18 अप्रैल 2026 · 18 April 2026राष्ट्रीय
महिला आरक्षण विधेयक पराजित: संविधान सभा में विरोध करने वाली महिला सदस्यों पर एक नज़र
Women's Reservation Bill Defeated: Revisiting Women Members Who Opposed It in Constituent Assembly
संविधान सभा की बहसों (1946–1949) के दौरान, कई प्रमुख महिला सदस्यों ने विधायिकाओं में महिलाओं के लिए आरक्षित सीटों के विचार का सक्रिय रूप से विरोध किया। प्रमुख नामों में हंसा मेहता (बॉम्बे प्रतिनिधि) और रेणुका रे (बंगाल) शामिल थीं, जो स्वयं अनुभवी कार्यकर्ता और विधायक थीं।
मौलिक अधिकार उप-समिति की सदस्य हंसा मेहता ने तर्क दिया कि आरक्षण महिलाओं को समान नागरिक मानने के बजाय उन्हें एक अलग और कमतर वर्ग के रूप में देखेगा। उन्होंने सार्वभौमिक वयस्क मताधिकार को वास्तविक समानता का माध्यम बताया। रेणुका रे ने भी कहा कि आरक्षित सीटें महिलाओं को राजनीति में अलग-थलग कर देंगी।
संविधान सभा में कुल 299 सदस्यों में से केवल 15 महिला सदस्य थीं, जिन्होंने सुरक्षात्मक भेदभाव की बजाय समान अधिकारों का समर्थन किया। उनका मानना था कि सार्वभौमिक मताधिकार स्वाभाविक रूप से महिलाओं को राजनीति में लाएगा।
यह ऐतिहासिक संदर्भ RAS परीक्षार्थियों के लिए महत्वपूर्ण है क्योंकि यह भारत में महिला राजनीतिक आरक्षण की बहस, 108वें संविधान संशोधन विधेयक और अंततः संविधान (106वां संशोधन) अधिनियम, 2023 को समझने में सहायक है, जो लोकसभा, राज्य विधानसभाओं और दिल्ली विधानसभा में महिलाओं के लिए एक-तिहाई सीटें आरक्षित करता है।
✨ RajAI— RAS Prelims Expert