बाड़मेर जिला — RAS GK प्रोफाइल, इतिहास, भूगोल, जनसांख्यिकी
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बाड़मेर जिला: राजस्थान लोक सेवा आयोग हेतु सम्पूर्ण अध्ययन सामग्री
PYQ संदर्भ
राजस्थान लोक सेवा आयोग (RAS) 2018 की प्रारंभिक परीक्षा में पूछा गया था: "बाड़मेर जिले का ऐतिहासिक नाम क्या था?" इसका सही उत्तर बालोतरा और मल्लिनाथ के क्षेत्र को लेकर था।
इतिहास (Itihas)
बाड़मेर जिला राजस्थान के दक्षिण-पश्चिमी भाग में स्थित है और इसका इतिहास मारवाड़ की सांस्कृतिक विरासत से गहराई से जुड़ा है। प्राचीन काल में यह क्षेत्र "मरु" या "मारु" देश कहलाता था, जो ऋग्वेद में उल्लेखित है। राजस्थान सरकार की आधिकारिक वेबसाइट (www.rajasthan.gov.in) के अनुसार बाड़मेर का वर्तमान नाम 12वीं-13वीं शताब्दी में बार (बाहरी किले) के कारण पड़ा था।
मध्यकाल में बाड़मेर मारवाड़ राज्य का महत्वपूर्ण भाग रहा। राठौड़ शासकों ने इस क्षेत्र पर दीर्घकाल तक शासन किया। मल्लिनाथ जी के मंदिर के आसपास का क्षेत्र धार्मिक और व्यापारिक केंद्र के रूप में विकसित हुआ। बालोतरा कस्बा व्यापार के लिए प्रसिद्ध रहा और रेशम के मार्गों पर एक महत्वपूर्ण पड़ाव था।
मुगल काल में बाड़मेर क्षेत्र पर विभिन्न शक्तियों का नियंत्रण रहा, परंतु राठौड़ राजपूत सत्ता यहां लगभग अक्षुण्ण रही। ब्रिटिश शासन काल में यह मारवाड़ जिले के अंतर्गत था। स्वतंत्रता के उपरांत 1949 में बाड़मेर को मारवाड़ राज्य से अलग करके एक स्वतंत्र जिला बनाया गया।
भूगोल (Bhugol): नदियाँ, किले, दर्रे
नदियाँ एवं जल संसाधन
बाड़मेर की प्रमुख नदियाँ निम्नलिखित हैं:
लूनी नदी (Luni River): यह जिले की सबसे महत्वपूर्ण नदी है, जो उत्तर से दक्षिण दिशा में प्रवाहित होती है। यह कृषि सिंचाई के लिए जीवनदायिनी है।
बाणगंगा नदी (Banganga River): यह सहायक नदी पूर्वी भाग से बहती है और मौसमी प्रकृति की है।
सागी नदी (Sagi River): पश्चिमी भाग में यह नदी मौसमी प्रवाह रखती है।
घग्घर नदी: इसका आंशिक प्रवाह बाड़मेर के उत्तरी सीमांत क्षेत्रों से होता है।
ऐतिहासिक किले एवं संरचनाएं
किराडू के मंदिर: यह 11वीं शताब्दी के सोमेश्वर (सोमनाथ) मंदिर समूह हैं, जो मारवाड़ की स्थापत्य कला के उत्कृष्ट उदाहरण हैं। इन्हें "राजस्थान के खजुराहो" कहा जाता है।
तनोट किला: जैसलमेर के सीमांत पर स्थित तनोट माता का मंदिर किला इतिहास में महत्वपूर्ण है, जहाँ 1971 के भारत-पाकिस्तान युद्ध में बमों से सुरक्षा का कथा प्रसिद्ध है।
बालोतरा: यह कस्बा व्यापारिक महत्व के लिए जाना जाता है और यहाँ राठौड़ राजपूतों के महल आज भी दृश्यमान हैं।
भौगोलिक विशेषताएं
बाड़मेर थार रेगिस्तान के मध्य स्थित है। जिले का क्षेत्रफल लगभग 6,278 वर्ग किलोमीटर है। यह पाकिस्तान की सीमा से सटा हुआ है, जो राष्ट्रीय सुरक्षा की दृष्टि से महत्वपूर्ण है। बालुकामय मिट्टी और कम वर्षा इस क्षेत्र की विशेषता है।
अर्थव्यवस्था (Arthavyavastha)
कृषि
बाड़मेर की अर्थव्यवस्था मुख्यतः कृषि पर आधारित है। लूनी नदी की घाटी में सिंचित कृषि होती है।
मुख्य फसलें:
- बाजरा (रेगिस्तानी क्षेत्रों में)
- गेहूँ और जौ (सिंचित क्षेत्रों में)
- मूंगफली
- सरसों
- दाल (मूंग, उड़द)
- तिल
राजस्थान सरकार की कृषि विभाग की वेबसाइट (https://agriculture.rajasthan.gov.in/) के अनुसार बाड़मेर को जल संरक्षण और ड्रिप सिंचाई के लिए प्रोत्साहित किया जा रहा है।
