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राष्ट्रीय · कला-संस्कृति

नीलगिरि (तमिलनाडु) में प्रागैतिहासिक शैल-चित्र स्थल की पुनर्खोज

29 अप्रैल 2026 · Raj Study संपादकीय टीम

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यक्कई हेरिटेज ट्रस्ट ने नीलगिरि के कोटागिरी में वेल्लरिकोम्बई के पास प्रागैतिहासिक शैल-चित्र स्थल की पुनर्खोज की।

क्या हुआ

29 अप्रैल 2026 को प्रकाशित रिपोर्ट के अनुसार, तमिलनाडु में शैल-चित्र, वीर-पाषाण और शिलालेखों का दस्तावेज़ीकरण करने वाले यक्कई हेरिटेज ट्रस्ट ने नीलगिरि ज़िले में एक प्रागैतिहासिक शैल-चित्र स्थल की पुनर्खोज की सूचना दी। यह स्थल कोटागिरी क्षेत्र में वेल्लरिकोम्बई गाँव के पहले से ज्ञात शैल-कला स्थल के समीप है। स्थानीय इरुला और कुरुम्बा जनजातीय समुदाय इस स्थान को पवित्र मानते हैं। ऐसे शैल-चित्र प्रागैतिहासिक जीवन के महत्वपूर्ण प्रमाण हैं और उनका दस्तावेज़ीकरण उनके संरक्षण में मदद करता है।

मुख्य तथ्य

  1. 1सूचना देने वाली संस्था: यक्कई हेरिटेज ट्रस्ट (तमिलनाडु)
  2. 2स्थान: वेल्लरिकोम्बई गाँव के पास, कोटागिरी क्षेत्र, नीलगिरि ज़िला
  3. 3स्वरूप: प्रागैतिहासिक शैल-चित्र स्थल की पुनर्खोज
  4. 4इरुला और कुरुम्बा समुदायों के लिए पवित्र स्थल

परीक्षा में ऐसे पूछा जा सकता है

प्रश्न में नीलगिरि के शैल-कला स्थल (वेल्लरिकोम्बई, कोटागिरी) का संबंधित जनजातियों (इरुला, कुरुम्बा) से मिलान या भीमबेटका से तुलना पूछी जा सकती है।

स्थायी GK: मध्य प्रदेश में भोपाल से लगभग 45 किमी दक्षिण-पूर्व, विंध्य की तलहटी में स्थित भीमबेटका के शैलाश्रय 2003 में UNESCO विश्व धरोहर सूची में शामिल हुए; इनके चित्र मध्यपाषाण काल से ऐतिहासिक काल तक के हैं।

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