चूरू जिला — RAS GK प्रोफाइल, इतिहास, भूगोल, जनसांख्यिकी
PYQ संदर्भ: राजस्थान लोक सेवा आयोग की 2016 प्रारंभिक परीक्षा में पूछा गया था—"राजस्थान के किस जिले को 'तारों की नगरी' कहा जाता है?" उत्तर: चूरू। इसी प्रश्न से आरंभ करते हुए हम चूरू जिले की विस्तृत भौगोलिक, ऐतिहासिक और आर्थिक विशेषताओं का विश्लेषण प्रस्तुत करते हैं।
चूरू जिला: राजस्थान RAS प्रारंभिक परीक्षा समीक्षा
PYQ संदर्भ: राजस्थान लोक सेवा आयोग की 2016 प्रारंभिक परीक्षा में पूछा गया था—"राजस्थान के किस जिले को 'तारों की नगरी' कहा जाता है?" उत्तर: चूरू। इसी प्रश्न से आरंभ करते हुए हम चूरू जिले की विस्तृत भौगोलिक, ऐतिहासिक और आर्थिक विशेषताओं का विश्लेषण प्रस्तुत करते हैं।
इतिहास (Itihas)
चूरू जिला राजस्थान के उत्तरी भाग में स्थित है और इसका इतिहास मुख्यतः बीकानेर रियासत से जुड़ा है। 16वीं शताब्दी में राव बीका के वंशजों द्वारा इस क्षेत्र की स्थापना की गई थी। चूरू नाम की व्युत्पत्ति स्थानीय भाषा में "चूरा" (मिट्टी का टीला) से मानी जाती है।
मध्यकाल में चूरू क्षेत्र बीकानेर रियासत के अंतर्गत था। 18वीं-19वीं शताब्दी में यह व्यापारिक केंद्र के रूप में विकसित हुआ। ब्रिटिश शासनकाल में चूरू अजमेर-मेरवाड़ा जिले का हिस्सा रहा। स्वतंत्रता के पश्चात 1949 में चूरू को बीकानेर जिले से अलग करके एक स्वतंत्र जिला बनाया गया। 2016 में तहसील तारानगर को अलग करके नए जिले का निर्माण किया गया, जिससे चूरू का भौगोलिक विस्तार घटा।
राजस्थान के पुरातत्व विभाग के अनुसार (rajasthan.gov.in/archaeology) चूरू में प्राचीन मानव बस्तियों के अवशेष मिले हैं जो हड़प्पा काल से संबंधित हैं। सूरसागर, देवकुंड और अन्य स्थानों पर प्राचीन सिक्के और मूर्तियां खोजी गई हैं।
भूगोल (Bhugol)
भौगोलिक स्थिति: चूरू जिला 27°50' से 28°55' उत्तरी अक्षांश और 73°52' से 75°35' पूर्वी देशांतर के मध्य स्थित है। इसकी उत्तरी सीमा हरियाणा राज्य से, पश्चिमी सीमा बीकानेर से, पूर्वी सीमा झुंझुनू से और दक्षिणी सीमा सीकर से मिलती है।
नदियां: चूरू की मुख्य नदियां हैं—
- घग्घर नदी: यह जिले की सबसे महत्वपूर्ण नदी है जो उत्तर-पश्चिम से दक्षिण-पूर्व की ओर बहती है। यह सूखी नदी मानी जाती है किंतु बरसात में जल प्रवाहित होता है।
- साहिबी नदी: जिले के पूर्वी भाग से होकर बहती है।
- काँटली नदी: छोटी नदी है जो मौसमी प्रकृति की है।
दुर्ग और ऐतिहासिक स्थल:
- राय किला: चूरू शहर के मध्य में स्थित, 17वीं शताब्दी में निर्मित।
- तालछपर दुर्ग: जिले के पश्चिमी भाग में स्थित।
- खिमसर दुर्ग: बीकानेर-चूरू सीमा पर, मूसलिम वास्तुकला का नमूना।
पास और भूआकृति: चूरू मरुस्थलीय क्षेत्र में स्थित है। यहां की औसत ऊंचाई 240 मीटर है। थार मरुस्थल के अंतर्गत होने के कारण यह विरल वनस्पति वाला क्षेत्र है। अनुमोदित राजस्थान जिला सूचना पोर्टल (districts.rajasthan.gov.in) के अनुसार चूरू का कुल क्षेत्रफल वर्तमान में 4,896 वर्ग किलोमीटर है।
अर्थव्यवस्था (Arthavyavastha)
कृषि: चूरू की अर्थव्यवस्था मुख्यतः कृषि पर निर्भर है। यहां की जलवायु अत्यंत शुष्क है और वार्षिक वर्षा 200-300 मिमी है। प्रमुख फसलें हैं—
- बाजरा: सबसे महत्वपूर्ण फसल, कुल कृषि क्षेत्र का 40% भाग में उगाई जाती है।
- मूंगफली: दूसरी प्रमुख नकदी फसल।
- सरसों: तिलहन फसल के रूप में महत्वपूर्ण।
- चना और अन्य दलहन।
- मेथी: चूरू में मेथी की खेती राजस्थान में सबसे अधिक होती है।
औद्योगिक विकास: चूरू में लघु और मध्यम उद्योग विकसित हैं। प्रमुख उद्योग हैं—
