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14 मई 2026 · 14 May 2026⭐ परीक्षा में महत्वपूर्ण

भारत का आक्रामक प्रजाति संकट

India's invasive species crisis

आक्रामक प्रजातियां वैश्विक विलुप्ति में 60% योगदान; 60 वर्षों में भारत को ₹8.3 लाख करोड़ हानि।

मुख्य तथ्य

  • भारत में आक्रामक विदेशी प्रजातियों का संकट।
  • उदाहरण — लैंटाना, जलकुंभी, पार्थेनियम, प्रोसोपिस।
  • देशी प्रजातियों का विस्थापन; जैव विविधता को क्षति।
  • विधि — जैव विविधता अधिनियम 2002; CBD।
  • राजस्थान — विलायती बबूल भूजल/चरागाह प्रभावित करता है।
भारत में आक्रामक विदेशी प्रजातियों (invasive alien species) का संकट गहराता जा रहा है। ये गैर-देशी पौधे/जीव स्थानीय पारिस्थितिकी तंत्र में फैलकर देशी प्रजातियों को विस्थापित करते हैं व जैव विविधता को नुकसान पहुँचाते हैं। प्रमुख उदाहरण — लैंटाना कैमरा, जलकुंभी, पार्थेनियम (गाजर घास), व प्रोसोपिस जूलीफ्लोरा (विलायती बबूल)। राजस्थान में विलायती बबूल भूजल व चरागाहों को प्रभावित करता है। नियंत्रण के उपाय व जैव विविधता अधिनियम 2002 तथा CBD के तहत दायित्व इस संकट से जुड़े हैं।

🎯 परीक्षा में कैसे आएगा

आक्रामक प्रजातियां, CBD, KM-GBF लक्ष्य 6 व जैव विविधता अधिनियम पर्यावरण में महत्वपूर्ण हैं।

📚 संबंधित स्थायी GK

आक्रामक प्रजातियाँ — लैंटाना, जलकुंभी, पार्थेनियम, प्रोसोपिस जूलीफ्लोरा। जैव विविधता अधिनियम 2002; NBA। CBD (1992)। राजस्थान — विलायती बबूल समस्या।

✨ RajAI— RAS Prelims Expert

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