शहीद दिवस
24 मार्च 2026 · Raj Study संपादकीय टीम
याद रखें · एक पंक्ति में
शहीद दिवस (23 मार्च 1931) — भगत सिंह, सुखदेव, राजगुरु को लाहौर षड्यंत्र केस में फांसी।
क्या हुआ
'शहीद दिवस' (Shaheed Diwas, 23 मार्च) की चर्चा हुई। 23 मार्च 1931 को भारतीय स्वतंत्रता संग्राम के तीन महान क्रांतिकारियों — भगत सिंह, सुखदेव थापर व शिवराम राजगुरु — को ब्रिटिश सरकार ने लाहौर में फाँसी दी थी (लाहौर षड्यंत्र केस / सॉन्डर्स की हत्या के संबंध में)। भगत सिंह व बटुकेश्वर दत्त ने 1929 में केंद्रीय विधानसभा (दिल्ली) में बम फेंककर 'इंकलाब ज़िंदाबाद' का नारा दिया था ('बहरों को सुनाने' हेतु)। भगत सिंह HSRA (हिंदुस्तान सोशलिस्ट रिपब्लिकन एसोसिएशन) से जुड़े थे व एक विचारक भी थे ('मैं नास्तिक क्यों हूँ')। (नोट: 30 जनवरी, गांधीजी की पुण्यतिथि, भी शहीद दिवस है।) यह स्वतंत्रता संग्राम से जुड़ा है।
मुख्य तथ्य
- 1शहीद दिवस — 23 मार्च।
- 21931 — भगत सिंह, सुखदेव, राजगुरु को फाँसी।
- 3लाहौर षड्यंत्र केस; HSRA।
- 41929 — केंद्रीय विधानसभा में बम; इंकलाब ज़िंदाबाद।
- 530 जनवरी (गांधीजी) भी शहीद दिवस।
परीक्षा में ऐसे पूछा जा सकता है
भगत सिंह, HSRA व क्रांतिकारी आंदोलन आधुनिक भारतीय इतिहास में पूछे जाते हैं।
स्थायी GK: शहीद दिवस — 23 मार्च 1931; भगत सिंह, सुखदेव, राजगुरु को फाँसी (लाहौर)। HSRA; इंकलाब ज़िंदाबाद। (30 जनवरी भी शहीद दिवस — गांधीजी)।