- कपड़ा उद्योग
- अनाज प्रसंस्करण
- नमक उद्योग (कुछ क्षेत्रों में)
- खनन (चूना पत्थर, बलुई पत्थर)
व्यापार: चूरू ऐतिहासिक रूप से व्यापारिक केंद्र रहा है। यहां के महाजन और व्यापारियों का देशभर में प्रभाव था। वर्तमान में यह कृषि उत्पादों के व्यापार का महत्वपूर्ण केंद्र है। मेथी, मूंगफली और अन्य कृषि पदार्थों का निर्यात किया जाता है।
सिंचाई: जल की कमी चूरू की प्रमुख समस्या है। नहरों की कमी के कारण भूजल पर निर्भरता अधिक है। कुछ क्षेत्रों में इंदिरा गांधी नहर की सहायक नहरें पहुंचाई गई हैं।
प्रसिद्ध स्थान (Prasiddh Sthal)
मंदिर:
- राय किला के अंदर महालक्ष्मी मंदिर: चूरू का सबसे प्राचीन धार्मिक स्थल।
- खिमसर महादेव मंदिर: प्राचीन शैव मंदिर।
- सूरसागर: तीर्थ स्थल, माना जाता है कि यहां सूर्यदेव को समर्पित प्राचीन कुंड है।
लोक संस्कृति:
- नाट नृत्य: चूरू का प्रसिद्ध लोक नृत्य जो विवाह के अवसर पर किया जाता है।
- घूमर: महिलाओं का पारंपरिक नृत्य।
- भाट-मीरासी परंपरा: यहां का लोक संगीत परंपरा बहुत समृद्ध है।
पर्यटन:
- तारानगर: चूरू से 35 किमी दूर, अब अलग जिला है। यह "तारों की नगरी" के नाम से विख्यात है क्योंकि यहां रात को तारे अत्यंत स्पष्ट दिखाई देते हैं।
- खिमसर: पर्यटकों के लिए आकर्षण केंद्र, मरु सांस्कृति का दर्शन।
- गोदावरी डेम: कृत्रिम जल संचय।
त्यौहार:
- तीज: जुलाई-अगस्त में मनाई जाती है, महिलाओं का प्रमुख त्यौहार।
- दिवाली: अक्टूबर-नवंबर में।
- होली: फाग महीने में मनाई जाती है।
प्रशासनिक विभाजन (Prashasanik)
तहसीलें (वर्तमान):
- चूरू तहसील (जिला मुख्यालय)
- राजगढ़ तहसील
- बिसाऊ तहसील
- सुजानगढ़ तहसील
2016 के पुनर्गठन के बाद तारानगर तहसील अलग हो गई। जिले में कुल 203 गांव हैं।
शहरी निकाय: चूरू नगरपालिका परिषद (Municipal Council) की स्थापना 1971 में की गई थी। यह राजस्थान की महत्वपूर्ण शहरी संस्थाओं में से एक है।
जनसंख्या: 2011 की जनगणना के अनुसार चूरू की जनसंख्या लगभग 15.33 लाख थी (तारानगर अलग होने से पूर्व)। वर्तमान में यह लगभग 10.8 लाख है।
RAS प्रारंभिक परीक्षा के लिए MCQ (5 प्रश्न)
प्रश्न 1: चूरू को "तारों की नगरी" किसे कहा जाता है?
विकल्प: (A) चूरू शहर को (B) तारानगर को (C) खिमसर को (D) बिसाऊ को
सही उत्तर: (B) तारानगर को
व्याख्या: तारानगर, जिसे 2016 तक चूरू जिले का हिस्सा माना जाता था, की भौगोलिक स्थिति के कारण यहां रात को तारे अत्यंत स्पष्ट दिखाई देते हैं। इसी कारण इसे "तारों की नगरी" (City of Stars) कहा जाता है। यह 2016 में अलग जिले में परिणत हुआ। PYQ-2016 में यह सीधा प्रश्न पूछा गया था।
प्रश्न 2: चूरू जिले की मुख्य नदी कौन सी है?
विकल्प: (A) साहिबी नदी (B) घग्घर नदी (C) काँटली नदी (D) लूनी नदी
सही उत्तर: (B) घग्घर नदी
व्याख्या: घग्घर नदी चूरू जिले की सबसे महत्वपूर्ण नदी है जो उत्तर-पश्चिम से दक्षिण-पूर्व की ओर बहती है। हालांकि यह मुख्यतः एक सूखी नदी है, किंतु बरसात के मौसम में इसमें जल प्रवाहित होता है। साहिबी और काँटली नदियां द्वितीयक महत्व की हैं।
प्रश्न 3: चूरू में मेथी की खेती का राजस्थान में कौन सा स्थान है?
विकल्प: (A) द्वितीय स्थान (B) तृतीय स्थान (C) प्रथम स्थान (D) चतुर्थ स्थान
सही उत्तर: (C) प्रथम स्थान
व्याख्या: चूरू में मेथी की खेती राजस्थान में सर्वाधिक की जाती है। यहां की जलवायु मेथी की खेती के लिए अनुकूल है। मेथी का निर्यात भी व्यापक पैमाने पर होता
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