दौसा जिला — RAS GK प्रोफाइल, इतिहास, भूगोल, जनसांख्यिकी
राजस्थान लोक सेवा आयोग की प्रारंभिक परीक्षा (RAS Prelims 2019) में एक प्रश्न पूछा गया था: "दौसा जिले का मुख्यालय किस नदी के किनारे स्थित है?" यह प्रश्न दौसा जिले की भौगोलिक विशेषताओं की महत्ता को रेखांकित करता है। दौसा (Dausa) राजस्थान के पूर्वी भाग में स्थित एक ऐतिहासिक जिला है,…
दौसा जिला: राजस्थान प्रशासनिक सेवा परीक्षा प्रोफाइल
प्रारम्भिक टिप्पणी
राजस्थान लोक सेवा आयोग की प्रारंभिक परीक्षा (RAS Prelims 2019) में एक प्रश्न पूछा गया था: "दौसा जिले का मुख्यालय किस नदी के किनारे स्थित है?" यह प्रश्न दौसा जिले की भौगोलिक विशेषताओं की महत्ता को रेखांकित करता है। दौसा (Dausa) राजस्थान के पूर्वी भाग में स्थित एक ऐतिहासिक जिला है, जो अपनी समृद्ध धरोहर, कृषि-आधारित अर्थव्यवस्था और सांस्कृतिक वैभव के लिए प्रसिद्ध है।
इतिहास (Itihas)
दौसा का इतिहास प्राचीन काल से जुड़ा है। इस क्षेत्र में प्राचीन आर्य सभ्यता के साक्ष्य मिलते हैं। मौर्य काल में यह क्षेत्र मौर्य साम्राज्य के अंतर्गत था। दौसा नाम की व्युत्पत्ति के संबंध में माना जाता है कि यह 'धवलसर' से आया है, जिसे बाद में दौसा कहा जाने लगा। कुछ इतिहासकार इसे 'दाओ' (दाऊ - सरदार) से संबंधित मानते हैं।
दौसा पर कछवाहा राजवंश का सबसे महत्वपूर्ण शासन रहा। 10वीं शताब्दी में राजा ढोलन कछवाहा ने दौसा क्षेत्र में अपनी राजधानी स्थापित की। यह अवधि दौसा के विकास का स्वर्णिम काल रहा। राजा ढोलन के पश्चात् दिल्ली की सत्ता पर कछवाहों का प्रभाव बढ़ता गया और दौसा से जयपुर की ओर राजनीतिक केंद्र स्थानांतरित हो गया।
मुगल काल में दौसा अकबर के साम्राज्य के अंतर्गत आया। राजा भगवंत सिंह (मानसिंह के पिता) ने दौसा पर शासन किया। 18वीं शताब्दी में यह ब्रिटिश राज के अंतर्गत आया। स्वतंत्रता संग्राम में दौसा की महत्वपूर्ण भूमिका रही। दौसा जिले में 1857 के विद्रोह में भी जनता ने सक्रिय भाग लिया।
भूगोल: नदियाँ, दुर्ग और दर्रे (Bhugol)
नदियाँ
बांडी नदी: दौसा का मुख्य जलस्रोत बांडी नदी है, जो अरावली पर्वतश्रेणी से निकलती है। यह नदी दौसा शहर के किनारे बहती है और सिंध नदी में मिलती है। कृषकों के लिए यह नदी अत्यंत महत्वपूर्ण है। (यही उत्तर था 2019 के RAS प्रश्न का)
सिंध नदी: यह बांडी नदी की सहायक नदी है, जो चंबल की मुख्य सहायक नदी के रूप में कार्य करती है।
मोरेल नदी: दौसा के उत्तरी भाग में बहने वाली यह नदी भी महत्वपूर्ण जल संसाधन है।
दुर्ग और ऐतिहासिक स्थल
दौसा दुर्ग: 10वीं शताब्दी में निर्मित यह दुर्ग कछवाहा राजाओं की शक्ति का प्रतीक था। वर्तमान में इसके खंडहर विद्यमान हैं।
सिकंदरा दुर्ग: यह दुर्ग अकबर के काल में निर्मित माना जाता है।
बदनोर दुर्ग: दौसा के पूर्वी भाग में स्थित यह दुर्ग ऐतिहासिक महत्व का है।
भौगोलिक विशेषताएं
दौसा अरावली पर्वतश्रेणी के पूर्वी ढलान पर स्थित है। जिले की समुद्र तल से ऊंचाई 300-500 मीटर के बीच है। जलवायु उपोष्णकटिबंधीय है, औसत वार्षिक वर्षा 600-750 मिमी है।
अर्थव्यवस्था (Arthavyavastha)
दौसा की अर्थव्यवस्था मुख्यतः कृषि पर निर्भर है। जिले का 75% से अधिक जनसंख्या कृषि कार्य में लगी है।
कृषि उत्पादन
मुख्य फसलें: बाजरा, मोठ, गेहूं, जौ, और तिलहन दौसा की प्रमुख फसलें हैं। मूंगफली और सरसों का भी उल्लेखनीय उत्पादन होता है। बाजरा दौसा की सबसे महत्वपूर्ण फसल है, जिसे "गोल्डन क्रॉप" भी कहा जाता है।
