परिसीमन में उत्तर-दक्षिण विभाजन का संतुलन
27 मार्च 2026 · Raj Study संपादकीय टीम
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परिसीमन — समान प्रतिनिधित्व हेतु निर्वाचन क्षेत्रों की सीमाओं का पुनर्निर्धारण; लोकसभा 543 से 816 प्रस्तावित।
क्या हुआ
परिसीमन में उत्तर-दक्षिण विभाजन को संतुलित करने की चर्चा हुई। परिसीमन जनसंख्या के आधार पर लोकसभा सीटों का पुनर्निर्धारण है। दक्षिणी राज्यों ने जनसंख्या नियंत्रण में बेहतर प्रदर्शन किया है, इसलिए जनसंख्या-आधारित परिसीमन से उनकी सापेक्ष सीट-हिस्सेदारी घट सकती है, जबकि अधिक आबादी वाले उत्तरी राज्यों की बढ़ सकती है — इसे 'जनसंख्या नियंत्रण के लिए दंड' के रूप में देखा जाता है। 84वें व 87वें संशोधनों ने सीटों की संख्या 2026 तक स्थिर रखी थी। यह संघवाद, प्रतिनिधित्व व समान विकास के बीच संवेदनशील संतुलन का मुद्दा है।
मुख्य तथ्य
- 1परिसीमन में उत्तर-दक्षिण विभाजन का संतुलन।
- 2परिसीमन — जनसंख्या आधार पर सीट पुनर्निर्धारण।
- 3दक्षिण — जनसंख्या नियंत्रण; सापेक्ष हिस्सेदारी घट सकती है।
- 484वाँ/87वाँ संशोधन — सीटें 2026 तक स्थिर।
- 5संघवाद व समान प्रतिनिधित्व का मुद्दा।
परीक्षा में ऐसे पूछा जा सकता है
परिसीमन, अनुच्छेद 82/170, परिसीमन आयोग व महिला आरक्षण राजव्यवस्था में महत्वपूर्ण हैं।
स्थायी GK: परिसीमन — अनुच्छेद 82; जनसंख्या आधार। 84वाँ/87वाँ संशोधन — सीटें 2026 तक स्थिर। दक्षिण बनाम उत्तर; संघवाद।