राजस्थान की जलवायु एवं मानसून
राजस्थान की जलवायु शुष्क थार मरुस्थल से लेकर अपेक्षाकृत आर्द्र माउंट आबू तक फैली है, जो इसे भारत के सबसे विविध जलवायु-प्रदेशों में से एक बनाती है। यह पेज मानसून की दोनों शाखाओं, मावठ और तापमान की चरम-सीमाओं को REET Mains स्तर पर समझाता है।
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REET Mains में यह टॉपिक कैसे पूछा जाता है
इस टॉपिक-सेट के लिए अभी तक कोई सत्यापित पिछले वर्ष का REET Mains प्रश्न उपलब्ध नहीं है, इसलिए हम स्पष्ट रूप से बता रहे हैं कि यहाँ दी गई जानकारी RSSB के आधिकारिक पाठ्यक्रम और मानक भूगोल संदर्भों पर आधारित है। जलवायु का टॉपिक लगभग हर राजस्थान-केंद्रित परीक्षा में पूछा जाता है, और प्रश्नों का पैटर्न सामान्यतः तीन तरह का होता है — (1) किसी स्थान की सर्वाधिक/न्यूनतम वर्षा या तापमान से जुड़ा तथ्य, (2) मानसून की किस शाखा से किस क्षेत्र को वर्षा मिलती है, और (3) 'मावठ' या 'लू' जैसे स्थानीय पारिभाषिक शब्दों की परिभाषा।
कोपेन वर्गीकरण और जलवायु प्रदेश
कोपेन जलवायु वर्गीकरण के अनुसार पश्चिमी राजस्थान का थार मरुस्थल क्षेत्र (जैसलमेर, बीकानेर, फलोदी, चूरू, श्रीगंगानगर, हनुमानगढ़ के आसपास) 'BWhw' श्रेणी में आता है, जो शुष्क उष्ण मरुस्थलीय जलवायु को दर्शाता है — यहाँ बहुत कम वर्षा और अत्यधिक तापांतर (दिन-रात व गर्मी-सर्दी के बीच बड़ा तापमान अंतर) पाया जाता है। अरावली पर्वतमाला राजस्थान को जलवायु की दृष्टि से लगभग दो भागों में बाँटती है — अरावली के पश्चिम में शुष्क व अर्ध-शुष्क क्षेत्र, और पूर्व में अपेक्षाकृत अधिक वर्षा वाला उप-आर्द्र क्षेत्र।
माउंट आबू (सिरोही ज़िला), जो अरावली की सबसे ऊँची चोटी गुरु शिखर का घर है, राज्य में सर्वाधिक वर्षा वाला स्थान माना जाता है — यहाँ की जलवायु राज्य के शेष भाग से अलग, अपेक्षाकृत ठंडी व आर्द्र है। इसके विपरीत जैसलमेर क्षेत्र (विशेषकर सम के आसपास का इलाका) राज्य में सबसे कम वर्षा प्राप्त करता है और 10 सेमी वार्षिक वर्षा रेखा (isohyet) के निकट माना जाता है।
मानसून की दो शाखाएँ
राजस्थान को अपनी लगभग 90% वार्षिक वर्षा जून-सितंबर के दक्षिण-पश्चिम मानसून काल में मिलती है, जो दो शाखाओं से आती है। अरब सागरीय शाखा अरावली पर्वतमाला के लगभग समानांतर बहती है (क्योंकि अरावली की दिशा दक्षिण-पश्चिम से उत्तर-पूर्व है), इसलिए यह पर्वत-अवरोध (orographic barrier) का पूरा लाभ नहीं उठा पाती और पश्चिमी राजस्थान को अपेक्षाकृत कम वर्षा देती है — इसे 'वृष्टि-छाया प्रभाव' (rain-shadow effect) जैसी स्थिति कहा जा सकता है। इसके विपरीत बंगाल की खाड़ी शाखा पूर्वी राजस्थान (विशेषकर दक्षिण-पूर्वी हाड़ौती क्षेत्र — कोटा, बूंदी, झालावाड़, बारां) को अधिक वर्षा देती है, क्योंकि यह मध्य भारत से होते हुए प्रवेश करती है।
इसी कारण राजस्थान में वर्षा का सामान्य क्रम है: दक्षिण-पूर्वी राजस्थान (सर्वाधिक वर्षा वाला मैदानी भाग) > पूर्वी राजस्थान > पश्चिमी राजस्थान (न्यूनतम वर्षा, थार मरुस्थल)। अरावली की पहाड़ियों में स्थित माउंट आबू इस सामान्य क्रम का अपवाद है क्योंकि वहाँ ऊँचाई के कारण अतिरिक्त वर्षा होती है।
जलवायु से जुड़े स्थानीय पारिभाषिक शब्द
- मावठ (मावट)
- दिसंबर-मार्च के बीच पश्चिमी विक्षोभ (Mediterranean/western disturbance) के कारण होने वाली शीतकालीन वर्षा, जो रबी फसलों (गेहूँ, सरसों, चना) के लिए बेहद लाभदायक मानी जाती है — किसान इसे 'रबी की जीवनदायिनी वर्षा' कहते हैं।
- लू
- अप्रैल-जून के गर्मी के महीनों में पश्चिमी व उत्तर-पश्चिमी राजस्थान में चलने वाली अत्यंत गर्म व शुष्क हवाएँ, जो लू लगने (heat-stroke) का प्रमुख कारण बनती हैं।
