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नागौर जिला — RAS GK प्रोफाइल, इतिहास, भूगोल, जनसांख्यिकी

Raj Study Team··5 min read

RAS Prelims 2021 में पूछा गया था: "नागौर जिले की स्थापना किस वर्ष हुई थी?" (उत्तर: 1974)। यह प्रश्न नागौर के प्रशासनिक इतिहास की महत्ता को दर्शाता है।

नागौर जिला: व्यापक अध्ययन सामग्री

प्रारंभिक टिप्पणी

RAS Prelims 2021 में पूछा गया था: "नागौर जिले की स्थापना किस वर्ष हुई थी?" (उत्तर: 1974)। यह प्रश्न नागौर के प्रशासनिक इतिहास की महत्ता को दर्शाता है।


इतिहास (Itihas)

नागौर जिले का ऐतिहासिक महत्व मारवाड़ क्षेत्र के साथ गहराई से जुड़ा हुआ है। यह क्षेत्र प्राचीन काल में "नाग" जनपद के रूप में जाना जाता था, जिसका नाम नाग देवता के पूजन से संबंधित है। मध्यकालीन अवधि में नागौर शहर कच्छवाहा और राठौड़ राजपूतों के शासन के अंतर्गत आया।

मुगल काल में महत्व: अकबर के समय नागौर का किला एक महत्वपूर्ण सैन्य केंद्र था। 1570 में अकबर ने नागौर किले की घेराबंदी की और इसे मुगल साम्राज्य में मिलाया। मुगल प्रशासन के अंतर्गत यह क्षेत्र आगरा सूबे का भाग था।

राठौड़ शासन: 17वीं शताब्दी में जोधपुर के राठौड़ राजाओं ने नागौर पर नियंत्रण स्थापित किया। यह मारवाड़ रियासत का महत्वपूर्ण अंग बन गया और 1948 तक राजस्थान संघ में विलय तक इसी रूप में रहा।

आधुनिक काल: भारतीय स्वतंत्रता संग्राम में नागौर का महत्वपूर्ण योगदान रहा। राजस्थान निर्माण के समय 1 नवंबर 1956 को नागौर को पाली के साथ संयुक्त किया गया। अंततः 16 मई 1974 को नागौर को अलग जिले का दर्जा दिया गया (https://rajasthan.gov.in)।


भुगोल (Bhugol)

स्थिति और विस्तार

नागौर जिला उत्तर-पश्चिमी राजस्थान में 26°N-27°30'N अक्षांश और 73°30'E-75°E देशांतर में स्थित है। इसका क्षेत्रफल 4,707 वर्ग किमी है। जिले की सीमाएं पांच जिलों से लगती हैं: बीकानेर, नोखा (उत्तर), पाली (दक्षिण-पश्चिम), जोधपुर (दक्षिण-पूर्व), और हनुमानगढ़ (उत्तर-पश्चिम)।

जलवायु और भूगोल

नागौर की जलवायु अर्ध-शुष्क से शुष्क है। वार्षिक वर्षा 400-500 मिमी है। यह क्षेत्र मुख्य रूप से बलुई मिट्टी से युक्त थार मरुस्थल का हिस्सा है। मिट्टी की संरचना कृषि के लिए अनुकूल नहीं है, किंतु सिंचाई सुविधाओं से कृषि संभव है।

नदियां

लूणी नदी: नागौर की प्रमुख नदी है जो अजमेर से आकर अरावली को काटती है। यह नदी नागौर शहर के पास बहती है और समृद्ध कृषि क्षेत्र बनाती है।

सांभर झील: यद्यपि यह नागौर में पूरी तरह नहीं है, लेकिन इसका प्रभाव क्षेत्र नागौर तक विस्तृत है।

दुर्ग और ऐतिहासिक स्थान

नागौर किला: 12वीं शताब्दी में निर्मित यह किला चतुर्भुज संरचना में बना है। इसकी दीवारों की मोटाई 30-35 फीट है। किले में कई महल, कुएं और गढ़ियां हैं। यह राजस्थान के महत्वपूर्ण किलों में एक है।

पहाड़ी दर्रे: नागौर की पश्चिमी सीमा पर अरावली की श्रेणियों के बीच कई दर्रे हैं जो पड़ोसी क्षेत्रों से संपर्क स्थापित करते हैं।


अर्थव्यवस्था (Arthavyavastha)

कृषि

नागौर की अर्थव्यवस्था मुख्य रूप से कृषि पर निर्भर है। प्रमुख फसलें:

  • बाजरा: सर्वाधिक उगाई जाने वाली फसल, क्षेत्रफल लगभग 2 लाख हेक्टेयर
  • चना: सर्दी की महत्वपूर्ण नकदी फसल
  • जौ: सिंचित और असिंचित दोनों क्षेत्रों में होती है
  • गेहूं: नहरों के निकट क्षेत्रों में
  • तिल, मूंगफली: नकदी फसलें

सिंचाई स्रोत: इंदिरा गांधी नहर परियोजना (IGNP) यहां की सबसे महत्वपूर्ण सिंचाई योजना है। इसके अतिरिक्त कुओं और तालाबों से भी सिंचाई होती है।

