राजस्थान के प्रमुख मेले एवं त्योहार
- 1
पुष्कर मेला: कार्तिक पूर्णिमा (अक्टूबर-नवंबर); विश्व का सबसे बड़ा ऊंट मेला; ब्रह्मा मंदिर में स्नान।
- 2
मल्लीनाथ पशु मेला: चैत्र माह; तिलवाड़ा गाँव (बालोतरा, पहले बाड़मेर); थारपारकर व कांकरेज नस्ल के पशुओं के लिए प्रसिद्ध, राज्य के प्राचीन पशु मेलों में।
- 3
बाणगंगा मेला (बैराठ/विराटनगर): वैशाख पूर्णिमा; मान्यता — अर्जुन के बाण से निकली गंगा।
- 4
चंद्रभागा मेला (झालरापाटन, झालावाड़): कार्तिक पूर्णिमा; चंद्रभागा नदी में स्नान और पशु मेला।
- 5
रामदेव जी मेला (रामदेवरा, जैसलमेर): भाद्रपद शुक्ल द्वितीया से एकादशी; हिंदू-मुस्लिम दोनों की आस्था — सांप्रदायिक सद्भाव का प्रतीक।
- 6
गोगामेड़ी मेला (हनुमानगढ़): भाद्रपद माह; गोगाजी (जाहरवीर) की स्मृति में।
- 7
बेणेश्वर मेला (डूंगरपुर): माघ पूर्णिमा; तीन नदियों का संगम — "आदिवासियों का कुंभ"।
- 8
तेजाजी मेला (परबतसर, नागौर): भाद्रपद शुक्ल दशमी; सांप काटने वाले के देवता।
- 9
डेजर्ट फेस्टिवल (जैसलमेर): सरकारी पर्यटन उत्सव; ऊंट दौड़, लोकनृत्य, मिस मूमल प्रतियोगिता।
- 10
तीज: श्रावण शुक्ल तृतीया; जयपुर में भव्य शोभायात्रा; हरे-पीले कपड़े और मेहंदी।
अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न
विश्व का सबसे बड़ा ऊंट मेला कौन सा है?+
पुष्कर मेला विश्व का सबसे बड़ा ऊंट मेला है, जो कार्तिक पूर्णिमा पर लगता है।
मल्लीनाथ पशु मेला कहाँ लगता है?+
मल्लीनाथ पशु मेला चैत्र माह में तिलवाड़ा गाँव (बालोतरा, पहले बाड़मेर जिला) में लूणी नदी के किनारे लगता है; यह थारपारकर व कांकरेज नस्लों के लिए प्रसिद्ध है।
बेणेश्वर मेले को "आदिवासियों का कुंभ" क्यों कहा जाता है?+
डूंगरपुर का बेणेश्वर मेला तीन नदियों के संगम पर माघ पूर्णिमा को लगता है और इसे "आदिवासियों का कुंभ" कहा जाता है।