- वृष्टि-छाया प्रभाव (rain-shadow)
- अरब सागरीय मानसून शाखा के अरावली के समानांतर बहने के कारण पश्चिमी राजस्थान को पर्याप्त वर्षा न मिल पाने की स्थिति।
तापमान और मौसम
राजस्थान में सामान्यतः तीन प्रमुख ऋतुएँ मानी जाती हैं — ग्रीष्म ऋतु (मार्च-जून), वर्षा/मानसून ऋतु (जुलाई-सितंबर) और शीत ऋतु (अक्टूबर-फरवरी)। पश्चिमी मरुस्थलीय ज़िलों में ग्रीष्म ऋतु में तापमान बहुत अधिक (अक्सर 45°C से ऊपर) पहुँच जाता है, जबकि शीत ऋतु में रात का तापमान काफी नीचे गिर सकता है — यानी दैनिक व मौसमी तापांतर दोनों अधिक होते हैं। चूरू व श्रीगंगानगर क्षेत्र को अक्सर अपने चरम तापमान (अत्यधिक गर्मी व अत्यधिक सर्दी दोनों) के लिए उदाहरण के रूप में लिया जाता है। रेतीली मिट्टी दिन में तेज़ी से गर्म व रात में तेज़ी से ठंडी होती है, इसलिए मरुस्थलीय क्षेत्रों में दैनिक तापांतर विशेष रूप से अधिक देखा जाता है।
मरुस्थलीकरण और इंदिरा गांधी नहर का प्रभाव
पश्चिमी राजस्थान का बड़ा हिस्सा मरुस्थलीकरण (desertification) की समस्या से जूझता रहा है — यानी समय के साथ उपजाऊ भूमि के रेतीली व अनुपजाऊ होते जाने की प्रक्रिया, जो अत्यधिक चराई, वनों की कटाई और अनियमित वर्षा जैसे कारणों से बढ़ती है। इसी समस्या से निपटने और थार क्षेत्र में सिंचाई सुविधा पहुँचाने के उद्देश्य से इंदिरा गांधी नहर (पहले राजस्थान नहर के नाम से जानी जाती थी) का निर्माण किया गया, जो पंजाब के हरिके बैराज से जल लेकर श्रीगंगानगर, बीकानेर व जैसलमेर जैसे ज़िलों तक पहुँचती है। इस नहर ने पश्चिमी राजस्थान के कृषि-परिदृश्य को काफी हद तक बदल दिया है — जो क्षेत्र पहले केवल पशुपालन व वर्षा-आधारित खेती तक सीमित था, वहाँ अब सिंचित खेती संभव हुई है, हालाँकि इससे स्थानीय जल-प्रबंधन व मृदा-लवणता (soil salinity) से जुड़ी नई चुनौतियाँ भी सामने आई हैं।
जलवायु-भूगोल की दृष्टि से राजस्थान को मोटे तौर पर चार उप-प्रदेशों में बाँटा जा सकता है — पश्चिमी शुष्क मरुस्थलीय प्रदेश (थार), उत्तरी-पूर्वी अर्ध-शुष्क मैदानी प्रदेश, दक्षिण-पूर्वी अपेक्षाकृत आर्द्र हाड़ौती पठारी प्रदेश, और दक्षिणी अरावली पर्वतीय प्रदेश (जहाँ माउंट आबू जैसा अपवाद-स्वरूप आर्द्र क्षेत्र भी शामिल है)। REET Mains में यह चतुर्भागीय वर्गीकरण संक्षेप में समझना उपयोगी रहता है, क्योंकि यह जलवायु, मिट्टी व वनस्पति — तीनों टॉपिक को आपस में जोड़ता है।
REET Mains में इसका महत्व
जलवायु का टॉपिक भूगोल-आधारित तथ्यों पर टिका है, इसलिए इसमें मानचित्र-बोध बहुत मदद करता है — 'कौन-सी दिशा में क्या' यह समझना रटने से ज़्यादा कारगर है। सबसे आम गलती है अरब सागरीय व बंगाल की खाड़ी शाखा को उलट देना — याद रखें, बंगाल की खाड़ी शाखा राजस्थान के लिए अधिक असरदार है (पूर्वी/दक्षिण-पूर्वी भाग को अधिक वर्षा), जबकि अरब सागरीय शाखा अरावली के समानांतर बहने के कारण कम प्रभावी रहती है — यह आम जनधारणा (कि अरब सागर पास होने से ज़्यादा वर्षा मिलनी चाहिए) के विपरीत है, और इसी विरोधाभास पर परीक्षा में प्रश्न बनाए जाते हैं।
याद रखने की ट्रिक
'समानांतर मतलब सूखा' — याद रखें कि जब हवा किसी पर्वत श्रेणी के समानांतर बहती है (जैसे अरब सागरीय शाखा अरावली के समानांतर), तो पर्वत-अवरोध का फायदा नहीं मिलता और वर्षा कम होती है। इसके उलट जब हवा पर्वत से टकराती है (जैसे बंगाल की खाड़ी शाखा हाड़ौती की पहाड़ियों से), वर्षा अधिक होती है। यही एक सिद्धांत राजस्थान की पूरी वर्षा-वितरण व्यवस्था समझा देता है।
अभ्यास प्रश्न
प्रश्न 1
थार मरुस्थल क्षेत्र की जलवायु कोपेन वर्गीकरण के अनुसार किस श्रेणी में आती है?
