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14 अप्रैल 2026 · 14 April 2026राष्ट्रीय

चुनावी राज्यों में UCC बहस फिर उठी: संविधान सभा में अंबेडकर के विचारों की पुनर्समीक्षा

UCC Debate Resurfaces in Poll-Bound States: Ambedkar's Constituent Assembly Views Revisited

समान नागरिक संहिता (UCC), जो भारतीय संविधान के अनुच्छेद 44 के तहत राज्य नीति के निदेशक तत्व (DPSP) के रूप में निहित है, पश्चिम बंगाल और असम जैसे चुनावी राज्यों में एक प्रमुख राजनीतिक मुद्दे के रूप में फिर उभरी है। उत्तराखंड 2024 में UCC कानून लागू करने वाला पहला राज्य बना। संविधान के प्रमुख निर्माता डॉ. बी.आर. अंबेडकर ने संविधान सभा की बहसों (1946–1949) के दौरान UCC पर विचार रखे। उन्होंने तर्क दिया कि राष्ट्रीय एकीकरण और धार्मिक समुदायों में महिलाओं के समान अधिकार सुनिश्चित करने के लिए एक समान नागरिक संहिता वांछनीय है। हालांकि, उन्होंने इस मुद्दे की संवेदनशीलता को स्वीकार करते हुए सुझाया कि UCC शुरुआत में अनिवार्य नहीं बल्कि स्वैच्छिक होनी चाहिए। अंबेडकर ने विवाह, तलाक, उत्तराधिकार और दत्तक ग्रहण से संबंधित व्यक्तिगत कानूनों की महिलाओं के प्रति भेदभावपूर्ण प्रकृति की आलोचना की। उन्होंने UCC को इन असमानताओं को समाप्त करने का साधन माना। अनुच्छेद 44 को DPSP में रखा गया, जो इसे गैर-न्यायसंगत लेकिन राज्य के लिए मार्गदर्शक सिद्धांत बनाता है। भाजपा ने UCC को अपने राजनीतिक एजेंडे के रूप में लगातार समर्थन दिया है। सर्वोच्च न्यायालय ने शाह बानो मामले (1985) और सरला मुद्गल मामले (1995) सहित कई निर्णयों में संसद से UCC लागू करने का आग्रह किया है।
✨ RajAI— RAS Prelims Expert

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