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भरतपुर जिला — RAS GK प्रोफाइल, इतिहास, भूगोल, जनसांख्यिकी

Raj Study Team··4 min read

भरतपुर का इतिहास जाटों के वीरतापूर्ण संघर्ष और राजनीतिक प्रभुत्व से अभिन्न रूप से जुड़ा है। यह जिला 16वीं शताब्दी में अपनी आधुनिक पहचान से पहले मालवा और मथुरा के बीच एक सीमांत क्षेत्र था।

भरतपुर जिला: RAS प्रारंभिक परीक्षा अध्ययन प्रोफाइल

PYQ संदर्भ

RAS प्रारंभिक परीक्षा 2016 में पूछा गया था: "भरतपुर जिले की स्थापना किस वर्ष हुई?" इस प्रश्न का सही उत्तर 1775 था, जब महाराजा सूरजमल के वंशज महाराजा केहरी सिंह ने लोहागढ़ दुर्ग को अपनी राजधानी बनाया।

इतिहास (इतिहास)

भरतपुर का इतिहास जाटों के वीरतापूर्ण संघर्ष और राजनीतिक प्रभुत्व से अभिन्न रूप से जुड़ा है। यह जिला 16वीं शताब्दी में अपनी आधुनिक पहचान से पहले मालवा और मथुरा के बीच एक सीमांत क्षेत्र था।

महाराजा सूरजमल (1707-1763) को भरतपुर राज्य का वास्तविक संस्थापक माना जाता है। उन्होंने दिल्ली सल्तनत के विरुद्ध जाट शक्ति को संगठित किया और 1733 में आगरा पर कब्जा करने के लिए प्रसिद्ध हैं। उनकी रणनीतिक दूरदर्शिता और किलाबंदी कौशल ने लोहागढ़ दुर्ग को "भारत का पाइका" (East का वेनिस) बना दिया।

मुगल साम्राज्य के पतन के साथ, सूरजमल ने भरतपुर को एक स्वतंत्र राज्य के रूप में घोषित किया। उनके उत्तराधिकारियों ने ब्रिटिश साम्राज्य के विरुद्ध लंबा संघर्ष किया। 1805 में लॉर्ड लेक के नेतृत्व में ब्रिटिश सेना ने लोहागढ़ दुर्ग को घेरा, जो ब्रिटिश सैन्य इतिहास में सबसे कठिन घेराबंदी मानी जाती है। महाराजा रणजीत सिंह की नेतृत्व में भरतपुर की रक्षा 18 महीने तक चली।

1818 में भरतपुर एक ब्रिटिश संरक्षक राज्य बन गया, किंतु इसे शिक्षा, कला और वास्तुकला के लिए एक सांस्कृतिक केंद्र के रूप में मान्यता मिली। भारतीय स्वतंत्रता के बाद, भरतपुर को राजस्थान में 1949 में मिलाया गया।

भूगोल (भूगोल)

भरतपुर राजस्थान के पूर्वी भाग में 26.7°N से 28.0°N अक्षांश और 77.4°E से 78.6°E देशांतर में स्थित है। यह उत्तर प्रदेश और हरियाणा से सीमाबद्ध है, जो इसे राज्य का प्रवेश द्वार बनाता है।

नदियाँ और जल प्रणाली: यमुना नदी भरतपुर की प्रमुख जलप्रवाह है, जो जिले के पूर्वी और उत्तरी भाग से बहती है। बाणगंगा (पुरानी नदी) और गम्भीर नदी भी महत्वपूर्ण जल स्रोत हैं। ये नदियाँ कृषि सिंचाई में महत्वपूर्ण भूमिका निभाती हैं और बाढ़ नियंत्रण के लिए महत्वपूर्ण हैं।

किले और दुर्ग: लोहागढ़ दुर्ग (गढ़ की ढाणी) भरतपुर का सबसे प्रसिद्ध किला है। इसे "अजेय किला" कहा जाता है क्योंकि मुगलों और अंग्रेजों दोनों को इसे जीतने में भारी कठिनाई हुई। किले की मिट्टी की दीवारें और जलभित्तियाँ वास्तुकला की उत्कृष्ट कृति हैं। डीग का महल, जो एक पूर्व शाही निवास है, अब विश्व धरोहर सूची में शामिल है।

भूभाग: भरतपुर का इलाका अधिकांशतः समतल है, जो कृषि के लिए अनुकूल है। यमुना के दक्षिण में भूमि अपेक्षाकृत ऊँची है। घाना पक्षी अभयारण्य (खीजरथल पक्षी अभयारण्य) राष्ट्रीय महत्व का संरक्षित क्षेत्र है, जो सर्दियों में प्रवासी पक्षियों का आश्रय स्थल है।

अर्थव्यवस्था (अर्थव्यवस्था)

भरतपुर की अर्थव्यवस्था प्राथमिक रूप से कृषि पर निर्भर है। यह राजस्थान का सबसे उपजाऊ जिला है, जहाँ गेहूँ, चावल, गन्ना और सोयाबीन की व्यावसायिक खेती होती है।

