चित्तौड़गढ़ जिला — RAS GK प्रोफाइल, इतिहास, भूगोल, जनसांख्यिकी
RPSC RAS Pre 2021 में पूछा गया था: "चित्तौड़गढ़ दुर्ग किस शासक द्वारा निर्मित किया गया था?" इसी क्षेत्र की ऐतिहासिक महत्ता को समझना इस जिले की सामग्रिक जानकारी के लिए अत्यावश्यक है।
चित्तौड़गढ़ जिला: राजस्थान लोक सेवा परीक्षा के लिए संपूर्ण अध्ययन प्रोफाइल
प्रारंभिक संदर्भ
RPSC RAS Pre 2021 में पूछा गया था: "चित्तौड़गढ़ दुर्ग किस शासक द्वारा निर्मित किया गया था?" इसी क्षेत्र की ऐतिहासिक महत्ता को समझना इस जिले की सामग्रिक जानकारी के लिए अत्यावश्यक है।
इतिहास (Itihas)
चित्तौड़गढ़ (Chittorgarh) राजस्थान का सबसे ऐतिहासिक जिला है, जहाँ वीरता, त्याग और सांस्कृतिक गौरव के अनगिनत उदाहरण मिलते हैं। इस जिले का नाम चित्तौड़ दुर्ग के नाम पर पड़ा, जिसे मेवाड़ के शासकों की राजधानी के रूप में माना जाता था।
दुर्ग का निर्माण: चित्तौड़गढ़ दुर्ग का निर्माण सातवीं शताब्दी में चित्रांग राजा (कुछ अभिलेखों में मौर्य शासक चित्रांग के नाम दर्ज हैं) द्वारा किया गया था। हालांकि, बड़े पैमाने पर निर्माण और विस्तार गुहिल वंश के शासकों, विशेषकर राणा कुंभा (15वीं शताब्दी) के समय हुआ।
राणा कुंभा का योगदान: राणा कुंभा (1433-1468) मेवाड़ के सबसे शक्तिशाली शासक थे। उन्होंने विजय स्तंभ (Vijay Stambh) का निर्माण करवाया, जो 37.8 मीटर ऊँचा है और नौ मंजिलों वाला है। यह दुर्ग की सबसे प्रतिष्ठित संरचना है।
पद्मिनी की कथा: 1303 में अलाउद्दीन खिलजी के आक्रमण के समय रानी पद्मिनी की जौहर गाथा ने इस दुर्ग को अमरता प्रदान की। मल्लिनाथ की रचना "पृथ्वीराज रासो" में इस घटना का वर्णन मिलता है।
1535 का साका: गुजरात के सुल्तान बहादुर शाह के हमले में राणा विक्रमादित्य के समय 13,000 राजपूत वीरगति को प्राप्त हुए। यह मेवाड़ के इतिहास का सबसे त्रासद पल था।
अकबर का घेरा (1568): महाराणा उदय सिंह द्वितीय के समय अकबर ने दुर्ग को अपने अधीन किया, जिसके बाद मेवाड़ की राजधानी उदयपुर स्थानांतरित की गई।
भूगोल (Bhugol): नदियाँ, दुर्ग और दर्रे
भौगोलिक स्थिति: चित्तौड़गढ़ 75°36' से 76°35' पूर्वी देशांतर और 23°37' से 25°48' उत्तरी अक्षांश के मध्य स्थित है। यह मेवाड़ पठार का प्रमुख भाग है।
प्रमुख नदियाँ:
- बेड़च नदी: दक्षिण-पूर्वी क्षेत्र में बहती है, जिसे "आयड़" भी कहते हैं
- गंभीरी नदी: पश्चिमी क्षेत्र से बहती है
- ब्राह्मणी नदी: उत्तरी सीमा पर बहती है
- चंबल नदी: पूर्वी सीमा पर बहती है (Rajasthan-MP सीमा)
प्रमुख दुर्ग:
- चित्तौड़गढ़ दुर्ग: भारत का सबसे बड़ा दुर्ग (700 एकड़), तीन ओर से नदियों से घिरा हुआ
- भैंसरोडगढ़ दुर्ग: चंबल नदी के तट पर, अब होटल है
- शामगढ़ दुर्ग: उत्तरी भाग में स्थित
ऐतिहासिक दर्रे:
- हल्दीघाटी दर्रा: अरावली पर्वतमाला में, महाराणा प्रताप और अकबर का युद्ध स्थल (1576)
- थानघाटी दर्रा: मेवाड़ के लिए व्यापार मार्ग
अर्थव्यवस्था (Arthavyavastha)
जनसंख्या आँकड़े: 2011 की जनगणना अनुसार जनसंख्या 1,546,805 थी, जिसमें साक्षरता दर 61.8% है।
कृषि:
- मुख्य फसलें: गेहूँ, मक्का, बाजरा, दलहन, तिलहन
- बागवानी: अनाज उत्पादन के साथ-साथ अनार, आम, पपीता की खेती
- जलोपयोग: बेड़च और गंभीरी नदियों पर सिंचाई परियोजनाएँ (विभिन्न बाँध)
खनिज संपदा:
