SC/ST आरक्षण में क्रीमी लेयर
30 अप्रैल 2026 · Raj Study संपादकीय टीम
याद रखें · एक पंक्ति में
क्रीमी लेयर — इंदिरा साहनी (1992) में पेश; दविंदर सिंह (2024) — SC/ST में उप-वर्गीकरण की अनुमति।
क्या हुआ
अनुसूचित जाति/जनजाति (SC/ST) आरक्षण में 'क्रीमी लेयर' की अवधारणा पर बहस चर्चा में रही। क्रीमी लेयर का अर्थ है किसी आरक्षित वर्ग के भीतर के संपन्न/अग्रणी लोग जिन्हें आरक्षण लाभ से बाहर रखा जाए, ताकि लाभ सबसे वंचितों तक पहुँचे। यह अवधारणा मूलतः OBC के लिए इंद्रा साहनी वाद (1992) में लागू हुई थी। 2024 में सर्वोच्च न्यायालय (राज्य बनाम दविंदर सिंह) ने SC/ST के भीतर उप-वर्गीकरण की अनुमति दी और क्रीमी लेयर सिद्धांत SC/ST पर भी विचार योग्य बताया। यह सामाजिक न्याय व आरक्षण की प्रकृति से जुड़ी गहन बहस है।
मुख्य तथ्य
- 1SC/ST आरक्षण में 'क्रीमी लेयर' पर बहस।
- 2क्रीमी लेयर — आरक्षित वर्ग के संपन्न लोगों को बाहर रखना।
- 3मूल — इंद्रा साहनी वाद (1992, OBC)।
- 4SC/ST उप-वर्गीकरण — दविंदर सिंह वाद (2024)।
- 5आरक्षण — अनुच्छेद 15(4), 16(4), 335।
परीक्षा में ऐसे पूछा जा सकता है
क्रीमी लेयर, इंदिरा साहनी, दविंदर सिंह केस व उप-वर्गीकरण राजव्यवस्था में अत्यधिक महत्वपूर्ण हैं।
स्थायी GK: क्रीमी लेयर — इंद्रा साहनी वाद (1992, OBC)। SC/ST उप-वर्गीकरण — राज्य बनाम दविंदर सिंह (2024)। आरक्षण — अनुच्छेद 15(4), 16(4), 335।