13 जनवरी 2026 · 13 January 2026⭐ परीक्षा में महत्वपूर्ण
अमेरिका का बहुपक्षवाद से पीछे हटना
US retreat from multilateralism
अमेरिका का बहुपक्षवाद से पीछे हटना — ISA, WHO, पेरिस समझौते जैसे ढांचों से निकलना।
मुख्य तथ्य
- •अमेरिका का बहुपक्षवाद से पीछे हटना।
- •बहुपक्षवाद — साझा संस्थाओं से वैश्विक समाधान।
- •'अमेरिका फर्स्ट'; संगठनों/समझौतों से बाहर।
- •वैश्विक शासन में शून्यता; चीन प्रभाव का जोखिम।
- •भारत — सुधारित बहुपक्षवाद; ग्लोबल साउथ।
अमेरिका के बहुपक्षवाद (multilateralism) से पीछे हटने की चर्चा हुई। बहुपक्षवाद का अर्थ है कई देशों का साझा संस्थाओं (UN, WTO, WHO, पेरिस समझौता) व नियमों के माध्यम से वैश्विक समस्याओं का समाधान। 'अमेरिका फर्स्ट' नीति, संरक्षणवाद, कुछ अंतरराष्ट्रीय संगठनों/समझौतों से बाहर निकलना व एकतरफा कार्रवाइयाँ अमेरिका के बहुपक्षवाद से पीछे हटने को दर्शाती हैं। इससे वैश्विक शासन में शून्यता, अनिश्चितता व चीन के बढ़ते प्रभाव का जोखिम बढ़ता है। भारत 'सुधारित बहुपक्षवाद', बहुध्रुवीयता व ग्लोबल साउथ की आवाज़ की वकालत करता है। यह वैश्विक व्यवस्था, अंतरराष्ट्रीय सहयोग व भारत की विदेश नीति से जुड़ा है।
🎯 परीक्षा में कैसे आएगा
बहुपक्षवाद, वैश्विक शासन व UN सुधार अंतरराष्ट्रीय में महत्वपूर्ण हैं।
📚 संबंधित स्थायी GK
बहुपक्षवाद — साझा संस्थाएँ (UN, WTO)। 'अमेरिका फर्स्ट'; संरक्षणवाद; एकतरफावाद। भारत — सुधारित बहुपक्षवाद; ग्लोबल साउथ।
✨ RajAI— RAS Prelims Expert