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राष्ट्रीय · अर्थव्यवस्था

तरलता प्रबंधन हेतु परिवर्तनीय दर रेपो (VRR)

23 मार्च 2026 · Raj Study संपादकीय टीम

याद रखें · एक पंक्ति में

VRR — RBI द्वारा नीलामी के माध्यम से परिवर्तनीय (बाज़ार-निर्धारित) दर पर तरलता डालने का उपकरण।

क्या हुआ

तरलता प्रबंधन हेतु परिवर्तनीय दर रेपो (Variable Rate Repo/VRR) की चर्चा हुई। RBI बैंकिंग प्रणाली में तरलता (नकदी) का प्रबंधन अपने विभिन्न उपकरणों से करता है। VRR के तहत RBI नीलामी के माध्यम से बैंकों को अल्पकालिक धन उधार देता है (तरलता डालने हेतु), जहाँ ब्याज दर निश्चित (फिक्स्ड रेपो) के बजाय नीलामी से तय होती है। इसका विपरीत परिवर्तनीय दर रिवर्स रेपो (VRRR) है, जो अतिरिक्त तरलता सोखता है। ये उपकरण अल्पकालिक ब्याज दरों को नीति दर के अनुरूप रखने व मुद्रास्फीति/वृद्धि के संतुलन में सहायक हैं। ये RBI के तरलता समायोजन सुविधा (LAF) का भाग हैं।

मुख्य तथ्य

  1. 1तरलता प्रबंधन हेतु परिवर्तनीय दर रेपो (VRR)।
  2. 2RBI नीलामी से बैंकों को अल्पकालिक धन देता है।
  3. 3VRRR — अतिरिक्त तरलता सोखता है।
  4. 4तरलता समायोजन सुविधा (LAF) का भाग।
  5. 5उद्देश्य — दरें नीति दर के अनुरूप रखना।

परीक्षा में ऐसे पूछा जा सकता है

VRR, LAF व तरलता प्रबंधन अर्थव्यवस्था में पूछे जाते हैं।

स्थायी GK: VRR — नीलामी-आधारित रेपो (तरलता डालना)। VRRR — तरलता सोखना। LAF — तरलता समायोजन सुविधा। RBI मौद्रिक नीति उपकरण।

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