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पाली जिला — RAS GK प्रोफाइल, इतिहास, भूगोल, जनसांख्यिकी

Raj Study Team··5 min read

पाली जिला मेवाड़ राज्य का सीमावर्ती भाग रहा है, जहाँ गुहिल वंश के राजाओं ने सदियों तक शासन किया। 11वीं-13वीं शताब्दी में पाली क्षेत्र के किले और गढ़ मुस्लिम आक्रांताओं के विरुद्ध मेवाड़ की प्रथम पंक्ति बनकर कार्य करते थे।

पाली जिला: राजस्थान की सांस्कृतिक धरोहर

पूर्व प्रश्न संदर्भ

RAS Prelims 2016 में पूछा गया था: "पाली जिले का मुख्यालय कौन-सा है?" (उत्तर: पाली नगर)। यह प्रश्न जिले की प्रशासनिक संरचना की बुनियादी समझ परीक्षा में कितनी महत्वपूर्ण है, यह दर्शाता है।

ऐतिहास: मेवाड़ की रक्षा पंक्ति

पाली जिला मेवाड़ राज्य का सीमावर्ती भाग रहा है, जहाँ गुहिल वंश के राजाओं ने सदियों तक शासन किया। 11वीं-13वीं शताब्दी में पाली क्षेत्र के किले और गढ़ मुस्लिम आक्रांताओं के विरुद्ध मेवाड़ की प्रथम पंक्ति बनकर कार्य करते थे।

महाराणा कुम्भा (1433-1468) के काल में पाली के किलों का पुनर्निर्माण हुआ। सुमेरपुर का किला इसी युग की स्थापत्य उत्कृष्टता का प्रमाण है। अकबर के काल में पाली मुगल साम्राज्य के अधीन आया, किंतु मेवाड़ के शासकों ने यहाँ अपना सांस्कृतिक प्रभाव बनाए रखा।

1818 में पाली ब्रिटिश संरक्षण में आया। स्वतंत्रता संग्राम में पाली के जनमानस में क्रांतिकारी चेतना जागी। 1949 में भारतीय संघ में शामिल होने के बाद 1974 में पाली को अलग जिले का दर्जा दिया गया। इसके पहले यह सिरोही जिले का अंग था।

भूगोल: धरती और जलवायु

अवस्थिति: पाली जिला राजस्थान के दक्षिण-पश्चिमी भाग में 24°49' से 25°59' उत्तरी अक्षांश और 72°53' से 73°49' पूर्वी देशांतर में विस्तृत है। इसका कुल क्षेत्रफल 12,387 वर्ग किलोमीटर है।

नदियाँ: बनास नदी पाली की जीवनरेखा है, जो अरावली से निकलकर पूर्वोत्तर दिशा में प्रवाहित होती है। सुकड़ी नदी (पश्चिमी बनास) पश्चिमी भाग में बहती है और जालौर जिले में लीलरी में विलीन होती है। लूनी नदी दक्षिणी सीमा पर प्रवाहित होती है। ये नदियाँ कृषि सिंचाई के लिए महत्वपूर्ण हैं।

किले और दुर्ग:

  • सुमेरपुर का किला: मेडता तहसील में स्थित, महाराणा कुम्भा द्वारा 15वीं शताब्दी में निर्मित। इसकी वास्तुकला मालवा और मेवाड़ शैलियों का मिश्रण है।
  • आसींद का किला: अरणोद तहसील में, राव सुल्तानसिंह द्वारा निर्मित।
  • भीमलत की गुफाएँ: दक्षिणी पाली में, प्राचीन बौद्ध काल की गुफाएँ।

पहाड़ी दर्रे: मेवाड़-मालवा सीमा पर अरावली पर्वतमाला के कई दर्रे हैं जो ऐतिहासिक रूप से व्यापार मार्ग थे।

आर्थिक प्रोफाइल

पाली की अर्थव्यवस्था मुख्यतः कृषि पर आश्रित है। यहाँ 68% जनसंख्या कृषि में संलग्न है।

कृषि उत्पाद: तिलहन (मूँगफली, सोयाबीन), दालें (मूँग, उड़द), बाजरा और जवार प्रमुख फसलें हैं। पाली राजस्थान का तिलहन उत्पादन केंद्र है, विशेषकर सोयाबीन के लिए प्रसिद्ध है।

पशुपालन: पाली में गौपालन और ऊन उत्पादन परंपरागत रूप से महत्वपूर्ण रहा है। मारवाड़ के मेहणों की भेड़ें प्रसिद्ध हैं, जिनके ऊन से कपड़े बनाए जाते हैं।

उद्योग:

  • वस्त्र उद्योग: पाली के हाथ से बुने गए वस्त्र (खेस, मोठड़ा) प्रसिद्ध हैं।
  • मिर्च प्रसंस्करण: सिमार तहसील में लाल मिर्च की खेती और प्रसंस्करण मुख्य आजीविका स्रोत है।
  • खनिज: कुछ क्षेत्रों में संगमरमर, बालुका पत्थर का उत्खनन होता है।

आधुनिक विकास: पाली मेवाड़ सिमेंट वर्क्स यहाँ का बड़ा औद्योगिक प्रतिष्ठान है। पाली-मरवाड़ सड़क परियोजना से जिले को आर्थिक गति मिली है।

