भारत में न्यायाधिकरणों में सुधार
28 फरवरी 2026 · Raj Study संपादकीय टीम
याद रखें · एक पंक्ति में
न्यायाधिकरण — अर्ध-न्यायिक निकाय; अनुच्छेद 323A (प्रशासनिक) व 323B (अन्य) से जोड़े गए (42वां संशोधन)।
क्या हुआ
भारत में अधिकरणों (tribunals) के सुधार की चर्चा हुई। अधिकरण अर्ध-न्यायिक निकाय हैं जो विशिष्ट क्षेत्रों (कर, प्रशासनिक, पर्यावरण, कंपनी आदि) के विवादों का त्वरित व विशेषज्ञ निपटान करते हैं, जिससे न्यायालयों का बोझ घटता है। संविधान में 42वें संशोधन द्वारा अनुच्छेद 323A (प्रशासनिक अधिकरण) व 323B (अन्य) जोड़े गए। उदाहरण — NGT, CAT, NCLT, ITAT। सुधार की आवश्यकताएँ — रिक्तियाँ भरना, स्वतंत्रता (कार्यपालिका हस्तक्षेप से बचाव), अपील संरचना व सदस्यों की नियुक्ति/कार्यकाल। SC ने अधिकरणों की स्वतंत्रता पर बल दिया है। यह न्याय तक पहुँच व शक्तियों के पृथक्करण से जुड़ा है।
मुख्य तथ्य
- 1भारत में अधिकरणों का सुधार।
- 2अधिकरण — अर्ध-न्यायिक; विशिष्ट विवादों का निपटान।
- 3अनुच्छेद 323A/323B (42वाँ संशोधन)।
- 4उदाहरण — NGT, CAT, NCLT, ITAT।
- 5सुधार — रिक्तियाँ, स्वतंत्रता, नियुक्ति/कार्यकाल।
परीक्षा में ऐसे पूछा जा सकता है
न्यायाधिकरण, अनुच्छेद 323A/323B व ट्रिब्यूनल सुधार अधिनियम राजव्यवस्था में महत्वपूर्ण हैं।
स्थायी GK: अधिकरण — अर्ध-न्यायिक निकाय; अनुच्छेद 323A/323B (42वाँ संशोधन)। उदाहरण — NGT, CAT, NCLT, ITAT। स्वतंत्रता; रिक्तियाँ।