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राजस्थान के लोक देवता और पंच पीर

Folk Deities and Panch Peer of Rajasthan

14 मिनटintermediate· History, Art, Culture, Literature, Tradition & Heritage of Rajasthan

परिचय

राजस्थान की लोक संस्कृति में लोक देवताओं का विशेष महत्व है। पंच पीर — पाँच प्रमुख लोक देवता।

पंच पीर

रामदेवजी (बाबा रामदेव): रुणिचा (जैसलमेर), मुस्लिम रामसा पीर कहते हैं, तेरहताली नृत्य। गोगाजी (गोगा पीर): ददरेवा (चूरू), सर्पों के देवता, गोगामेड़ी (हनुमानगढ़)। पाबूजी: कोलू (जोधपुर), ऊँटों के रक्षक, पाबूजी की फड़ (रावणहत्था)। हड़बूजी: भूंडोल (नागौर)। मेहाजी मांगलिया: बापणी (जोधपुर)।

प्रमुख लोक देवियाँ

करणी माता (देशनोक, बीकानेर — चूहों का मंदिर), जीण माता (सीकर), शीतला माता (चाकसू, जयपुर), कैला देवी (करौली)।

RAS Prelims में महत्व

पंच पीर के नाम-स्थान, प्रमुख लोक देवियाँ, तेरहताली नृत्य और फड़ वाचन परीक्षा में महत्वपूर्ण हैं।

इस टॉपिक को पूरा करने के बाद मार्क करें — सिलेबस प्रगति में जुड़ जाएगा।

अभ्यास प्रश्न

इस टॉपिक से 5 प्रश्न — उत्तर देखने के लिए विकल्प पर क्लिक करें।

1

बिजोलिया के किसानों पर कितने तरह के टैक्स (लाग) लगाए जाते थे?

2

राठौड़ मूल रूप से किस क्षेत्र से थे?

3

वतन जागीर की खासियतें ये थीं:

4

अजमेर में अढ़ाई दिन का झोपड़ा मूल रूप से था:

5

'सवाई' (सवा) टाइटल का सबसे पहले इस्तेमाल किसने किया था?

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