मुख्य सामग्री पर जाएं
राष्ट्रीय · राजव्यवस्था

निष्क्रिय इच्छामृत्यु: हरीश राणा मामला

14 मार्च 2026 · Raj Study संपादकीय टीम

याद रखें · एक पंक्ति में

सर्वोच्च न्यायालय ने 'हरीश राणा बनाम भारत संघ' 2026 मामले में पहली बार निष्क्रिय इच्छामृत्यु की अनुमति दी।

क्या हुआ

कॉमन कॉज (2018) ने गरिमा से मृत्यु के अधिकार को अनुच्छेद 21 के तहत मौलिक अधिकार माना और एडवांस डायरेक्टिव के साथ निष्क्रिय इच्छामृत्यु को वैध किया। हरीश राणा मामले ने कृत्रिम भोजन को हटाई जा सकने वाली चिकित्सा प्रक्रिया मानकर इसके क्रियान्वयन को स्पष्ट किया।

मुख्य तथ्य

  1. 1निष्क्रिय इच्छामृत्यु भारत में सशर्त वैध
  2. 2आधार: अनुच्छेद 21 (गरिमा से जीवन)
  3. 3सक्रिय इच्छामृत्यु भारत में अवैध

परीक्षा में ऐसे पूछा जा सकता है

अनुच्छेद 21 व इच्छामृत्यु से जुड़े निर्णय RAS पॉलिटी हेतु अत्यंत प्रासंगिक हैं।

स्थायी GK: कॉमन कॉज बनाम भारत संघ (2018) ने गरिमा से मृत्यु को मौलिक अधिकार माना।

इसी विषय पर और