द्वारका बेसिन
27 मार्च 2026 · Raj Study संपादकीय टीम
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द्वारका बेसिन — गुजरात तट के पास जलमग्न पुरातात्विक अवशेष; भगवान कृष्ण के पौराणिक राज्य से जुड़े।
क्या हुआ
'द्वारका बेसिन' (Dwarka Basin) की चर्चा हुई। द्वारका (गुजरात) हिंदू धर्म के चार धामों व सप्त पुरियों में से एक है, जिसे भगवान कृष्ण की प्राचीन नगरी माना जाता है (किंवदंती के अनुसार समुद्र में डूबी)। पुरातत्वविदों (विशेषकर डॉ. एस.आर. राव के नेतृत्व में पानी के नीचे पुरातत्व) ने द्वारका तट के निकट जलमग्न संरचनाओं की खोज की है, जो प्राचीन बस्ती के संकेत देती हैं। 'द्वारका बेसिन' भूवैज्ञानिक/अवसादी संदर्भ में या समुद्री-पुरातात्विक अन्वेषण के संदर्भ में महत्वपूर्ण है। यह भारत की प्राचीन सभ्यता, समुद्री-पुरातत्व व सांस्कृतिक विरासत के अध्ययन से जुड़ा है (ASI का जल-पुरातत्व विंग)। यह कला-संस्कृति व पुरातत्व से जुड़ा है।
मुख्य तथ्य
- 1द्वारका बेसिन — समुद्री-पुरातात्विक/भूवैज्ञानिक संदर्भ।
- 2द्वारका — चार धाम व सप्त पुरी; कृष्ण की नगरी।
- 3तट के निकट जलमग्न प्राचीन संरचनाएँ।
- 4समुद्री-पुरातत्व (डॉ. एस.आर. राव)।
- 5ASI जल-पुरातत्व; प्राचीन सभ्यता अध्ययन।
परीक्षा में ऐसे पूछा जा सकता है
द्वारका, खमेर/हड़प्पा कालक्रम व चार धाम कला-संस्कृति में पूछे जाते हैं।
स्थायी GK: द्वारका — चार धाम व सप्त पुरी; कृष्ण की नगरी (जलमग्न)। समुद्री-पुरातत्व (डॉ. एस.आर. राव)। ASI जल-पुरातत्व विंग। गुजरात।