- AAw
- BBWhw
- CCfa
- DDfb
व्याख्या
थार मरुस्थल क्षेत्र कोपेन वर्गीकरण में 'BWhw' (शुष्क उष्ण मरुस्थलीय) श्रेणी में आता है।
प्रश्न 2
राजस्थान में सर्वाधिक वार्षिक वर्षा किस स्थान पर होती है?
- Aजैसलमेर
- Bबीकानेर
- Cमाउंट आबू
- Dचूरू
व्याख्या
सिरोही ज़िले में स्थित माउंट आबू राजस्थान में सर्वाधिक वार्षिक वर्षा वाला स्थान माना जाता है, क्योंकि यह अरावली की ऊँची पहाड़ियों पर स्थित है।
प्रश्न 3
'मावठ' किस मौसम में होने वाली वर्षा को कहते हैं?
- Aगर्मी (अप्रैल-जून)
- Bमानसून (जुलाई-सितंबर)
- Cशीत ऋतु (दिसंबर-मार्च)
- Dपूरे साल समान रूप से
व्याख्या
मावठ दिसंबर-मार्च के बीच पश्चिमी विक्षोभ के कारण होने वाली शीतकालीन वर्षा है, जो रबी फसलों के लिए लाभदायक मानी जाती है।
प्रश्न 4
पश्चिमी राजस्थान को अरब सागरीय मानसून शाखा से अपेक्षाकृत कम वर्षा मिलने का मुख्य कारण क्या है?
- Aयह शाखा राजस्थान तक पहुँचती ही नहीं
- Bयह शाखा अरावली पर्वतमाला के लगभग समानांतर बहती है
- Cयह शाखा केवल सर्दियों में सक्रिय रहती है
- Dपश्चिमी राजस्थान समुद्र से बहुत दूर है
व्याख्या
अरब सागरीय शाखा अरावली के लगभग समानांतर बहती है, इसलिए पर्वत-अवरोध का लाभ नहीं मिल पाता और नमी आगे बढ़ जाती है, जिससे पश्चिमी राजस्थान अपेक्षाकृत शुष्क रह जाता है।
प्रश्न 5
'लू' शब्द राजस्थान में किससे संबंधित है?
- Aशीतकालीन वर्षा से
- Bग्रीष्म ऋतु की गर्म-शुष्क हवाओं से
- Cमानसून की पहली बारिश से
- Dबर्फबारी से
व्याख्या
लू अप्रैल-जून के महीनों में पश्चिमी व उत्तर-पश्चिमी राजस्थान में चलने वाली अत्यंत गर्म-शुष्क हवाएँ हैं, जो हीट-स्ट्रोक का कारण बनती हैं।
प्रश्न 6
राजस्थान को अपनी अधिकांश (लगभग 90%) वार्षिक वर्षा किस काल में मिलती है?
- Aदिसंबर-फरवरी
- Bजून-सितंबर (दक्षिण-पश्चिम मानसून)
- Cमार्च-मई
- Dपूरे वर्ष समान रूप से
व्याख्या
राजस्थान को अपनी लगभग 90% वार्षिक वर्षा जून-सितंबर के दक्षिण-पश्चिम मानसून काल में मिलती है।
प्रश्न 7
राजस्थान का कौन-सा क्षेत्र बंगाल की खाड़ी मानसून शाखा से अपेक्षाकृत अधिक वर्षा पाता है?
