अनुसूचित जातियों को सार्वजनिक स्थानों से वंचित करना
14 मार्च 2026 · Raj Study संपादकीय टीम
याद रखें · एक पंक्ति में
अनुच्छेद 17 — अस्पृश्यता का उन्मूलन; SC/ST (अत्याचार निवारण) अधिनियम 1989 द्वारा संरक्षण।
क्या हुआ
अनuसूचित जातियों को सार्वजनिक स्थानों से वंचित करने (denial of public spaces) का मुद्दा चर्चा में रहा। संविधान का अनुच्छेद 17 अस्पृश्यता का उन्मूलन करता है व इसके किसी भी रूप के आचरण को दंडनीय बनाता है। फिर भी, कुछ क्षेत्रों में SC समुदायों को मंदिरों, जल स्रोतों, श्मशान व सार्वजनिक आयोजनों तक पहुँच से वंचित करने जैसी भेदभावपूर्ण प्रथाएँ बनी रहती हैं। नागरिक अधिकार संरक्षण अधिनियम 1955 व SC/ST (अत्याचार निवारण) अधिनियम 1989 ऐसे भेदभाव व अत्याचारों के विरुद्ध कानूनी सुरक्षा देते हैं। यह सामाजिक न्याय, समानता (अनुच्छेद 14, 15) व सामाजिक समावेशन से जुड़ा है।
मुख्य तथ्य
- 1SC को सार्वजनिक स्थानों से वंचित करने का मुद्दा।
- 2अनुच्छेद 17 — अस्पृश्यता उन्मूलन; दंडनीय।
- 3भेदभाव — मंदिर, जल स्रोत, श्मशान तक पहुँच से वंचना।
- 4नागरिक अधिकार संरक्षण अधिनियम 1955।
- 5SC/ST अत्याचार निवारण अधिनियम 1989।
परीक्षा में ऐसे पूछा जा सकता है
अनुच्छेद 17, SC/ST अत्याचार निवारण अधिनियम व सामाजिक न्याय राजव्यवस्था में महत्वपूर्ण हैं।
स्थायी GK: अनुच्छेद 17 — अस्पृश्यता उन्मूलन। नागरिक अधिकार संरक्षण अधिनियम 1955; SC/ST अत्याचार निवारण अधिनियम 1989। अनुच्छेद 14, 15।