झालावाड़ संतरा (नागपुरी किस्म), धनिया, अफीम और सोयाबीन की खेती के लिए प्रसिद्ध है। जिले में बेंटोनाइट, चूना पत्थर, लैटेराइट आदि के छोटे खनिज भंडार हैं, पर यह भारत का प्रमुख बेंटोनाइट उत्पादन केंद्र नहीं है (वह दर्जा बाड़मेर-बीकानेर-जैसलमेर पट्टी को जाता है)।

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