नैफ्थ्रोमाइसिन: भारत का पहला स्वदेशी एंटीबायोटिक विकसित
1 अक्टूबर 2025 · Raj Study संपादकीय टीम
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अक्टूबर 2025 में भारत के जैव प्रौद्योगिकी विभाग ने निजी दवा कंपनी वॉकहार्ट के सहयोग से देश का पहला स्वदेशी एंटीबायोटिक 'नैफ्थ्रोमाइसिन' विकसित किया।
क्या हुआ
यह एंटीबायोटिक प्रतिरोधी श्वसन संक्रमणों के विरुद्ध प्रभावी है, विशेष रूप से कैंसर रोगियों व अनियंत्रित मधुमेह वाले रोगियों के लिए उपयोगी है, जो एंटीबायोटिक-प्रतिरोध (AMR) की वैश्विक चुनौती से निपटने में भारत के योगदान को दर्शाता है।
मुख्य तथ्य
- 1नाम: नैफ्थ्रोमाइसिन (भारत का पहला स्वदेशी एंटीबायोटिक)।
- 2विकासकर्ता: जैव प्रौद्योगिकी विभाग व वॉकहार्ट (निजी दवा कंपनी)।
- 3उपयोगिता: प्रतिरोधी श्वसन संक्रमण, विशेषकर कैंसर व मधुमेह रोगियों में।
परीक्षा में ऐसे पूछा जा सकता है
भारत की पहली स्वदेशी दवा खोजों (जैसे नैफ्थ्रोमाइसिन) की जानकारी RAS मुख्य परीक्षा के स्वास्थ्य-जैव प्रौद्योगिकी प्रश्नपत्र में उपयोगी है।
स्थायी GK: एंटीबायोटिक-प्रतिरोध (AMR) विश्व स्वास्थ्य संगठन (WHO) द्वारा पहचाने गए वैश्विक सार्वजनिक स्वास्थ्य के शीर्ष खतरों में से एक है।