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राष्ट्रीय · कला-संस्कृति

ASI ने तमिलनाडु में स्थल उत्खनन को मंज़ूरी दी

20 मार्च 2026 · Raj Study संपादकीय टीम

याद रखें · एक पंक्ति में

ASI ने प्राचीन स्मारक व पुरातत्व स्थल नियम 1959 के तहत 8 स्थलों को मंज़ूरी दी; कीलाडी सहित।

क्या हुआ

ASI द्वारा तमिलनाडु में स्थल-उत्खनन को मंज़ूरी की चर्चा हुई। भारतीय पुरातत्व सर्वेक्षण (ASI, 1861; संस्थापक अलेक्ज़ेंडर कनिंघम) उत्खनन, संरक्षण व पुरातात्विक अनुसंधान का कार्य करता है। तमिलनाडु (विशेषकर कीलाडी/केझाडी — वैगई नदी घाटी) में उत्खनन ने एक प्राचीन शहरी, साक्षर संगम-कालीन सभ्यता (तमिल-ब्राह्मी लेख, मनके, ईंट संरचनाएँ) के प्रमाण दिए हैं, जिससे गंगा घाटी के समानांतर दक्षिण भारत में नगरीकरण की प्राचीनता पर बहस हुई है। नए उत्खनन (अदिचनल्लूर, शिवकलाई, कोरकई आदि) इस सभ्यतागत समझ को और गहरा करते हैं। यह प्राचीन भारतीय इतिहास, पुरातत्व व सांस्कृतिक विरासत से जुड़ा है। यह कला-संस्कृति से जुड़ा है।

मुख्य तथ्य

  1. 1ASI ने तमिलनाडु में स्थल-उत्खनन मंज़ूर किए।
  2. 2ASI — 1861; संस्थापक अलेक्ज़ेंडर कनिंघम।
  3. 3कीलाडी (वैगई घाटी) — संगम-कालीन शहरी सभ्यता।
  4. 4तमिल-ब्राह्मी लेख; मनके; ईंट संरचनाएँ।
  5. 5दक्षिण भारत में नगरीकरण की प्राचीनता।

परीक्षा में ऐसे पूछा जा सकता है

कीलाडी, तमिल-ब्राह्मी व ASI उत्खनन कला-संस्कृति में पूछे जाते हैं।

स्थायी GK: ASI — 1861; कनिंघम। तमिलनाडु — कीलाडी (वैगई घाटी); संगम-कालीन शहरी सभ्यता; तमिल-ब्राह्मी। अदिचनल्लूर, कोरकई।

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