24 मार्च 2026 · 24 March 2026
श्री गुरु हरगोबिंद साहिब जी
Shri Guru Hargobind Sahib Ji
गुरु हरगोबिंद — सिखों के छठे गुरु; मीरी-पीरी (लौकिक व आध्यात्मिक शक्ति) की अवधारणा।
मुख्य तथ्य
- •श्री गुरु हरगोबिंद साहिब जी — छठे सिख गुरु।
- •'मीरी-पीरी' — सांसारिक व आध्यात्मिक सत्ता।
- •अकाल तख्त (अमृतसर) की स्थापना।
- •योद्धा-संत परंपरा; सिखों को शस्त्र-प्रशिक्षण।
- •बंदी छोड़ दिवस (ग्वालियर किले से रिहाई)।
श्री गुरु हरगोबिंद साहिब जी की चर्चा हुई। गुरु हरगोबिंद साहिब (1595-1644) सिखों के छठे गुरु थे, जिन्होंने 'मीरी-पीरी' की अवधारणा दी — मीरी (सांसारिक/राजनीतिक सत्ता) व पीरी (आध्यात्मिक सत्ता) के दो खंडे (तलवारें) धारण कीं। उन्होंने सिखों को शस्त्र व सैन्य प्रशिक्षण देकर एक योद्धा-संत परंपरा की नींव रखी (अपने पिता गुरु अर्जुन देव की शहादत के बाद)। उन्होंने अमृतसर में 'अकाल तख्त' (सर्वोच्च सिख लौकिक प्राधिकरण) की स्थापना की। उनकी जहाँगीर द्वारा ग्वालियर किले में नज़रबंदी से रिहाई 'बंदी छोड़ दिवस' (दिवाली के साथ) के रूप में मनाई जाती है। यह कला-संस्कृति, धर्म व मध्यकालीन इतिहास से जुड़ा है।
🎯 परीक्षा में कैसे आएगा
गुरु हरगोबिंद, मीरी-पीरी व अकाल तख्त कला-संस्कृति में पूछे जाते हैं।
📚 संबंधित स्थायी GK
गुरु हरगोबिंद — छठे सिख गुरु; मीरी-पीरी (दो खंडे)। अकाल तख्त (अमृतसर) की स्थापना। बंदी छोड़ दिवस; योद्धा-संत परंपरा।
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