8 अप्रैल 2026 · 8 April 2026
गुरु तेग बहादुर का प्रकाश पर्व
Prakash Purb of Guru Teg Bahadur
गुरु तेग बहादुर — सिखों के 9वें गुरु; 'हिंद दी चादर'; 1675 में औरंगज़ेब द्वारा दिल्ली में शहीद।
मुख्य तथ्य
- •गुरु तेग बहादुर का प्रकाश पर्व।
- •नौवें सिख गुरु (1621-1675); 'हिंद की चादर'।
- •धार्मिक स्वतंत्रता हेतु सर्वोच्च बलिदान/शहादत।
- •कश्मीरी पंडितों के धर्मांतरण के विरुद्ध।
- •गुरु ग्रंथ साहिब; धार्मिक सहिष्णुता।
गुरु तेग बहादुर के प्रकाश पर्व की चर्चा हुई। गुरु तेग बहादुर (1621-1675) सिखों के नौवें गुरु थे, जिन्हें 'हिंद की चादर' (भारत की रक्षक/ढाल) कहा जाता है। उन्होंने धार्मिक स्वतंत्रता व मानवाधिकारों की रक्षा के लिए सर्वोच्च बलिदान दिया — कश्मीरी हिंदू पंडितों के जबरन धर्मांतरण के विरुद्ध खड़े होकर उन्होंने मुग़ल सम्राट औरंगज़ेब के अधीन शहादत दी (दिल्ली में)। उनकी रचनाएँ गुरु ग्रंथ साहिब में संकलित हैं। 'प्रकाश पर्व' किसी गुरु की जयंती का उत्सव है। वे धार्मिक सहिष्णुता, साहस, बलिदान व 'सर्व धर्म समभाव' के प्रतीक हैं। यह कला-संस्कृति, इतिहास व धार्मिक विरासत से जुड़ा है।
🎯 परीक्षा में कैसे आएगा
सिख गुरु, महत्वपूर्ण व्यक्तित्व व औरंगज़ेब इतिहास में पूछे जाते हैं।
📚 संबंधित स्थायी GK
गुरु तेग बहादुर — नौवें सिख गुरु; 'हिंद की चादर'। धार्मिक स्वतंत्रता हेतु शहादत (औरंगज़ेब)। गुरु ग्रंथ साहिब। प्रकाश पर्व = जयंती।
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