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राष्ट्रीय · राजव्यवस्था

सुप्रीम कोर्ट ने सहमति-आधारित राजद्रोह मुकदमों की अनुमति दी

25 मई 2026 · Raj Study संपादकीय टीम

याद रखें · एक पंक्ति में

राजद्रोह — IPC 124A अब BNS की धारा 152 में; केदारनाथ सिंह (1962) प्रमुख वाद।

क्या हुआ

राजद्रोह (sedition) कानून के मुकदमों से संबंधित सर्वोच्च न्यायालय का घटनाक्रम चर्चा में रहा। राजद्रोह को मूलतः भारतीय दंड संहिता (IPC) की धारा 124A के तहत परिभाषित किया गया था; 2022 में SC ने इसके प्रयोग पर अस्थायी रोक लगाई थी। नई भारतीय न्याय संहिता (BNS), 2023 में 'राजद्रोह' शब्द हटा दिया गया, किंतु धारा 152 के तहत भारत की संप्रभुता, एकता व अखंडता को खतरे में डालने वाले कृत्यों को दंडनीय बनाया गया है। अभिव्यक्ति की स्वतंत्रता (अनुच्छेद 19) व राज्य की सुरक्षा के संतुलन की बहस केंद्र में है।

मुख्य तथ्य

  1. 1राजद्रोह कानून के मुकदमों पर SC का घटनाक्रम।
  2. 2पूर्व प्रावधान — IPC धारा 124A; 2022 में स्थगित।
  3. 3BNS 2023 — 'राजद्रोह' शब्द हटा; धारा 152 नया प्रावधान।
  4. 4बहस — वाक् स्वतंत्रता (अनुच्छेद 19) बनाम राज्य की सुरक्षा।
  5. 5उचित प्रतिबंध — अनुच्छेद 19(2)।

परीक्षा में ऐसे पूछा जा सकता है

राजद्रोह, धारा 124A/BNS 152 व प्रमुख निर्णय राजव्यवस्था में अत्यधिक महत्वपूर्ण हैं।

स्थायी GK: राजद्रोह — पूर्व IPC धारा 124A; 2022 में SC द्वारा स्थगित। BNS 2023 धारा 152 — संप्रभुता/एकता/अखंडता के विरुद्ध कृत्य। अनुच्छेद 19(1)(a) — वाक् स्वतंत्रता; 19(2) उचित प्रतिबंध।

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