वायुसेना ने स्वदेशी लंबी दूरी के ग्लाइड बम 'खगांतक-243' का सफल परीक्षण किया
8 सितंबर 2026 · Raj Study संपादकीय टीम
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खगांतक-243: JSR Dynamics व BEL का स्वदेशी ग्लाइड बम; पहला ड्रॉप परीक्षण 2 सितंबर 2026, मारक दूरी 144–180 किमी।
क्या हुआ
भारतीय वायुसेना ने 2 सितंबर 2026 को 'खगांतक-243' लंबी दूरी के ग्लाइड बम (LRGB) का पहला ड्रॉप परीक्षण किया और सभी मिशन लक्ष्य हासिल हुए। इसे नागपुर की निजी कंपनी JSR Dynamics और सार्वजनिक क्षेत्र की Bharat Electronics Limited (BEL) ने मिलकर विकसित किया है। मीडिया रिपोर्टों के अनुसार परीक्षण राजस्थान की पोकरण रेंज में Su-30MKI विमान से हुआ। इसमें 125 किलो का Mk-81 वारहेड है और लगभग 12 किमी ऊँचाई से छोड़े जाने पर यह 144 से 180 किमी दूर लक्ष्य भेद सकता है। इससे लड़ाकू विमान शत्रु की वायु रक्षा सीमा से बाहर रहकर हमला कर सकेंगे।
मुख्य तथ्य
- 1पहला ड्रॉप परीक्षण: 2 सितंबर 2026, भारतीय वायुसेना
- 2विकासकर्ता: JSR Dynamics (नागपुर) और BEL
- 3वारहेड: 125 किलो Mk-81; मारक दूरी 144–180 किमी
- 4रिपोर्टों के अनुसार स्थल पोकरण (राजस्थान), विमान Su-30MKI
परीक्षा में ऐसे पूछा जा सकता है
प्रारंभिक परीक्षा में खगांतक-243 के विकासकर्ता (JSR Dynamics-BEL), मारक दूरी या परीक्षण स्थल पोकरण पर प्रश्न आ सकता है।
स्थायी GK: JSR Dynamics ने 'खगांतक' हथियार पहली बार Defexpo-2020 में प्रदर्शित किया था। DRDO के अपने लंबी दूरी के ग्लाइड बम 'गौरव' की पहली उड़ान परीक्षण अगस्त 2024 में Su-30MKI से हुई थी।