अनिवार्य 10-वर्षीय जनगणना हेतु निजी विधेयक
7 फरवरी 2026 · Raj Study संपादकीय टीम
याद रखें · एक पंक्ति में
जनगणना — हर 10 वर्ष में; जनगणना अधिनियम 1948 के तहत; पर समयबद्धता की कानूनी बाध्यता नहीं।
क्या हुआ
अनिवार्य 10-वर्षीय जनगणना (mandatory census) के लिए एक निजी विधेयक की चर्चा हुई। जनगणना (census) देश की जनसंख्या, उसकी जनसांख्यिकी, सामाजिक-आर्थिक स्थिति, साक्षरता, आवास आदि का व्यापक गणन है, जो भारत में हर 10 वर्ष में होती है (पहली 1872; स्वतंत्र भारत में 1951 से नियमित; भारत के महापंजीयक-RGI द्वारा)। यह नीति-निर्माण, संसाधन-आवंटन, परिसीमन व कल्याण-योजनाओं का आधार है। 2021 की जनगणना (कोविड व अन्य कारणों से) विलंबित रही, जिससे डेटा-अंतराल की चिंता बढ़ी। निजी विधेयक 10-वर्षीय जनगणना को कानूनी रूप से अनिवार्य व समयबद्ध बनाने का प्रयास है। यह राजव्यवस्था, शासन व नीति-डेटा से जुड़ा है। यह राजव्यवस्था से जुड़ा है।
मुख्य तथ्य
- 1अनिवार्य 10-वर्षीय जनगणना हेतु निजी विधेयक।
- 2जनगणना — हर 10 वर्ष; महापंजीयक (RGI) द्वारा।
- 3नीति, संसाधन-आवंटन, परिसीमन का आधार।
- 42021 जनगणना विलंबित — डेटा-अंतराल चिंता।
- 5विधेयक — जनगणना को कानूनी अनिवार्य/समयबद्ध।
परीक्षा में ऐसे पूछा जा सकता है
जनगणना, जनगणना अधिनियम 1948 व नीति-निर्माण राजव्यवस्था में पूछे जाते हैं।
स्थायी GK: जनगणना — हर 10 वर्ष; RGI द्वारा (पहली 1872; 1951 से नियमित)। नीति, संसाधन-आवंटन, परिसीमन आधार। 2021 विलंबित। निजी विधेयक — अनिवार्य/समयबद्ध।