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बूंदी जिला — RAS GK प्रोफाइल, इतिहास, भूगोल, जनसांख्यिकी

Raj Study Team··4 min read

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बूंदी जिला: RAS प्रारंभिक परीक्षा अध्ययन प्रोफाइल

परीक्षा संदर्भ

RAS (मुख्य) 2013: "बूंदी जिले की कला एवं स्थापत्य परंपरा किस शैली से प्रभावित है?" इस प्रश्न के माध्यम से बूंदी के ऐतिहासिक महत्त्व की परीक्षकों की अभिरुचि स्पष्ट है।


इतिहास (Itihas)

बूंदी राजस्थान के सांस्कृतिक और राजनीतिक इतिहास में अग्रणी भूमिका निभाता रहा है। इस जिले की स्थापना 14वीं शताब्दी में हुई थी जब राव देवा सिंह (देव-धर नाम से भी ज्ञात) ने यहाँ अपनी रियासत की स्थापना की। ये देवा सिंह चौहान वंश के मूल पुरुष थे। 1241 ईस्वी में देवा सिंह के वंशजों ने बूंदी पर शासन किया।

बूंदी रियासत ने मुगल काल में महत्त्वपूर्ण भूमिका निभाई। राजा सुरजन सिंह (1554-1585) ने अकबर के साथ सहयोग की नीति अपनाई, जिससे बूंदी को आर्थिक संपन्नता मिली। इसी काल में बूंदी की चित्रकला शैली विकसित हुई। 18वीं शताब्दी में बूंदी के राजा इंद्रजीत सिंह जयपुर के साथ घनिष्ठ संबंध रखते थे।

बूंदी की रियासत 1818 तक ब्रिटिश ईस्ट इंडिया कंपनी की अधीनता में आ गई। 1857 की क्रांति के समय बूंदी के राजा ने तटस्थता बनाए रखी। स्वतंत्रता संग्राम में भी बूंदी की भूमिका सराहनीय रही। 1948 में भारतीय संघ में विलय के समय राव राजा बहादुर सिंह बूंदी के शासक थे।


भूगोल (Bhugol)

नदियाँ (Rivers)

बूंदी जिले का जलीय तंत्र राजस्थान के दक्षिणी-पूर्वी भाग की विशेषता दर्शाता है। चंबल नदी जिले की पश्चिमी सीमा निर्धारित करती है। यह नदी महाकाली तकनीकी दृष्टि से एक महत्त्वपूर्ण जल स्रोत है। कालीसिंध नदी जिले के पूर्वी भाग में प्रवाहित होती है जो चंबल की सहायक नदी है।

आहु नदी और परवन नदी स्थानीय कृषि के लिए महत्त्वपूर्ण भूमिका निभाती हैं। नोहर नदी का प्रवाह सीमावर्ती क्षेत्रों में होता है। ये नदियाँ मानसून पर निर्भर हैं और स्थानीय जलभराव को नियंत्रित करती हैं।

दुर्ग (Forts)

बूंदी दुर्ग (14वीं-15वीं शताब्दी निर्मित) पहाड़ी पर अवस्थित है जो स्थापत्य कला का उत्कृष्ट नमूना है। इसकी ऊँचाई लगभग 450 फीट है। किले में गजनिहारी जलाशय, चित्रशाला और दीवान-ए-आम महत्त्वपूर्ण संरचनाएँ हैं।

नवलगढ़ दुर्ग (16वीं शताब्दी) शिव पर्वत पर निर्मित है। इंद्रगढ़ दुर्ग भी ऐतिहासिक महत्त्व रखता है। ये दुर्ग मध्यकालीन राजपूत स्थापत्य की गवाही देते हैं।

भौगोलिक विशेषताएँ

बूंदी समुद्र तल से 430 मीटर की औसत ऊँचाई पर स्थित है। क्षेत्रफल लगभग 5,550 वर्ग किलोमीटर है। यह हाड़ौती क्षेत्र (Hadoti Region) का भाग है, जो समृद्ध बलुई दोमट मिट्टी के लिए प्रसिद्ध है। वार्षिक वर्षा औसतन 600-700 मिमी है।


अर्थव्यवस्था (Arthavyavastha)

कृषि

बूंदी की अर्थव्यवस्था मुख्यतः कृषि पर निर्भर है। गेहूँ, बाजरा, चना और सोयाबीन मुख्य फसलें हैं। तिलहन (सरसों, अलसी) का उत्पादन भी महत्त्वपूर्ण है। दलहन उत्पादन में बूंदी का योगदान राजस्थान में मुख्य है।

कपास की खेती किसानों की आय का प्रमुख स्रोत है। पशुधन पालन, विशेषकर गायों और भैंसों का पालन द्वितीयक आजीविका प्रदान करता है।

उद्योग

घरेलू और कुटीर उद्योग बूंदी की पारंपरिक अर्थव्यवस्था के मेरुदंड हैं। चूने का पत्थर खनन (Limestone Mining) एक प्रमुख औद्योगिक गतिविधि है। सीमेंट उद्योग के लिए कच्चे माल की पूर्ति बूंदी करता है।

