30 मई 2026 · 30 May 2026विज्ञान⭐ परीक्षा में महत्वपूर्ण
चंद्रयान-2 को चंद्रमा पर उपसतही बर्फ के संकेत मिले
Chandrayaan-2 finds evidence of possible subsurface ice on the Moon
चंद्रयान-2 (2019) ऑर्बिटर का DFSAR — चंद्र दक्षिण ध्रुव पर बर्फ के संकेत।
मुख्य तथ्य
- •चंद्रयान-2 ऑर्बिटर के DFSAR रडार से उपसतह बर्फ के संकेत।
- •ध्रुवीय क्षेत्रों में जल-बर्फ; भविष्य के मिशनों हेतु संसाधन।
- •विक्रम लैंडर 2019 में विफल; ऑर्बिटर अब भी सक्रिय।
- •GSLV Mk-III से प्रक्षेपण; ISRO का मिशन।
- •चंद्रयान-3 ने 2023 में दक्षिणी ध्रुव के निकट लैंडिंग की।
चंद्रयान-2 ऑर्बिटर के आँकड़ों ने चंद्रमा के ध्रुवीय क्षेत्रों में उपसतह (subsurface) बर्फ के संभावित प्रमाण दिए। यह विश्लेषण ऑर्बिटर के ड्यूल-फ्रीक्वेंसी सिंथेटिक अपर्चर रडार (DFSAR) पर आधारित है। यद्यपि चंद्रयान-2 का विक्रम लैंडर 2019 में सॉफ्ट लैंडिंग में विफल रहा था, इसका ऑर्बिटर अब भी सक्रिय है। ध्रुवीय बर्फ भविष्य के मानव मिशनों के लिए जल, ऑक्सीजन व ईंधन का संभावित स्रोत हो सकती है।
🎯 परीक्षा में कैसे आएगा
इसरो के चंद्र मिशन, उनके पेलोड व निष्कर्ष विज्ञान-तकनीक में महत्वपूर्ण हैं।
📚 संबंधित स्थायी GK
चंद्रयान-2 — 2019, GSLV Mk-III से प्रक्षेपित; ऑर्बिटर सक्रिय। चंद्रयान-3 (2023) ने दक्षिणी ध्रुव के निकट सफल लैंडिंग की। ISRO मुख्यालय — बेंगलुरु।
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