8 अगस्त 2026 · 8 August 2026⭐ परीक्षा में महत्वपूर्ण
भारत-चीन जलवायु लचीलापन के लिए सहयोग का मार्ग
A Climate Resilience Pathway Between India and China
साझा जलवायु कमजोरियां भारत-चीन के बीच भू-राजनीतिक तनाव के बावजूद व्यावहारिक सहयोग का द्वार खोल सकती हैं।
मुख्य तथ्य
- •हिंदू कुश हिमालय (HKH) क्षेत्र में हिमनद तेजी से पीछे हट रहे हैं, जिससे हिमनद झील प्रस्फोट बाढ़ (GLOFs) का खतरा बढ़ गया है।
- •भारत और चीन ने 2015 में पेरिस जलवायु सम्मेलन से पहले संयुक्त जलवायु घोषणा पर हस्ताक्षर किए थे।
- •रणनीतिक अविश्वास, सीमा तनाव और आर्थिक प्रतिस्पर्धा द्विपक्षीय सहयोग में बाधा डाल रही है।
सीमा तनाव और रणनीतिक अविश्वास के बावजूद, भारत और चीन कई साझा जलवायु चुनौतियों का सामना कर रहे हैं — हिंदू कुश हिमालय क्षेत्र में तेजी से पीछे हटते हिमनदों से लेकर, जिससे हिमनद झील प्रस्फोट बाढ़ (GLOF) का खतरा बढ़ रहा है, दोनों देशों में चरम गर्मी और बाढ़ की घटनाओं तक। अप्रैल 2026 में चीन के जलवायु परिवर्तन के लिए विशेष दूत की नई दिल्ली यात्रा ने यह रेखांकित किया कि व्यापक द्विपक्षीय तनाव के बावजूद जलवायु लचीलापन और आपदा प्रबंधन जैसे क्षेत्रों में सहयोग आगे बढ़ सकता है। दोनों देशों के पास इसका एक उदाहरण पहले से मौजूद है — 2015 में पेरिस जलवायु सम्मेलन से पहले हस्ताक्षरित संयुक्त जलवायु घोषणा, जिसमें नवीकरणीय ऊर्जा सहयोग और डेटा साझाकरण का समर्थन किया गया था।
🎯 परीक्षा में कैसे आएगा
जलवायु परिवर्तन को भारत-चीन संबंधों के नए आयाम के रूप में समझना और भू-राजनीतिक तनाव के बीच सहयोग की संभावनाएं।
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BASIC समूह (ब्राजील, दक्षिण अफ्रीका, भारत और चीन) जलवायु न्याय के लिए वैश्विक जलवायु वार्ता में समन्वय करता है।
✨ RajAI— RAS Prelims Expert