भारत में डिजिटल पाइरेसी
15 अप्रैल 2026 · Raj Study संपादकीय टीम
याद रखें · एक पंक्ति में
कॉपीराइट अधिनियम, 1957 — 3 वर्ष तक जेल व ₹2 लाख जुर्माना; सिनेमैटोग्राफ (संशोधन) अधिनियम, 2023।
क्या हुआ
भारत में डिजिटल पायरेसी (digital piracy) की समस्या चर्चा में रही। डिजिटल पायरेसी का अर्थ है फिल्मों, संगीत, सॉफ्टवेयर व सामग्री की अनधिकृत नकल व वितरण, जो रचनाकारों के बौद्धिक संपदा अधिकारों (IPR) का उल्लंघन है। यह मनोरंजन व सॉफ्टवेयर उद्योग को भारी आर्थिक हानि पहुँचाती है। विधिक ढाँचा — कॉपीराइट अधिनियम 1957, सिनेमैटोग्राफ (संशोधन) अधिनियम 2023 (फिल्म पायरेसी पर दंड) व IT अधिनियम 2000। समाधान में कानून प्रवर्तन, वेबसाइट ब्लॉकिंग व जन-जागरूकता शामिल हैं।
मुख्य तथ्य
- 1भारत में डिजिटल पायरेसी की समस्या।
- 2अनधिकृत नकल — IPR का उल्लंघन।
- 3मनोरंजन/सॉफ्टवेयर उद्योग को आर्थिक हानि।
- 4विधि — कॉपीराइट 1957; सिनेमैटोग्राफ संशोधन 2023।
- 5समाधान — प्रवर्तन, वेबसाइट ब्लॉकिंग, जागरूकता।
परीक्षा में ऐसे पूछा जा सकता है
कॉपीराइट अधिनियम, सिनेमैटोग्राफ संशोधन व IT अधिनियम राजव्यवस्था/साइबर में पूछे जाते हैं।
स्थायी GK: कॉपीराइट अधिनियम 1957; सिनेमैटोग्राफ (संशोधन) अधिनियम 2023। IPR — बौद्धिक संपदा अधिकार। WIPO — विश्व बौद्धिक संपदा संगठन।