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21 फरवरी 2026 · 21 February 2026⭐ परीक्षा में महत्वपूर्ण

भारत की विदेश नीति व बहुपक्षवाद का क्षरण

India's foreign policy and erosion of multilateralism

बहुपक्षवाद का क्षरण — WTO, UNSC जैसी संस्थाओं की घटती प्रभावशीलता; भारत सुधारित बहुपक्षवाद का पक्षधर।

मुख्य तथ्य

  • भारत की विदेश नीति व बहुपक्षवाद का क्षरण।
  • बहुपक्षवाद — साझा नियमों/संस्थाओं से समाधान।
  • क्षरण — राष्ट्रवाद, संरक्षणवाद, UNSC निष्क्रियता।
  • भारत — 'सुधारित बहुपक्षवाद'; UNSC सुधार।
  • वसुधैव कुटुम्बकम; बहुध्रुवीयता; ग्लोबल साउथ।
भारत की विदेश नीति व बहुपक्षवाद (multilateralism) के क्षरण की चर्चा हुई। बहुपक्षवाद का अर्थ है कई देशों का साझा नियमों व संस्थाओं (UN, WTO, WHO) के माध्यम से वैश्विक समस्याओं का समाधान। हाल के वर्षों में बढ़ता राष्ट्रवाद, संरक्षणवाद, भू-राजनीतिक प्रतिद्वंद्विता व UNSC जैसी संस्थाओं की निष्क्रियता ने बहुपक्षवाद को कमज़ोर किया है। भारत 'सुधारित बहुपक्षवाद' की वकालत करता है — UNSC व ब्रेटन वुड्स संस्थाओं में सुधार ताकि वे वर्तमान वास्तविकता व ग्लोबल साउथ का प्रतिनिधित्व करें। भारत 'वसुधैव कुटुम्बकम', बहुध्रुवीयता व मुद्दा-आधारित गठबंधनों पर बल देता है। यह वैश्विक शासन से जुड़ा है।

🎯 परीक्षा में कैसे आएगा

बहुपक्षवाद, UN सुधार व भारत की रणनीतिक स्वायत्तता अंतरराष्ट्रीय में महत्वपूर्ण हैं।

📚 संबंधित स्थायी GK

बहुपक्षवाद — साझा संस्थाएँ (UN, WTO)। भारत — सुधारित बहुपक्षवाद; UNSC सुधार। वसुधैव कुटुम्बकम; बहुध्रुवीयता; ग्लोबल साउथ।

✨ RajAI— RAS Prelims Expert

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