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2 मई 2026 · 2 May 2026⭐ परीक्षा में महत्वपूर्ण

जनहित याचिका (PIL) का पुनर्संयोजन

Recalibrating Public Interest Litigation

PIL — 1970-80 के दशक में जस्टिस भगवती व कृष्ण अय्यर द्वारा प्रवर्तित; आधार अनुच्छेद 32, 226, 39A।

मुख्य तथ्य

  • जनहित याचिका (PIL) का पुनर्संतुलन।
  • PIL — अनुच्छेद 32/226; लोकस स्टैंडी शिथिल।
  • भूमिका — पर्यावरण, मानवाधिकार, शासन सुधार।
  • दुरुपयोग — तुच्छ व प्रचार-प्रेरित PIL।
  • अग्रणी — न्यायमूर्ति भगवती, कृष्ण अय्यर।
जनहित याचिका (PIL) के पुनर्संतुलन (recalibration) पr चर्चा हुई। PIL न्यायपालिका द्वारा विकसित एक उपकरण है, जो किसी भी जनहित-भावी व्यक्ति को वंचितों/जनहित के मुद्दों पर न्यायालय (अनुच्छेद 32/226) जाने की अनुमति देता है — इसने 'लोकस स्टैंडी' के पारंपरिक नियम को शिथिल किया। PIL ने पर्यावरण, मानवाधिकार व शासन सुधार में बड़ी भूमिका निभाई। किंतु 'तुच्छ' (frivolous) व प्रचार-प्रेरित PIL के दुरुपयोग ने इसके पुनर्संतुलन की माँग उठाई — ताकि न्यायिक समय व सार्वजनिक संसाधन बर्बाद न हों, और न्यायिक अतिक्रमण न हो।

🎯 परीक्षा में कैसे आएगा

PIL, अनुच्छेद 32/226, लोकस स्टैंडाई व न्यायिक अतिरेक राजव्यवस्था में महत्वपूर्ण हैं।

📚 संबंधित स्थायी GK

PIL — अनुच्छेद 32 (SC)/226 (HC); लोकस स्टैंडी शिथिल। अग्रणी — न्यायमूर्ति पी.एन. भगवती, वी.आर. कृष्ण अय्यर। दुरुपयोग — तुच्छ/प्रचार PIL।

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