जोधपुर जिला — RAS GK प्रोफाइल, इतिहास, भूगोल, जनसांख्यिकी
जोधपुर की स्थापना किसने की और यह किस राजवंश के अधीन था — इस प्रश्न का उत्तर इस प्रोफाइल के इतिहास खंड में समाहित है। जोधपुर राजस्थान के पश्चिमी भाग में स्थित एक ऐतिहासिक और सांस्कृतिक केंद्र है, जो मारवाड़ क्षेत्र का प्रमुख शहर माना जाता है…
जोधपुर जिला: RAS परीक्षा के लिए सामग्री
परिचय
जोधपुर की स्थापना किसने की और यह किस राजवंश के अधीन था — इस प्रश्न का उत्तर इस प्रोफाइल के इतिहास खंड में समाहित है। जोधपुर राजस्थान के पश्चिमी भाग में स्थित एक ऐतिहासिक और सांस्कृतिक केंद्र है, जो मारवाड़ क्षेत्र का प्रमुख शहर माना जाता है।
| विवरण | जानकारी |
|---|---|
| क्षेत्रफल | लगभग 22,850 वर्ग किमी |
| जनसंख्या (जनगणना 2011) | लगभग 36.86 लाख |
| मुख्यालय | जोधपुर शहर |
| प्रमुख नदी | लूनी (तथा सहायक नदियाँ जोजरी, बांडी, गुहिया) |
| प्रमुख फसलें | ग्वार, मोठ, मूंग, बाजरा, जीरा, मथानिया मिर्च |
| प्रमुख किला | मेहरानगढ़ (1459, राव जोधा) |
इतिहास
राठौड़ वंश और स्थापना
जोधपुर की स्थापना 1459 ईस्वी में राव जोधा ने की थी, जो राठौड़ वंश के प्रसिद्ध राजा थे। राव जोधा ने मंडोर को छोड़कर जोधपुर को अपनी नई राजधानी बनाया। जोधपुर नाम स्वयं राव जोधा के नाम से व्युत्पन्न है। इस शहर की स्थापना मंडोर के निकट चिड़िया टूंक पहाड़ी पर की गई थी, जो व्यापार मार्गों के लिए अत्यंत महत्वपूर्ण स्थान था।
मुगल काल और सांस्कृतिक संमिश्रण
17वीं सदी में मुगल साम्राज्य के विस्तार के समय जोधपुर के राठौड़ राजाओं ने कभी-कभी मुगलों के साथ संधि की और कभी-कभी संघर्ष भी किया। राजा जसवंत सिंह प्रथम (1638-1678) इस काल के सबसे प्रसिद्ध शासक थे। इस समय जोधपुर एक महत्वपूर्ण व्यापार केंद्र बन गया था।
ब्रिटिश काल और वर्तमान
ब्रिटिश राज के दौरान जोधपुर एक रियासत (princely state) था, जिसे राजपूताना एजेंसी के अंतर्गत रखा गया था। महाराजा उम्मेद सिंह का निधन 1947 में हुआ, जिसके बाद महाराजा हनवंत सिंह जोधपुर के शासक बने। जोधपुर 30 मार्च 1949 को वृहद् राजस्थान संघ में शामिल हुआ और स्वतंत्र भारत का अभिन्न अंग बन गया।
- 1459राव जोधा — जोधपुर की स्थापना
- 1638-1678महाराजा जसवंत सिंह प्रथम
- 1947महाराजा उम्मेद सिंह का निधन
- 1947-1949महाराजा हनवंत सिंह
- 30 मार्च 1949वृहद् राजस्थान संघ में विलय
भूगोल
नदियां और जल निकास
जोधपुर जिला लूनी नदी के बेसिन में स्थित है। लूनी नदी बिलाड़ा के निकट जिले में प्रवेश करती है और आगे बाड़मेर की ओर बहती है। जोजरी, बांडी और गुहिया जोधपुर क्षेत्र की अन्य सहायक नदियाँ हैं।
दुर्ग और किले
मेहरानगढ़ किला जोधपुर का सबसे प्रसिद्ध और भव्य किला है। इसे 1459 में राव जोधा ने 125 मीटर ऊंची पहाड़ी पर बनवाया था। यह किला 5 किलोमीटर की परिधि में फैला है और इसकी दीवारें 36 मीटर तक ऊंची हैं। किले के अंदर सात द्वार हैं, जिनमें से हर एक का अपना ऐतिहासिक महत्व है। मंडोर किला जोधपुर से 9 किलोमीटर दूर उत्तर में स्थित है और यह प्राचीन राठौड़ राजधानी थी।
भौगोलिक संरचना
थार रेगिस्तान जिले के उत्तरी और पश्चिमी भाग में विस्तृत है। यह क्षेत्र शुष्क और अर्ध-शुष्क जलवायु वाला है।