प्रसिद्ध स्थल: धर्म, संस्कृति और परंपरा

धार्मिक केंद्र:

रणकपुर जैन मंदिर: पाली की भूमि पर स्थित विश्व प्रसिद्ध रणकपुर का चतुर्मुखी जैन मंदिर 15वीं शताब्दी की अद्भुत वास्तुकला का उदाहरण है। 1440 ईस्वी में धनाढ्य धरणक द्वारा निर्मित, इसमें 1,444 स्तंभ हैं, प्रत्येक अलग नक्काशीदार। केंद्रीय गर्भगृह में भगवान आदिनाथ की प्रतिमा स्थापित है। यह मंदिर भारतीय वास्तुकला का मणि माना जाता है।

घाणेराव का तालाब: एक प्राचीन जल निकाय जहाँ हजारों साल से सांझी पूजा होती है, विशेषकर महिलाएँ नवरात्रि में इसकी परिक्रमा करती हैं।

सोमनाथ मंदिर, सुमेरपुर: महाकाली का मंदिर, जहाँ नवरात्रि में विशाल मेला लगता है।

लोक संस्कृति:

पाली की लोक संस्कृति मारवाड़ी संस्कृति से गहराई से जुड़ी है। यहाँ घूमर, गीदड़, नृत्य नाटिका और ढोलक-मंजीरे का सांस्कृतिक महत्व है। खेस (पारंपरिक शॉल) पाली की पहचान है।

पशु मेले:

मलिनाथ पशु मेला (भिनाय गाँव, सिमार तहसील): यह मेला जनवरी-फरवरी में लगता है और गायों, ऊँटों, घोड़ों का विशाल क्रय-विक्रय केंद्र है। हजारों व्यापारी यहाँ आते हैं।

परंपरागत कला: पाली के कारीगर राजस्थान के सबसे कुशल बुनकर माने जाते हैं। हाथों से बुने गए साड़ियों में सांझी का पैटर्न प्रसिद्ध है।

प्रशासनिक ढाँचा

पाली जिले का मुख्यालय पाली नगर है। जिले को 11 तहसीलों में विभाजित किया गया है:

  1. पाली तहसील (मुख्यालय)
  2. मेडता तहसील
  3. रणपुर तहसील
  4. सिमार तहसील
  5. आसींद तहसील
  6. अरणोद तहसील
  7. भीमलत तहसील
  8. जैतारण तहसील
  9. डेगाना तहसील
  10. भिनाय तहसील
  11. सूंधामाता तहसील

राजस्थान सरकार के अनुसार, पाली जिला 35 गाँव पंचायतों और 2 नगरपालिकाओं (पाली और सुमेरपुर) से गठित है। जिले की कुल जनसंख्या 2011 की जनगणना के अनुसार 16,74,149 है।

पुलिस और विकास प्रशासन: पाली में 4 विकास खण्ड हैं और पुलिस जिले को कानून-व्यवस्था के लिए 3 पुलिस रेंज में विभाजित किया गया है।


RAS Prelims के लिए 5 महत्वपूर्ण MCQ

Q1. पाली जिले का कौन-सा प्राचीन किला महाराणा कुम्भा द्वारा 15वीं शताब्दी में निर्मित था?

(A) आसींद का किला (B) सुमेरपुर का किला (C) घाणेराव का किला (D) भिनाय का किला

उत्तर: (B) सुमेरपुर का किला व्याख्या: सुमेरपुर का किला मेडता तहसील में स्थित है और महाराणा कुम्भा (1433-1468) के काल में निर्मित था। यह किला मालवा और मेवाड़ शैलियों का मिश्रण है। आसींद का किला राव सुल्तानसिंह द्वारा निर्मित था।

Q2. रणकपुर जैन मंदिर किस भगवान को समर्पित है?

(A) महावीर स्वामी (B) आदिनाथ (ऋषभदेव) (C) पार्श्वनाथ (D) वर्धमान

उत्तर: (B) आदिनाथ (ऋषभदेव) व्याख्या: रणकपुर का चतुर्मुखी जैन मंदिर भगवान आदिनाथ को समर्पित है। इसका निर्माण 1440 ईस्वी में धनाढ्य धरणक ने करवाया था। इसमें 1,444 स्तंभ हैं, जो भारतीय वास्तुकला का उत्कृष्ट नमूना हैं।

Q3. पाली जिले को अलग जिले का दर्जा कब मिला?

(A) 1949 (B) 1962 (C) 1974 (D) 1982

उत्तर: (C) 1974 व्याख्या: पाली को 1974 में अलग जिले का दर्जा दिया गया। इससे पहले यह सिरोही जिले का अंग था। 1949 में भारतीय संघन में शामिल होने के बाद, 25 वर्षों में इसे स्वतंत्र जिले के रूप में स्थापित किया गया।

Q4. पाली जिले की कौन-सी नदी अरणोद क्षेत्र में प्रवाहित होकर जालौर में विलीन होती है?

(A) बनास नदी (B) सुकड़ी नदी (C) लूनी नदी (D) घाणेराव नदी

उत्तर: (B) सुकड़ी नद

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