कृषि: यमुना नदी की सिंचाई व्यवस्था से जिले में 65% से अधिक भूमि कृषि योग्य है। हरित क्रांति के परिणामस्वरूप, भरतपुर अनाज उत्पादन में राजस्थान में शीर्ष पाँच जिलों में रहा है। दुग्ध उत्पादन भी महत्वपूर्ण आर्थिक गतिविधि है।

पर्यटन: लोहागढ़ दुर्ग, डीग महल और भरतपुर पक्षी अभयारण्य (दिल्ली से मात्र 55 किमी) पर्यटन राजस्व का प्रमुख स्रोत हैं। विश्व बैंक ने इसे "भारत के पूर्व के सबसे महत्वपूर्ण पक्षी अभयारण्य" के रूप में मान्यता दी है।

लघु उद्योग: जिले में धातु कार्य, मिट्टी के बर्तन, वस्त्र और चीनी मिलें मुख्य उद्योग हैं। भरतपुर शहर ब्राह्मणों की कढ़ाई के लिए प्रसिद्ध है।

प्रसिद्ध स्थल (प्रसिद्ध स्थल और संस्कृति)

पक्षी अभयारण्य: भरतपुर पक्षी अभयारण्य (घना पक्षी अभयारण्य) यूनेस्को विश्व धरोहर स्थल है। यह 29 वर्ग किमी में विस्तृत है और 450 से अधिक पक्षी प्रजातियों का आश्रय है। नवंबर से मार्च तक साइबेरिया से आने वाले प्रवासी पक्षी इसे रंगीन बना देते हैं।

मंदिर और धार्मिक स्थल: लक्ष्मी नारायण मंदिर, बांके बिहारी मंदिर और राधा-कृष्ण मंदिर भरतपुर के महत्वपूर्ण धार्मिक केंद्र हैं। ये मंदिर 18वीं-19वीं शताब्दी की वास्तुकला को दर्शाते हैं।

पर्व और त्योहार: होली (खासकर लट्ठमार होली), दिवाली और कृष्ण जन्माष्टमी यहाँ विशेष उत्साह के साथ मनाई जाती हैं। तीज और गणगौर भी स्थानीय महिलाओं के लिए प्रमुख त्योहार हैं।

लोक संस्कृति: भरतपुर का लोक नृत्य "घूमर" और "गीदड़" प्रसिद्ध हैं। स्थानीय गीत "ढोलक" और "मंजीरे" की ताल पर गाए जाते हैं। जाट संस्कृति यहाँ की प्रमुख पहचान है।

प्रशासनिक विभाजन (प्रशासनिक संरचना)

भरतपुर जिला राजस्थान का एक महत्वपूर्ण प्रशासनिक इकाई है। इसका मुख्यालय भरतपुर शहर में है।

तहसीलें: भरतपुर जिले में 6 तहसीलें हैं:

  1. भरतपुर (मुख्य)
  2. डीग
  3. कुम्हार
  4. नदबई
  5. बयाना
  6. वैर

लोकसभा मतदान क्षेत्र: भरतपुर दो लोकसभा क्षेत्रों (भरतपुर और डीग-बयाना) में विभाजित है।

विधानसभा सीटें: जिले में 7 विधानसभा निर्वाचन क्षेत्र हैं, जो भरतपुर, डीग, कुम्हार, नदबई, आदि को कवर करते हैं।

जनसंख्या और क्षेत्रफल: 2011 की जनगणना के अनुसार, भरतपुर की जनसंख्या लगभग 24.89 लाख है, और क्षेत्रफल 5,066 वर्ग किमी है।


RAS शैली MCQ प्रश्न

प्रश्न 1: भरतपुर राज्य के संस्थापक महाराजा सूरजमल किस वर्ष में 1733 में आगरा पर कब्जा करने के लिए प्रसिद्ध हैं?

  • (A) 1720
  • (B) 1733
  • (C) 1750
  • (D) 1805

उत्तर: (B) 1733 व्याख्या: महाराजा सूरजमल जाट शक्ति के प्रमुख नायक थे। उन्होंने 1733 में आगरा पर कब्जा किया, जिससे जाट राजनीतिक शक्ति की पुष्टि हुई। यह घटना भरतपुर के इतिहास में एक महत्वपूर्ण मोड़ थी।

प्रश्न 2: भरतपुर पक्षी अभयारण्य किस नाम से भी जाना जाता है?

  • (A) केवलादेव पक्षी अभयारण्य
  • (B) घना पक्षी अभयारण्य
  • (C) खीजरथल पक्षी अभयारण्य
  • (D) इनमें से कोई नहीं

उत्तर: (B) घना पक्षी अभयारण्य व्याख्या: भरतपुर पक्षी अभयारण्य को औपचारिक रूप से घना पक्षी अभयारण्य के नाम से जाना जाता है। यह यूनेस्को विश्व धरोहर स्थल है और 450+ पक्षी प्रजातियों का आश्रय है।

प्रश्न 3: 1805 में लोहागढ़ दुर्ग की घेराबंदी किस ब्रिटिश जनरल के नेतृत्व में की गई थी?

  • (A) लॉर्ड कर्नवालिस
  • (B) लॉर्ड लेक
  • (C) हेनरी लॉरेंस
  • (D) कॉलिन कैम्पबेल

उत्तर: (B) लॉर्ड लेक व्याख्या: लॉर्ड लेक (जनरल जेरार्ड लेक) ने 1805

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