अर्थव्यवस्था
कृषि और पशुपालन
जोधपुर की अर्थव्यवस्था मुख्य रूप से कृषि पर निर्भर है। मुख्य फसलें ग्वार, मोठ, मूंग, बाजरा, जीरा और मथानिया की मिर्च हैं। इस क्षेत्र में पशुपालन और ऊंट पालन भी महत्वपूर्ण आजीविका स्रोत हैं।
पर्यटन
मेहरानगढ़ किले और उम्मेद भवन पैलेस जोधपुर के मुख्य पर्यटन आकर्षण हैं। उम्मेद भवन पैलेस (1929-1943) को भारत के सबसे बड़े निजी महलों में से एक माना जाता है। इसमें 347 कमरे हैं। पर्यटन उद्योग जोधपुर के आर्थिक विकास में महत्वपूर्ण भूमिका निभाता है।
हस्तशिल्प और व्यापार
जोधपुर की बंधनी (टाई-डाई) कपड़ा पूरी दुनिया में प्रसिद्ध है। नीले रंग के पारंपरिक जोधपुरी घाघरे का निर्माण यहां होता है। जोधपुर की मार्बल नक्काशी और मिट्टी के बर्तन भी अंतरराष्ट्रीय बाजार में निर्यात किए जाते हैं।
औद्योगिक विकास
जोधपुर में सीमेंट फैक्ट्रियां, खनिज प्रसंस्करण और खाद्य प्रसंस्करण उद्योग स्थित हैं। जोधपुर एयरपोर्ट के विकास के साथ लॉजिस्टिक और एयरकार्गो सेवाएं बढ़ रही हैं।
प्रसिद्ध स्थल, त्योहार और लोक संस्कृति
मंदिर और धार्मिक स्थल
मंडोर में 333 देवियों का स्मारक परिसर (देवियों की छतरियां) एक अद्वितीय स्मारक है।
त्योहार और समारोह
मारवाड़ महोत्सव जोधपुर का प्रमुख वार्षिक पर्यटन समारोह है, जिसमें पारंपरिक कला, संगीत, नृत्य और खेल प्रदर्शित किए जाते हैं। धींगा गवर, खेजड़ली मेला और राजस्थान अंतर्राष्ट्रीय लोक उत्सव (RIFF) जोधपुर के अन्य प्रमुख आयोजन हैं। होली, दिवाली और गणगौर यहां की अन्य प्रमुख परंपराएं हैं।
लोक संस्कृति
घूमर नृत्य जोधपुर की विशेष लोक परंपरा है। मांड गायन शैली यहां की अन्य सांस्कृतिक विशेषता है। पारंपरिक राजस्थानी भजन और कव्वाली का अभी भी जोधपुर में विशेष महत्व है।
प्रशासनिक संरचना
जिला विभाजन और तहसीलें
जोधपुर जिला वर्तमान में इन तहसीलों में विभाजित है: जोधपुर, बालेसर, बावड़ी, भोपालगढ़, बिलाड़ा, चामू, झंवर, कुड़ी भगतासनी, लूणी, ओसियां, पीपाड़ शहर, सेखला, शेरगढ़ और तिंवरी। (ध्यान दें: फलौदी अब एक अलग जिला है और जोधपुर की तहसील सूची में शामिल नहीं है।)
प्रशासनिक पदानुक्रम
जिला कलेक्टर जोधपुर का सर्वोच्च प्रशासनिक अधिकारी है। जोधपुर जिले की अधिकांश विधानसभा सीटें जोधपुर लोकसभा क्षेत्र में आती हैं; बिलाड़ा विधानसभा सीट पाली लोकसभा क्षेत्र का हिस्सा है। जिले में लगभग 2500 गांव हैं।
RAS परीक्षा के लिए महत्वपूर्ण MCQ
प्रश्न 1: जोधपुर की स्थापना कब हुई थी?
- (A) 1425 ईस्वी
- (B) 1459 ईस्वी
- (C) 1476 ईस्वी
- (D) 1500 ईस्वी
उत्तर: (B) 1459 ईस्वी व्याख्या: राव जोधा ने 1459 ईस्वी में जोधपुर की स्थापना की थी। यह मंडोर से अलग एक नई राजधानी थी। इस वर्ष को मारवाड़ के इतिहास में एक महत्वपूर्ण बिंदु माना जाता है।
प्रश्न 2: मेहरानगढ़ किले को किसने बनवाया था?
- (A) राजा जसवंत सिंह
- (B) राव जोधा
- (C) महाराजा उम्मेद सिंह
- (D) राणा कुंभा
उत्तर: (B) राव जोधा व्याख्या: मेहरानगढ़ किले का निर्माण राव जोधा ने 1459 में शुरू करवाया था। यह किला 5 किलोमीटर की परिधि में फैला है और इसे भारत के सबसे प्रभावशाली किलों में से एक माना जाता है।
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