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राष्ट्रीय · राजव्यवस्था

चुनाव-पश्चात गतिरोध में राज्यपाल की शक्ति

8 मई 2026 · Raj Study संपादकीय टीम

याद रखें · एक पंक्ति में

CM 'राज्यपाल के प्रसादपर्यंत' (अनुच्छेद 164(1)); बहुमत हेतु फ्लोर टेस्ट ही एकमात्र संवैधानिक तरीका।

क्या हुआ

चुनाव के बाद त्रिशंकु विधानसभा (post-election stalemate) में राज्यपाल की शक्तियों पर बहस उठी। त्रिशंकु विधानसभा में किसी दल को स्पष्ट बहुमत न होने पर राज्यपाल को सरकार बनाने हेतु आमंत्रित करने में विवेकाधिकार प्राप्त होता है। राज्यपाल अनुच्छेद 164 के तहत मुख्यमंत्री की नियुक्ति करता है तथा बहुमत परीक्षण (फ्लोर टेस्ट) का निर्णय लेता है। सरकारिया व पुंछी आयोगों ने इन शक्तियों के दुरुपयोग को रोकने हेतु मानदंड सुझाए (सबसे बड़ी पार्टी/गठबंधन को प्राथमिकता, शीघ्र फ्लोर टेस्ट)। यह संघवाद व संवैधानिक नैतिकता से जुड़ा है।

मुख्य तथ्य

  1. 1त्रिशंकु विधानसभा में राज्यपाल की शक्तियाँ।
  2. 2राज्यपाल — CM नियुक्ति (अनुच्छेद 164), फ्लोर टेस्ट।
  3. 3विवेकाधिकार — अनुच्छेद 163।
  4. 4सरकारिया/पुंछी आयोग के मानदंड।
  5. 5सबसे बड़ी पार्टी/गठबंधन को प्राथमिकता; शीघ्र फ्लोर टेस्ट।

परीक्षा में ऐसे पूछा जा सकता है

अनुच्छेद 164, 174, 356, फ्लोर टेस्ट व SR बोम्मई राजव्यवस्था में अत्यधिक महत्वपूर्ण हैं।

स्थायी GK: राज्यपाल — अनुच्छेद 153-167; CM की नियुक्ति अनुच्छेद 164। विवेकाधिकार — अनुच्छेद 163। सरकारिया व पुंछी आयोग — केंद्र-राज्य संबंध।

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