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राष्ट्रीय · राजव्यवस्था

भारत में मृत्युदंड

19 फरवरी 2026 · Raj Study संपादकीय टीम

याद रखें · एक पंक्ति में

मृत्युदंड — केवल 'दुर्लभतम में दुर्लभ' मामलों में (बच्चन सिंह केस 1980)।

क्या हुआ

भारत में मृत्युदंड (death penalty) पर बहस चर्चा में रही। भारत में मृत्युदंड कानूनी है, किंतु इसे केवल 'विरलतम में विरल' (rarest of rare) मामलों में दिया जाता है — यह सिद्धांत बचन सिंह बनाम पंजाब राज्य (1980) में स्थापित हुआ। यह जघन्य अपराधों (आतंकवाद, सामूहिक हत्या, गंभीर बलात्कार-हत्या) के लिए आरक्षित है। बहस के पक्ष — निवारण व पीड़ित न्याय; विपक्ष — सुधार की संभावना, न्यायिक त्रुटि का जोखिम, मनमानापन व वैश्विक उन्मूलन प्रवृत्ति। दया याचिका राष्ट्रपति (अनुच्छेद 72) व राज्यपाल (अनुच्छेद 161) को दी जा सकती है। विधि आयोग (262वीं रिपोर्ट) ने आतंकवाद को छोड़ उन्मूलन की सिफारिश की थी।

मुख्य तथ्य

  1. 1भारत में मृत्युदंड पर बहस।
  2. 2'विरलतम में विरल' सिद्धांत — बचन सिंह वाद (1980)।
  3. 3जघन्य अपराधों हेतु आरक्षित।
  4. 4दया याचिका — अनुच्छेद 72/161।
  5. 5विधि आयोग 262वीं रिपोर्ट — सीमित उन्मूलन।

परीक्षा में ऐसे पूछा जा सकता है

मृत्युदंड, 'दुर्लभतम में दुर्लभ' व अनुच्छेद 21 राजव्यवस्था में महत्वपूर्ण हैं।

स्थायी GK: मृत्युदंड — 'विरलतम में विरल'; बचन सिंह वाद (1980)। दया याचिका — अनुच्छेद 72 (राष्ट्रपति), 161 (राज्यपाल)। विधि आयोग 262वीं रिपोर्ट।

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