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राष्ट्रीय · विज्ञान

क्वांटम तकनीक ने आंशिक रैंडमनेस को लगभग परिपूर्ण क्रिप्टोग्राफिक कुंजियों में बदला

9 जून 2026 · Raj Study संपादकीय टीम

याद रखें · एक पंक्ति में

जून 2026 में वैज्ञानिकों ने एक क्वांटम तकनीक विकसित की, जो आंशिक रूप से रैंडम डेटा को लगभग परिपूर्ण क्रिप्टोग्राफिक सुरक्षा कुंजियों में बदल देती है।

क्या हुआ

वैज्ञानिकों ने एक ऐसी तकनीक विकसित की है, जो क्वांटम भौतिकी सिद्धांतों का उपयोग कर आंशिक रूप से रैंडम डेटा को लगभग परिपूर्ण क्रिप्टोग्राफिक सुरक्षा कुंजियों में बदल देती है। यह नवाचार डिजिटल सुरक्षा की एक पुरानी समस्या को हल करता है: सबसे बेहतरीन कंप्यूटर भी सच में रैंडम माने जाने वाले नंबर बनाते समय सूक्ष्म, अनुमान लगाने योग्य पैटर्न छोड़ देते हैं। चूंकि मजबूत क्रिप्टोग्राफी वास्तव में अप्रत्याशित कुंजियों पर निर्भर करती है, इसलिए यह कमजोरी डिजिटल सुरक्षा तंत्रों में एक स्थायी कमजोर बिंदु रही है। क्वांटम-आधारित एम्पलीफिकेशन तरीका इस अंतर को पाटने का एक रास्ता देता है, जिससे डिजिटल संचार और डेटा की सुरक्षा करने वाले एन्क्रिप्शन की बुनियाद मजबूत होती है।

मुख्य तथ्य

  1. 1तकनीक रैंडमनेस बढ़ाने के लिए क्वांटम भौतिकी का उपयोग करती है
  2. 2आंशिक रैंडम डेटा को लगभग परिपूर्ण क्रिप्टोग्राफिक कुंजियों में बदलती है
  3. 3कंप्यूटरों द्वारा रैंडम-नंबर जनरेशन में छूटे अनुमानित पैटर्न को दूर करती है
  4. 4डिजिटल एन्क्रिप्शन तंत्रों की बुनियाद मजबूत करती है

परीक्षा में ऐसे पूछा जा सकता है

क्वांटम तकनीक, साइबर सुरक्षा और भारत के राष्ट्रीय क्वांटम मिशन से जुड़ा यह विषय RAS प्रारंभिक व मुख्य परीक्षा के लिए महत्वपूर्ण है।

स्थायी GK: भारत के राष्ट्रीय क्वांटम मिशन को 2023 में लगभग 6,003 करोड़ रुपये के परिव्यय के साथ मंजूरी दी गई थी।

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