पशुपालन
बाड़मेर पश्चिमी राजस्थान में पशुपालन का प्रमुख केंद्र है। ऊँट, गाय, भेड़ और बकरियों का पालन व्यापक पैमाने पर होता है। मालानी घोड़े (Malani Horse) इसी क्षेत्र की प्रसिद्ध नस्ल हैं।
खनिज एवं उद्योग
- फेल्सपार की खदानें
- बेराइटस (Barytes)
- सीसा-जस्ता (Lead-Zinc)
हल्के उद्योग जैसे कि वस्त्र उत्पादन, खाद्य प्रसंस्करण विकसित हो रहे हैं।
हस्तशिल्प
बाड़मेर के टेराकोटा (मिट्टी के बर्तन) और दरियों की कला विश्व प्रसिद्ध है। थेवा कला (सोने की परत चढ़ी कांच की कला) इसी क्षेत्र की अनूठी परंपरा है। ये हस्तशिल्प ग्रामीण अर्थव्यवस्था को सशक्त बनाते हैं।
प्रसिद्ध स्थल, त्योहार एवं लोक संस्कृति (Prasiddh Sthal)
मंदिर एवं धार्मिक स्थल
मल्लिनाथ मेला: मल्लिनाथ जी (23वें तीर्थंकर) का मंदिर तिलवाड़ा गाँव में स्थित है। यहाँ चैत्र माह में वार्षिक मेला लगता है, जो उत्तर भारत का सबसे बड़ा पशु मेला है। इसमें लाखों पशु और श्रद्धालु आते हैं।
किराडू के मंदिर: 11वीं शताब्दी की सोमेश्वर मंदिर प्रणाली को यूनेस्को की विश्व विरासत सूची में शामिल करने के लिए विचार किया जा रहा है।
माता मंदिर, बालोतरा: प्राचीन देवी मंदिर जो राठौड़ वंश की कुलदेवी मानी जाती है।
त्योहार एवं सांस्कृतिक परंपराएं
होली: रंगों का पर्व यहाँ विशेष तरीके से मनाया जाता है। गायों को रंगों से सजाया जाता है।
दशहरा: रावण दहन और गरबा नृत्य की परंपरा है।
दिवाली: दीपों का पर्व पूरे जिले में हर्ष के साथ मनाया जाता है।
तीज एवं गणगौर: महिलाओं के पारंपरिक त्योहार, जिनमें झूले झूलने और गीत गाने की परंपरा है।
लोक संस्कृति
घूमर नृत्य: महिलाओं का प्रसिद्ध सामूहिक नृत्य, जो रंगीन घाघरों में किया जाता है।
तारों का खेल: पुरुषों की तलवार-संचालन की परंपरागत कला।
लूम्बा नृत्य: ऊँट चलाने वालों का नृत्य।
मारवाड़ी भाषा और संगीत: लोक गीत और भाषा की अनूठी परंपरा इस क्षेत्र की विरासत है।
प्रशासनिक विभाजन (Prashasanik)
बाड़मेर जिले का मुख्यालय बाड़मेर शहर है। वर्तमान प्रशासनिक संरचना:
तहसीलें (Tehsils)
- बाड़मेर तहसील - जिले का मुख्य प्रशासनिक केंद्र
- बालोतरा तहसील - व्यापारिक महत्व का केंद्र
- तिलवाड़ा तहसील - मल्लिनाथ मेला के लिए प्रसिद्ध
- शिव तहसील - पश्चिमी सीमांत क्षेत्र
विधानसभा क्षेत्र
बाड़मेर से तीन विधानसभा सदस्य चुने जाते हैं:
- बाड़मेर विधानसभा क्षेत्र
- बालोतरा विधानसभा क्षेत्र
- शिव विधानसभा क्षेत्र
जनसांख्यिकी
2011 की जनगणना के अनुसार बाड़मेर की कुल जनसंख्या लगभग 16 लाख है। साक्षरता दर राजस्थान के अन्य जिलों की तुलना में कम है (लगभग 55%)। कृषि पर निर्भरता के कारण ग्रामीण जनसंख्या 85% से अधिक है।
RAS प्रारंभिक परीक्षा के लिए महत्वपूर्ण MCQs
प्रश्न 1
बाड़मेर जिले का सबसे बड़ा पशु मेला कहाँ आयोजित होता है?
A) बालोतरा में
B) मल्लिनाथ (तिलवाड़ा) में
C) शिव में
D) किराडू में
सही उत्तर: B) मल्लिनाथ (तिलवाड़ा) में
व्याख्या: मल्लिनाथ मेला चैत्र माह में तिलवाड़ा गाँव में आयोजित होता है, जो उत्तर भारत का सबसे विशाल पशु मेला है। इसमें बड़ी संख्या में ऊँट, घोड़े, बकरियाँ एवं अन्य पशु क्रय-विक्रय के लिए आते हैं। RAS 2015 में इसी विषय पर प्रश्न आया था।
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