IIT भुवनेश्वर ने विकसित किया हाथ में पकड़ने योग्य आर्सेनिक जल-जांच उपकरण आर्सेनसेफ
12 जून 2026 · Raj Study संपादकीय टीम
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जून 2026 में IIT भुवनेश्वर ने आर्सेनसेफ नामक एक हाथ में पकड़ने योग्य उपकरण विकसित किया, जो बिना प्रयोगशाला ढांचे के पानी में आर्सेनिक संदूषण का पता लगाता है।
क्या हुआ
IIT भुवनेश्वर ने आर्सेनसेफ नामक एक हाथ में पकड़ने योग्य उपकरण विकसित किया है, जो बिना किसी प्रयोगशाला ढांचे या रसायनों के पानी में आर्सेनिक संदूषण का सटीक पता लगा सकता है। इससे पानी की गुणवत्ता जांच तेज, सस्ती और कहीं अधिक सुलभ हो जाती है, खासकर उन दूरदराज इलाकों के समुदायों के लिए जहां जांच प्रयोगशालाओं तक पहुंच नहीं है। गंगा के मैदानी इलाकों के कुछ हिस्सों में भूजल में आर्सेनिक संदूषण एक बड़ी सार्वजनिक स्वास्थ्य समस्या है, जहां लंबे समय तक संपर्क में रहने से गंभीर स्वास्थ्य समस्याएं हो सकती हैं। इस तरह का पोर्टेबल, कम लागत वाला जांच उपकरण शीघ्र पहचान में काफी सुधार ला सकता है और संवेदनशील समुदायों को आर्सेनिक संबंधी बीमारियों से बचाने में मदद कर सकता है।
मुख्य तथ्य
- 1IIT भुवनेश्वर ने हाथ में पकड़ने योग्य उपकरण आर्सेनसेफ विकसित किया
- 2बिना प्रयोगशाला ढांचे या रसायनों के पानी में आर्सेनिक का पता लगाता है
- 3जल गुणवत्ता जांच को तेज और सुलभ बनाता है
- 4गंगा के मैदानी इलाकों के आर्सेनिक-प्रभावित क्षेत्रों के लिए प्रासंगिक
परीक्षा में ऐसे पूछा जा सकता है
जल गुणवत्ता, सार्वजनिक स्वास्थ्य तकनीक और भारतीय नवाचार से जुड़ा यह विषय RAS प्रारंभिक व मुख्य परीक्षा के विज्ञान-प्रौद्योगिकी खंड के लिए महत्वपूर्ण है।
स्थायी GK: गंगा के मैदानी राज्यों, जिनमें पश्चिम बंगाल और बिहार शामिल हैं, में भूजल में आर्सेनिक संदूषण एक बड़ी सार्वजनिक स्वास्थ्य समस्या है; भारत का BIS पेयजल मानक आर्सेनिक की स्वीकार्य सीमा 0.01 mg/L रखता है (वैकल्पिक स्रोत न होने पर)।