- Aपश्चिमी राजस्थान (जैसलमेर-बाड़मेर)
- Bदक्षिण-पूर्वी राजस्थान (हाड़ौती क्षेत्र — कोटा, बूंदी, झालावाड़)
- Cउत्तरी राजस्थान (गंगानगर-हनुमानगढ़)
- Dसमस्त राजस्थान समान रूप से
व्याख्या
बंगाल की खाड़ी शाखा मध्य भारत से होते हुए प्रवेश करती है और दक्षिण-पूर्वी राजस्थान (हाड़ौती क्षेत्र) को अपेक्षाकृत अधिक वर्षा देती है।
प्रश्न 8
एक शिक्षक कक्षा में 'मावठ' और 'मानसून वर्षा' के बीच अंतर समझाने के लिए सबसे उपयुक्त गतिविधि कौन-सी होगी?
- Aदोनों को एक ही परिभाषा में मिला देना
- Bछात्रों से स्थानीय किसानों से बात कर यह पता लगाने को कहना कि कौन-सी वर्षा किस फसल के लिए ज़रूरी है
- Cकेवल परिभाषा बोर्ड पर लिखकर रटवाना
- Dइस विषय को कक्षा में न पढ़ाना
व्याख्या
स्थानीय संदर्भ (किसानों से बातचीत, फसल-चक्र से जोड़ना) अनुभव-आधारित सीखने को बढ़ावा देता है और अवधारणा को स्थायी रूप से स्पष्ट करता है, जबकि रटना अल्पकालिक याद तक सीमित रहता है।
प्रश्न 9
अरावली पर्वतमाला राजस्थान की जलवायु को किस प्रकार प्रभावित करती है?
- Aयह राज्य को उत्तर-दक्षिण में शुष्क-आर्द्र भागों में बाँटती है
- Bयह राज्य को लगभग पूर्व-पश्चिम में शुष्क (पश्चिम) व अपेक्षाकृत आर्द्र (पूर्व) भागों में बाँटती है
- Cइसका जलवायु पर कोई प्रभाव नहीं है
- Dयह केवल तापमान को प्रभावित करती है, वर्षा को नहीं
व्याख्या
अरावली पर्वतमाला राजस्थान को लगभग दो भागों में बाँटती है — पश्चिम में शुष्क/अर्ध-शुष्क क्षेत्र और पूर्व में अपेक्षाकृत अधिक वर्षा वाला उप-आर्द्र क्षेत्र।
प्रश्न 10
राजस्थान में सबसे कम वर्षा वाला क्षेत्र सामान्यतः किस दिशा में स्थित है?
- Aपूर्वोत्तर (भरतपुर-धौलपुर)
- Bदक्षिण-पूर्व (कोटा-बूंदी)
- Cपश्चिम (जैसलमेर के आसपास)
- Dदक्षिण (उदयपुर)
व्याख्या
पश्चिमी राजस्थान का जैसलमेर क्षेत्र (सम के आसपास) राज्य में सबसे कम वर्षा प्राप्त करता है और 10 सेमी वार्षिक वर्षा रेखा के निकट माना जाता है।
अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न
राजस्थान में सर्वाधिक वर्षा वाला स्थान कौन-सा है?+
माउंट आबू (सिरोही ज़िला) राज्य में सर्वाधिक वार्षिक वर्षा प्राप्त करने वाला स्थान माना जाता है।
मावठ क्या है और इसका महत्व क्या है?+
मावठ दिसंबर-मार्च के बीच पश्चिमी विक्षोभ से होने वाली शीतकालीन वर्षा है, जो गेहूँ, सरसों जैसी रबी फसलों के लिए बहुत फायदेमंद मानी जाती है।
पश्चिमी राजस्थान को अरब सागरीय शाखा से कम वर्षा क्यों मिलती है?+
क्योंकि यह शाखा अरावली पर्वतमाला के लगभग समानांतर बहती है, जिससे पर्वत-अवरोध का लाभ नहीं मिल पाता और नमी आगे बढ़ जाती है।
थार मरुस्थल की जलवायु को कोपेन वर्गीकरण में क्या कहा जाता है?+
थार मरुस्थल क्षेत्र कोपेन वर्गीकरण में 'BWhw' श्रेणी में आता है, जो शुष्क उष्ण मरुस्थलीय जलवायु दर्शाता है।
इंदिरा गांधी नहर का राजस्थान की जलवायु व कृषि पर क्या प्रभाव पड़ा है?+
इंदिरा गांधी नहर ने पश्चिमी राजस्थान (श्रीगंगानगर, बीकानेर, जैसलमेर) में सिंचाई सुविधा पहुँचाकर वर्षा-आधारित खेती को सिंचित खेती में बदलने में मदद की, हालाँकि इससे मृदा-लवणता जैसी नई चुनौतियाँ भी सामने आई हैं।
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आधिकारिक स्रोत
बदलाव लॉग
- 16 सितंबर 2026 — पेज प्रकाशित — तथ्य स्वतंत्र रूप से जाँचे गए