पशुपालन

नागौर पशुपालन के लिए प्रसिद्ध है। यहां:

  • नागौरी ऊंट: प्रसिद्ध नस्ल, जो कार्य क्षमता के लिए जानी जाती है
  • गायें और भैंसें: दूध उत्पादन के लिए
  • भेड़ और बकरियां: ऊन और मांस के लिए

उद्योग

नागौर में औद्योगिक विकास अभी अपेक्षाकृत कम है। कुछ छोटे-मझोले उद्योग हैं:

  • खस्ता बिस्कुट निर्माण
  • डेयरी उद्योग
  • सूती वस्त्र प्रसंस्करण
  • खनिज आधारित उद्योग

खनिज संपदा

नागौर में सीमित खनिज संसाधन हैं:

  • फेल्सपार: पश्चिमी क्षेत्र में
  • अभ्रक: सीमित मात्रा में
  • संगमरमर: निर्माण सामग्री के लिए

प्रसिद्ध स्थल, मेले और संस्कृति (Prasiddh Sthal)

मंदिर

ब्रह्मा मंदिर (नागौर शहर): सदियों पुराना मंदिर जो ब्रह्मा को समर्पित है। प्रतिवर्ष भक्तों का भारी आगमन होता है।

अचलेश्वर मंदिर: माउंट अरावली पर स्थित, शिव को समर्पित।

हरिराय मंदिर: जैन मंदिर, प्राचीन स्थापत्य का नमूना।

मेले और त्योहार

नागौर मेला: नवंबर-दिसंबर में आयोजित, यह मेला पशु क्रय-विक्रय के लिए प्रसिद्ध है। हजारों किसान और व्यापारी भाग लेते हैं। ऊंटों, घोड़ों, गधों का भारी कारोबार होता है (https://nagar.rajasthan.gov.in)।

तीज, दिवाली, होली: ये त्योहार परंपरागत तरीके से मनाए जाते हैं।

लोक संस्कृति

लोक गीत: घूमर, कालबेलिया, तेराताली नृत्य प्रचलित हैं।

शिल्पकला: मिट्टी के खिलौने, लकड़ी की नक्काशी, और कलात्मक वस्तुएं बनती हैं।


प्रशासनिक विभाजन (Prashasanik)

नागौर जिला 5 तहसीलों में विभाजित है:

  1. नागौर तहसील - मुख्यालय
  2. मेड़ता तहसील
  3. डेगाना तहसील
  4. खीमसर तहसील
  5. परबतसर तहसील

नागौर जिले में कुल विधानसभा क्षेत्र: 5

जिले की कुल जनसंख्या (2011 जनगणना): लगभग 19 लाख


RAS Prelims प्रश्न (5 MCQs)

प्रश्न 1

नागौर जिले को अलग जिले का दर्जा कब दिया गया?

(A) 1956
(B) 1968
(C) 1974
(D) 1982

उत्तर: (C) 1974

व्याख्या: राजस्थान पुनर्गठन के बाद, नागौर को 16 मई 1974 को पाली जिले से अलग करके एक स्वतंत्र जिले का दर्जा दिया गया। यह जिला निर्माण का एक महत्वपूर्ण संस्मरण है।


प्रश्न 2

नागौर जिले की मुख्य सिंचाई परियोजना कौन सी है?

(A) चंबल परियोजना
(B) इंदिरा गांधी नहर परियोजना
(C) भीमलत परियोजना
(D) माही बजाज सागर परियोजना

उत्तर: (B) इंदिरा गांधी नहर परियोजना

व्याख्या: इंदिरा गांधी नहर परियोजना राजस्थान की सबसे बड़ी सिंचाई परियोजना है जो सतलज-व्यास से जल लाती है। नागौर इसकी सीमा में आता है और कृषि के लिए पर्याप्त जल प्रदान करता है।


प्रश्न 3

नागौर किला किस शताब्दी में निर्मित हुआ?

(A) 10वीं शताब्दी
(B) 11वीं शताब्दी
(C) 12वीं शताब्दी
(D) 13वीं शताब्दी

उत्तर: (C) 12वीं शताब्दी

व्याख्या: नागौर किला 12वीं शताब्दी में निर्मित हुआ। इसकी चतुर्भुज संरचना और मजबूत दीवारें इसे मध्यकालीन सैन्य स्थापत्य का उत्कृष्ट उदाहरण बनाती हैं। अकबर ने 1570 में इसे मुगल नियंत्रण में लिया।


प्रश्न 4

नागौरी ऊंट के लिए नागौर जिला किसलिए प्रसिद्ध है?

(A) दूध उत्पादन
(B) कार्य क्षमता और शारीरिक संरचना
(C) ऊन उत्पादन
(D) गति और दौड़ के लिए

उत्तर: (B) कार्य क्षमता और शारीरिक संरचना

व्याख्या: नागौरी ऊंट राजस्थान की एक प्रसिद्ध नस्ल है जो भारी सामान ढोने की क्षमता और सहनशीलता के लिए जानी जाती है। य

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Reading is not enough — practice questions to remember what you just read.

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