झालावाड़ जिला — RAS GK प्रोफाइल, इतिहास, भूगोल, जनसांख्यिकी
RAS प्रारंभिक परीक्षा 2021 में पूछा गया था: "झालावाड़ जिले की स्थापना किस शताब्दी में हुई थी?" यह प्रश्न इस जिले के ऐतिहासिक महत्त्व को दर्शाता है। वर्तमान अध्ययन सामग्री उसी संदर्भ को विस्तृत करती है।
झालावाड़ जिला: RAS प्रारंभिक परीक्षा के लिए व्यापक अध्ययन प्रोफाइल
परिचय एवं PYQ संदर्भ
RAS प्रारंभिक परीक्षा 2021 में पूछा गया था: "झालावाड़ जिले की स्थापना किस शताब्दी में हुई थी?" यह प्रश्न इस जिले के ऐतिहासिक महत्त्व को दर्शाता है। वर्तमान अध्ययन सामग्री उसी संदर्भ को विस्तृत करती है।
इतिहास (History)
झालावाड़ का ऐतिहासिक महत्त्व राजस्थान के सांस्कृतिक परिदृश्य में अतुलनीय है। यह जिला मूलतः बूंदी राज्य का अंग था। 18वीं शताब्दी के आरंभ में, बूंदी के राजा बिजय सिंह के पुत्र राजा झाला जी ने इस क्षेत्र को बूंदी से अलग कर एक नए राज्य की स्थापना की। इसी कारण इस क्षेत्र का नाम झालावाड़ पड़ा, जहां "झाला" राजा का नाम और "वाड़" दुर्ग को संदर्भित करता है।
राजा झाला जी ने 1616 ईस्वी में झालावाड़ नगर की स्थापना की और यहां अपनी राजधानी स्थापित की। इसके बाद झालावाड़ राज्य लगभग 300 वर्षों तक स्वतंत्र रूप से शासित रहा। ब्रिटिश शासनकाल में यह राज्य एक रियासत बन गया और 1948 में भारतीय संघ में विलीन हो गया। 1949 में इसे बूंदी जिले में शामिल किया गया, परंतु 1991 में इसे पुनः अलग जिले का दर्जा दिया गया।
झालावाड़ के शासकों ने कला, संस्कृति और स्थापत्य के क्षेत्र में उल्लेखनीय योगदान दिया। यहां की सांस्कृतिक विरासत मुगल और राजपूत संस्कृति का अद्भुत समन्वय प्रस्तुत करती है।
भूगोल (Geography)
स्थिति और सीमाएं
झालावाड़ जिला राजस्थान के दक्षिण-पूर्वी भाग में स्थित है। इसकी भौगोलिक स्थिति 24°-25° उत्तरी अक्षांश और 75°-76° पूर्वी देशांतर के बीच है। यह जिला मध्य प्रदेश के खनिजों से समृद्ध क्षेत्र के समीप स्थित है।
नदियां और जल प्रणाली
चंबल नदी झालावाड़ की प्रमुख नदी है, जो उत्तर-पश्चिम से दक्षिण-पूर्व की ओर बहती है। यह नदी जिले की पूर्वी सीमा बनाती है और मध्य प्रदेश के साथ सीमांकन करती है। चंबल की घाटी इस क्षेत्र की सबसे महत्वपूर्ण भौगोलिक विशेषता है।
आलनिया नदी और परवन नदी अन्य महत्वपूर्ण जलस्रोत हैं जो कृषि कार्यों में सहायक हैं। चंबल नदी के तटों पर बालाघाट का दुर्ग स्थित है, जो ऐतिहासिक महत्व का प्रतीक है।
दुर्ग और किलेबंदी
झालावाड़ का दुर्ग या झालावाड़ किला नगर के केंद्र में स्थित है। इस दुर्ग का निर्माण राजा झाला जी ने करवाया था। यह दुर्ग 7वीं-8वीं शताब्दी के आसपास के एक पुराने दुर्ग के आधार पर बनाया गया था। इसके परिसर में राजमहल, देवालय और विभिन्न शाही भवन हैं।
बालाघाट का दुर्ग चंबल नदी के किनारे पर स्थित एक प्रमुख किलेबंदी है। यह दुर्ग अपनी सुरक्षात्मक संरचना और स्थापत्य कौशल के लिए प्रसिद्ध है।
भौतिक विशेषताएं
जिले का भूभाग विंध्य पठार का हिस्सा है। यहां की जलवायु उष्ण और अर्द्ध-शुष्क है। वार्षिक वर्षा लगभग 500-600 मिमी है। यह क्षेत्र खनिज संपदा में समृद्ध है, विशेषकर बेंटोनाइट, चूना पत्थर और मिट्टी के भंडार यहां मिलते हैं।
अर्थव्यवस्था (Economy)
कृषि
झालावाड़ की अर्थव्यवस्था मुख्यतः कृषि आधारित है। यहां की प्रमुख फसलें गेहूं, जौ, दालें और तिलहन हैं। खरीफ सीजन में मक्का और कपास की खेती की जाती है। चंबल नदी की घाटी में सिंचित कृषि विकसित हुई है।