बागवानी: आलूबुखारा, नींबू, आंवला और अनार की खेती क्षेत्रीय किसानों की आय का महत्वपूर्ण साधन है। दौसा आंवला उत्पादन के लिए राजस्थान में प्रसिद्ध है।
पशुपालन
दौसा में गोपालन, भेड़पालन और ऊंट पालन का पारंपरिक कार्य होता है। यह जीवन-यापन का सहायक साधन है।
उद्योग
खनिज संसाधन: अभ्रक (माइका), फेल्सपार, और चूना पत्थर का दोहन होता है। स्थानीय उद्योगों में खाद्य प्रसंस्करण, दुग्ध दही एवं घी निर्माण प्रमुख हैं।
विपणन
राजस्थान सरकार के कृषि विभाग द्वारा www.agriculture.rajasthan.gov.in के माध्यम से किसानों को तकनीकी सहायता प्रदान की जाती है। दौसा में कृषि विज्ञान केंद्र (KVK) स्थापित है।
प्रसिद्ध स्थल, त्यौहार और लोक संस्कृति (Prasiddh Sthal)
प्रमुख मंदिर
घाटेश्वर महादेव मंदिर: दौसा का सबसे प्रसिद्ध मंदिर। इस मंदिर के पास एक प्राकृतिक गर्म जल का कुंड है, जिसे चिकित्सीय गुणों के लिए माना जाता है।
लक्ष्मीनारायण मंदिर: दौसा शहर के मध्य में स्थित यह मंदिर कछवाहा राजाओं द्वारा निर्मित है।
गोपीनाथ मंदिर: भगवान कृष्ण को समर्पित यह मंदिर सांस्कृतिक केंद्र है।
त्यौहार और उत्सव
गणगौर: दौसा में गणगौर का पर्व बड़ी धूमधाम से मनाया जाता है। महिलाएं गीत गाती हैं और परंपरागत नृत्य करती हैं।
तीज: सावन मास में तीज का पर्व स्थानीय संस्कृति का हृदय है।
होली और दिवाली: ये त्यौहार पूरे जिले में उत्साह के साथ मनाए जाते हैं।
लोक संस्कृति
दौसा की लोक संस्कृति में ढोलक, नगाड़े और मंजीरे का प्रयोग होता है। स्थानीय लोक नृत्य में घूमर, कालबेलिया और लूम्बा नृत्य प्रमुख हैं। कठपुतली नृत्य का भी दौसा में पुरातन इतिहास है।
प्रशासनिक विभाजन (Prashasanik)
दौसा जिला राजस्थान के पूर्वी क्षेत्र में स्थित है। जिला मुख्यालय दौसा शहर है।
तहसील विभाजन
दौसा जिले में वर्तमान में 5 तहसीलें हैं:
- दौसा तहसील (मुख्य)
- लालसोट तहसील
- सिकंदरा तहसील
- बसवा तहसील
- मंडावर तहसील
ब्लॉक विभाजन
जिले में 5 प्रशासनिक ब्लॉक हैं जो तहसीलों के साथ समन्वित हैं। तहसील स्तर पर प्रशासनिक कार्य संचालित होते हैं। राजस्व विभाग, पुलिस प्रशासन और स्थानीय प्रशासन तहसील स्तर पर व्यवस्थित हैं।
पंचायती राज संरचना
दौसा में ग्राम पंचायत, ब्लॉक पंचायत (मध्यवर्तीय पंचायत) और जिला पंचायत (सर्वोच्च पंचायत) की तीन-स्तरीय व्यवस्था है। (राजस्थान पंचायती राज अधिनियम 1994)
जनसंख्या: लगभग 15 लाख (2011 जनगणना) क्षेत्रफल: 2,955 वर्ग किमी साक्षरता दर: 67% (राजस्थान औसत से कम)
RAS Prelims स्टाइल MCQs
प्रश्न 1: दौसा जिले का प्राचीन नाम किस संदर्भ में 'धवलसर' कहा जाता है?
- (A) भूमि की सफेदी के कारण
- (B) सफेद पत्थर की खानों के कारण
- (C) क्षेत्र के प्राचीन संस्कृत नाम से
- (D) राजा ढोलन के काल में नामकरण से
उत्तर: (C) क्षेत्र के प्राचीन संस्कृत नाम से व्याख्या: 'धवलसर' संस्कृत शब्द है जिसका अर्थ 'सफेद सरोवर' या 'पवित्र जल स्रोत' है। दौसा नाम इसी से विकसित माना जाता है।
प्रश्न 2: बांडी नदी दौसा में किस नदी में मिलती है?
- (A) चंबल में
- (B) सिंध में
- (C) माही में
- (D) बनास में
उत्तर: (B) सिंध में व्याख्या: बांडी नदी अरावली से निकलकर दौसा शहर से गुजरती है और सिंध नदी में मिलती है, जो आगे चंबल की सहायक नदी है।
प्रश्न 3: दौसा की कौन सी फसल को "गोल्डन क्रॉप" कहा जाता है?
- (A) मूंगफली
- (B) गेहूं
- (C) बाजरा
- (D) सरसों
उत्तर: (C) बाजरा व्याख्या: बाजरा दौसा की मुख्य फसल है और पोषक ग
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