- ताँबा: खेतड़ी क्षेत्र में प्रसिद्ध (राष्ट्रीय तांबा निगम, NCL की खानें)
- जिप्सम: उत्तरी भाग में उपलब्ध
- फेल्सपार और अभ्रक: लघु मात्रा में
औद्योगिक विकास: भीलवाड़ा-चित्तौड़गढ़ सड़क पर औद्योगिक क्षेत्र, राजस्थान इंडस्ट्रियल डेवलपमेंट एंड इन्वेस्टमेंट कॉरपोरेशन (RIICO) की औद्योगिक हिंदी औद्योगिक नीति के अंतर्गत छोटे उद्योग।
पर्यटन: चित्तौड़गढ़ दुर्ग से 5 लाख वार्षिक आगंतुक आते हैं।
प्रसिद्ध स्थल, पर्व और संस्कृति (Prasiddh Sthal)
मंदिर और धार्मिक स्थल:
- कालिका माता मंदिर: दुर्ग के भीतर, नवीं शताब्दी का निर्माण, शक्तिपीठ माना जाता है
- मीरा मंदिर: भक्त कवयित्री मीरा को समर्पित, कृष्ण भक्ति का केंद्र
- कुंभस्वामी मंदिर: राणा कुंभा द्वारा निर्मित, मेवाड़ के सबसे पुराने मंदिरों में एक
- तुलसी माता मंदिर: बस्सी तहसील में
विजय स्तंभ और केलास मंदिर:
- विजय स्तंभ (15वीं शताब्दी) राणा कुंभा की विजयों का स्मारक
- केलास मंदिर (12वीं शताब्दी) मालवा शैली का उत्कृष्ट उदाहरण
पारंपरिक पर्व:
- पद्मावती जयंती: पद्मिनी की याद में, अप्रैल-मई में
- गणगौर: महिलाओं का प्रमुख त्योहार, गौरी (पार्वती) को समर्पित
- तीज: श्रावण मास में महिलाओं का पारंपरिक पर्व
लोक संस्कृति:
- घूमर नृत्य: महिलाओं का परंपरागत नृत्य
- भीलों की संस्कृति: जनजातीय पारंपरिक कला और संगीत
- तारकीन संगीत: स्थानीय लोक वाद्य यंत्र
प्रशासनिक व्यवस्था (Prashasanik)
जिला मुख्यालय: चित्तौड़गढ़ शहर
तहसीलें (7):
- चित्तौड़गढ़ (मुख्य)
- कपासन
- राधानपुर
- बस्सी
- छोटी सादड़ी
- भैंसरोडगढ़
- निंबाहेड़ा
पंचायत समिति: 11 (Panchayat Samiti के अंतर्गत ग्रामीण स्थानीय शासन)
नगर पालिका: चित्तौड़गढ़ नगर पालिका परिषद एवं अन्य नगर निकाय
विकास खंड: उपरोक्त सभी तहसीलें एक विकास खंड के रूप में कार्य करती हैं
वर्तमान प्रशासनिक सूचना: अधिकतम जानकारी के लिए राजस्थान सरकार की आधिकारिक वेबसाइट (https://chittorgarh.rajasthan.gov.in/) देखें।
RAS प्रारंभिक परीक्षा के लिए MCQ
प्रश्न 1: चित्तौड़गढ़ दुर्ग का निर्माण किस शताब्दी में हुआ?
- (A) पाँचवीं शताब्दी
- (B) सातवीं शताब्दी
- (C) नौवीं शताब्दी
- (D) दसवीं शताब्दी
उत्तर: (B) सातवीं शताब्दी व्याख्या: चित्तौड़गढ़ दुर्ग का मूल निर्माण सातवीं शताब्दी में चित्रांग राजा द्वारा किया गया था। बाद में गुहिल वंश के शासकों, विशेषकर राणा कुंभा ने इसका विस्तार किया।
प्रश्न 2: विजय स्तंभ किस राणा द्वारा निर्मित किया गया?
- (A) राणा सांगा
- (B) राणा कुंभा
- (C) राणा उदय सिंह
- (D) राणा प्रताप
उत्तर: (B) राणा कुंभा व्याख्या: विजय स्तंभ (Vijay Stambh) राणा कुंभा द्वारा 15वीं शताब्दी (1448 ईस्वी) में अपनी विजयों के स्मरण में बनवाया गया। यह 37.8 मीटर ऊँचा नौ मंजिलों वाला दुर्ग है।
प्रश्न 3: रानी पद्मिनी की जौहर कथा किस आक्रमणकारी के संदर्भ में प्रसिद्ध है?
- (A) मोहम्मद गजनवी
- (B) अलाउद्दीन खिलजी
- (C) तैमूर लंग
- (D) बहादुर शाह
उत्तर: (B) अलाउद्दीन खिलजी व्याख्या: 1303 में दिल्ली सल्तनत के सुल्तान अलाउद्दीन खिलजी ने चित्तौड़गढ़ पर हमला किया। इस घेराबंदी के समय रानी पद्मिनी और अन्य राजपूत महिलाओं ने जौहर (आग में कूदकर आत्महत्या) किया।
प्रश्न 4: चित्तौड़
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