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राष्ट्रीय · अर्थव्यवस्था

दिवाला एवं शोधन अक्षमता संहिता (IBC) 2016 के 10 वर्ष पूरे

30 मई 2026 · Raj Study संपादकीय टीम

याद रखें · एक पंक्ति में

IBC 2016 — नियामक IBBI; अधिनिर्णायक NCLT/DRT; CIRP 330 दिन।

क्या हुआ

दिवाला एवं शोधन अक्षमता संहिता (IBC), 2016 ने अपने 10 वर्ष पूरे किए। IBC ने भारत में दिवालियापन समाधान के लिए एकीकृत, समयबद्ध ढाँचा प्रदान किया — कॉर्पोरेट दिवाला समाधान प्रक्रिया (CIRP) को 330 दिनों के भीतर पूरा करना अनिवार्य है। यह 'ऋणी-नियंत्रण' से 'लेनदार-नियंत्रण' की ओर बदलाव लाई। इसने ऋण-वसूली, बैंकों के NPA में कमी, तथा व्यापार सुगमता में सुधार किया। दिवाला एवं शोधन अक्षमता बोर्ड (IBBI) नियामक है।

मुख्य तथ्य

  1. 1IBC 2016 ने 10 वर्ष पूरे किए।
  2. 2समयबद्ध समाधान — CIRP 330 दिनों में।
  3. 3नियामक — IBBI; निर्णायक प्राधिकरण — NCLT/DRT।
  4. 4'ऋणी-नियंत्रण' से 'लेनदार-नियंत्रण' की ओर।
  5. 5NPA में कमी व व्यापार सुगमता में सुधार।

परीक्षा में ऐसे पूछा जा सकता है

IBC, IBBI, NCLT व CIRP अर्थव्यवस्था व राजव्यवस्था दोनों में महत्वपूर्ण हैं।

स्थायी GK: IBC — 2016 अधिनियमित; नियामक IBBI। निर्णायक प्राधिकरण — NCLT (कंपनियाँ), DRT (व्यक्ति)। CIRP समयसीमा — 330 दिन। 'वाटरफॉल' प्राथमिकता क्रम (धारा 53)।

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