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राष्ट्रीय · राजव्यवस्था

राजनीतिक वित्तपोषण सुधार

4 अप्रैल 2026 · Raj Study संपादकीय टीम

याद रखें · एक पंक्ति में

कुल चंदा 161% बढ़कर ₹6,648 करोड़; कॉर्पोरेट योगदान 92.18%; इलेक्टोरल बॉन्ड 2024 में रद्द।

क्या हुआ

राजनीतिक वित्त-पोषण (political funding) सुधारों की चर्चा हुई। राजनीतिक दलों के वित्त-पोषण में पारदर्शिता लोकतंत्र की निष्पक्षता हेतु आवश्यक है। फरवरी 2024 में सर्वोच्च न्यायालय ने चुनावी बॉन्ड योजना को असंवैधानिक घोषित किया, यह कहते हुए कि गुमनाम दान मतदाताओं के 'जानने के अधिकार' (अनुच्छेद 19(1)(a)) का उल्लंघन है। सुधार के विकल्पों में राज्य वित्त-पोषण, दान सीमा, डिजिटल पारदर्शिता व चुनाव खर्च की निगरानी शामिल हैं। काला धन व चुनावी खर्च प्रमुख चिंताएँ हैं। ECI व विधि आयोग ने सुझाव दिए हैं।

मुख्य तथ्य

  1. 1राजनीतिक वित्त-पोषण सुधार।
  2. 2चुनावी बॉन्ड — 2024 में SC द्वारा असंवैधानिक।
  3. 3गुमनाम दान — 'जानने के अधिकार' का उल्लंघन।
  4. 4विकल्प — राज्य वित्त-पोषण, दान सीमा, पारदर्शिता।
  5. 5चिंता — काला धन व चुनावी खर्च।

परीक्षा में ऐसे पूछा जा सकता है

चुनावी ट्रस्ट, RPA 1951 धारा 29C व इलेक्टोरल बॉन्ड फैसला राजव्यवस्था में महत्वपूर्ण हैं।

स्थायी GK: चुनावी बॉन्ड — 2024 में SC द्वारा असंवैधानिक। 'जानने का अधिकार' — अनुच्छेद 19(1)(a)। ECI; राज्य वित्त-पोषण का विचार।

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