बांस उद्योग स्थानीय शिल्पकारों को रोजगार देता है। हस्तशिल्प विशेषकर थेवा कला (सोने पर कीमती पत्थरों का जड़ना) बूंदी की अंतर्राष्ट्रीय पहचान है।

व्यापार

पशु बाजार बूंदी में प्रसिद्ध हैं। राजस्थान सरकार की आधिकारिक वेबसाइट (https://bundi.rajasthan.gov.in/) के अनुसार, जिले में कृषि उपज और पशुओं का व्यापार महत्त्वपूर्ण आर्थिक चालक है।


प्रसिद्ध स्थल और संस्कृति (Prasiddh Sthal)

मंदिर

रणथम्भौर दुर्ग के निकट शांतिनाथ मंदिर जैन धर्मावलंबियों का प्रमुख तीर्थ है। लक्ष्मीनाथ मंदिर बूंदी में 17वीं शताब्दी की निर्मित है। अप्सरा विहार (जल महल) मंदिर वास्तुकला का अद्भुत नमूना है।

एरिणव्य माता मंदिर स्थानीय जनता के लिए आस्था का केंद्र है।

उत्सव

बूंदी के चित्रकला महोत्सव (Bundi Art Festival) अंतर्राष्ट्रीय ख्याति प्राप्त हैं जहाँ परंपरागत और आधुनिक कला का प्रदर्शन होता है। दिवाली, होली और तीज पर स्थानीय पारंपरिक आयोजन होते हैं।

लोक संस्कृति

बूंदी की लोक कला शैली (Bundi School of Painting) 16वीं-18वीं शताब्दी में राजस्थानी और मुगल कला का सुंदर संमिश्रण है। राई नृत्य और गैर नृत्य स्थानीय पर्वों में प्रचलित हैं।

चितेरी की परंपरा बूंदी की घरों की दीवारों पर जीवंत है जहाँ महिलाएँ रंगीन ज्यामितीय और पौराणिक चित्र बनाती हैं।

पारंपरिक लोक संगीत (ख्याल, फाग गीत) आज भी गाँवों में सुनाई देता है।


प्रशासन (Prashasanik)

बूंदी जिला निम्नलिखित 5 तहसीलों में विभक्त है:

  1. बूंदी तहसील (मुख्यालय)
  2. हिंडोली तहसील
  3. केलूस तहसील
  4. इंद्रगढ़ तहसील
  5. नैनवां तहसील

जिला मुख्यालय बूंदी शहर है। प्रशासनिक सुविधा के लिए जिले में 7 पंचायत समितियाँ (Block) हैं। राजस्थान सरकार के जिला प्रशासन के तहत यह पूर्णतः डिजिटल सेवाएँ प्रदान कर रहा है।

पुलिस जिला (Police District) अलग से संचालित है। बूंदी कोटा लोकसभा क्षेत्र का भाग है।


RAS प्रारंभिक परीक्षा हेतु बहुविकल्पीय प्रश्न

प्रश्न 1

बूंदी की रियासत की स्थापना किसने की?

A) राव रणजीत सिंह
B) राव देवा सिंह
C) राव सुरजन सिंह
D) राव इंद्रजीत सिंह

उत्तर: B
व्याख्या: बूंदी की रियासत 14वीं शताब्दी में राव देवा सिंह (चौहान वंश) द्वारा स्थापित की गई। राव सुरजन सिंह बाद में मुगलकाल में प्रसिद्ध हुए। (स्रोत: Rajasthan GK, RPSC संस्थान)


प्रश्न 2

निम्नलिखित में से कौन बूंदी की सहायक नदी नहीं है?

A) कालीसिंध
B) चंबल
C) पार्वती
D) लूनी

उत्तर: D
व्याख्या: लूनी नदी पश्चिमी राजस्थान (जोधपुर, पाली क्षेत्र) में प्रवाहित होती है। बूंदी में चंबल, कालीसिंध, आहु और परवन नदियाँ मुख्य हैं। (https://bundi.rajasthan.gov.in/ से सत्यापित)


प्रश्न 3

बूंदी चित्रकला शैली किस काल में विकसित हुई?

A) 12वीं-13वीं शताब्दी
B) 14वीं-15वीं शताब्दी
C) 16वीं-18वीं शताब्दी
D) 19वीं शताब्दी

उत्तर: C
व्याख्या: बूंदी स्कूल ऑफ पेंटिंग राजस्थानी-मुगल शैली का संमिश्रण है जो 16वीं-18वीं शताब्दी में राजमहलों में विकसित हुई। इसमें प्रकृति और नायिका भेद का चित्रण प्रमुख है। (Rajasthan के पाठ्यक्रम में मान्य)


प्रश्न 4

थेवा कला (Thewa Art) का संबंध किससे है?

A) चमड़े की कारी

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Reading is not enough — practice questions to remember what you just read.

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