मुख्य सामग्री पर जाएं
17 अप्रैल 2026 · 17 April 2026

कर्नाटक HC का मासिक धर्म अवकाश नीति पर निर्देश

Karnataka HC on menstrual leave policy

मासिक धर्म अवकाश नीति — 18-52 वर्ष की महिला कर्मचारियों को माह में एक दिन; अनुच्छेद 21 के तहत।

मुख्य तथ्य

  • कर्नाटक HC की मासिक धर्म अवकाश नीति पर टिप्पणी।
  • कोई केंद्रीय कानून नहीं; बिहार/केरल ने लागू किया।
  • न्यायालय ने नीति बनाने का आग्रह किया।
  • महिला स्वास्थ्य/गरिमा बनाम रोज़गार-भेदभाव।
  • श्रम अधिकार; कार्यस्थल नीतियाँ।
कर्नाटक उच्च न्यायालय द्वारा मासिक धर्म अवकाश नीति पर टिप्पणी की चर्चा हुई। मासिक धर्म अवकाश का अर्थ है महिलाओं को मासिक धर्म के दौरान सवेतन अवकाश देना। भारत में इस पर कोई केंद्रीय कानून नहीं है, यद्यपि बिहार व केरल जैसे कुछ राज्यों/संस्थानों ने इसे लागू किया है। न्यायालयों ने इस मुद्दे पर सरकार से नीति बनाने/विचार करने का आग्रह किया है — महिला स्वास्थ्य, गरिमा व कार्यस्थल समानता के बीच संतुलन साधते हुए (आलोचक संभावित रोज़गार-भेदभाव की चिंता जताते हैं)। यह श्रम अधिकार, लैंगिक संवेदनशीलता व कार्यस्थल नीतियों से जुड़ा है। यह राजव्यवस्था व सामाजिक मुद्दों से जुड़ा है।

🎯 परीक्षा में कैसे आएगा

अनुच्छेद 21, मूल समानता व मासिक धर्म स्वास्थ्य राजव्यवस्था/सामाजिक न्याय में पूछे जाते हैं।

📚 संबंधित स्थायी GK

मासिक धर्म अवकाश — कोई केंद्रीय कानून नहीं। बिहार, केरल — लागू। महिला स्वास्थ्य/गरिमा बनाम रोज़गार-भेदभाव। अनुच्छेद 14/21।

✨ RajAI— RAS Prelims Expert

संबंधित समसामयिकी