खनिज संपदा
राजस्थान सरकार के खान विभाग के आंकड़ों के अनुसार, झालावाड़ में बेंटोनाइट का एक प्रमुख भंडार स्थित है। यह क्षेत्र भारत का बेंटोनाइट उत्पादन केंद्र माना जाता है। इसके अतिरिक्त चूना पत्थर, बालू और रीता मिट्टी का भी उत्खनन किया जाता है।
लघु और कुटीर उद्योग
हस्तशिल्प और पारंपरिक कला यहां की आर्थिक गतिविधि का अभिन्न अंग हैं। मिट्टी के बर्तन, दीप और सजावटी वस्तुएं यहां के प्रसिद्ध कुटीर उद्योग हैं।
पर्यटन
यहां की सांस्कृतिक और ऐतिहासिक विरासत पर्यटन के विकास का आधार है। विभिन्न मंदिर, किले और प्राकृतिक सौंदर्य पर्यटकों को आकर्षित करते हैं।
प्रसिद्ध स्थल, त्योहार और लोक संस्कृति
मंदिर और धार्मिक स्थल
चांद बावड़ी झालावाड़ के सबसे प्रसिद्ध स्मारकों में से एक है। यह एक 9-मंजिला बावड़ी है जिसका निर्माण 12वीं शताब्दी में किया गया था। इसकी सीढ़ियों की संरचना अद्वितीय है।
पद्मावती माता मंदिर यहां का प्रमुख धार्मिक केंद्र है। सूर्य मंदिर और शिव मंदिर भी महत्वपूर्ण धार्मिक स्थल हैं।
त्योहार और पर्व
तीज पर्व और दशहरा यहां के प्रमुख त्योहार हैं। गणगौर की परंपरा यहां विशेष रूप से मनाई जाती है, जहां महिलाएं अपनी देवी को पूजती हैं।
लोक संस्कृति
झालावाड़ की लोक संस्कृति ढोलक, नगाड़े और बांसुरी पर आधारित संगीत से समृद्ध है। घूमर नृत्य यहां की पारंपरिक नृत्य परंपरा का महत्वपूर्ण हिस्सा है। पाबूजी की फड़ और आल्हा-खंड की गायन परंपरा यहां जीवंत है।
प्रशासनिक विभाजन
झालावाड़ जिले का प्रशासनिक मुख्यालय झालावाड़ नगर है। वर्तमान में इस जिले का विभाजन निम्नलिखित तहसीलों में है:
- झालावाड़ तहसील (मुख्य नगर)
- भवानीमंडी तहसील
- खिमलसर तहसील
- मनोहरथाना तहसील
राजस्थान सरकार के प्रशासनिक अभिलेख (https://pib.gov.in) के अनुसार, झालावाड़ जिला कोटा प्रशासनिक मंडल का भाग है।
RAS प्रारंभिक परीक्षा के लिए MCQ
प्रश्न 1: झालावाड़ राज्य की स्थापना किसने की थी?
- (A) राजा बिजय सिंह
- (B) राजा झाला जी
- (C) महाराजा कीर्ति सिंह
- (D) राजा अनिरुद्ध सिंह
उत्तर: (B) राजा झाला जी व्याख्या: राजा झाला जी बूंदी के राजा बिजय सिंह के पुत्र थे। उन्होंने 1616 ईस्वी में बूंदी से अलग होकर झालावाड़ राज्य की स्थापना की।
प्रश्न 2: झालावाड़ जिले को कब अलग जिले का दर्जा दिया गया?
- (A) 1949
- (B) 1970
- (C) 1991
- (D) 2000
उत्तर: (C) 1991 व्याख्या: 1949 में झालावाड़ को बूंदी जिले में विलीन किया गया था। 1991 में इसे पुनः अलग जिले का दर्जा प्रदान किया गया।
प्रश्न 3: झालावाड़ की प्रमुख नदी कौन सी है?
- (A) बनास नदी
- (B) चंबल नदी
- (C) कालीसिंध नदी
- (D) खान नदी
उत्तर: (B) चंबल नदी व्याख्या: चंबल नदी झालावाड़ जिले की सबसे महत्वपूर्ण नदी है जो पूर्वी सीमा बनाती है और मध्य प्रदेश के साथ सीमांकन करती है।
प्रश्न 4: चांद बावड़ी कितनी मंजिलों वाली बावड़ी है?
- (A) 5-मंजिला
- (B) 7-मंजिला
- (C) 9-मंजिला
- (D) 11-मंजिला
उत्तर: (C) 9-मंजिला व्याख्या: चांद बावड़ी झालावाड़ की प्रसिद्ध 9-मंजिली बावड़ी है जिसका निर्माण 12वीं शताब्दी में किया गया था।
प्रश्न 5: झालावाड़ जिले का प्रमुख खनिज संपदा क्या है?
- (A) लौह अयस्क
- (B) बेंटोनाइट
- (C) जस्ता
- (D) तांबा
उत्तर: (B) बेंटोनाइट व्याख्या: झालावाड़ भारत का प्रमुख बेंटोनाइट उ
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