16 मार्च 2026 · 16 March 2026विज्ञान
कचरे से पेक्टिन बनाने की स्वदेशी तकनीक (CURAJ)
Indigenous technique for pectin from waste (CURAJ)
केंद्रीय विश्वविद्यालय राजस्थान (अजमेर) के वैज्ञानिकों ने फल-सब्जी कचरे से पेक्टिन बनाने की तकनीक विकसित की।
मुख्य तथ्य
- •शोधकर्ता: डॉ. डी. भगवान
- •कच्चा माल: नींबू-संतरे के छिलके
- •उत्पादन 60–70% सस्ता
डॉ. डी. भगवान व उनकी टीम ने नींबू-संतरे के छिलकों जैसे कचरे से पेक्टिन बनाया, जो खाद्य उद्योग, जैम-जेली, दवा व सौंदर्य प्रसाधन में काम आता है। यह उत्पादन 60–70% सस्ता है और शून्य-कचरा व सर्कुलर इकोनॉमी मॉडल पर आधारित है।
🎯 परीक्षा में कैसे आएगा
राज्य की शोध उपलब्धियाँ RAS विज्ञान खंड हेतु प्रासंगिक हैं।
📚 संबंधित स्थायी GK
केंद्रीय विश्वविद्यालय राजस्थान बांदरसिंदरी, अजमेर में स्थित है।
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